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Rampur Bushahar News: सुंडा-सनेई सड़क का दल ने किया निरीक्षण

Thu, 13 Aug 2026 11:37 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2026 11:37 PM IST
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Team inspects Sunda-Sanei road
सुंडा-सनेई सडक़ पर आपदा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करते भू वैज्ञानिक और विभागों के प्रतिनिधि।
तकनीकी आकलन के लिए जीएसआई को भेजें मामला
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पानी की सही निकासी, कटाव रोधी मैट और गहरी जड़ों वाले पौधे लगाने की दी सलाह
. उपमंडल प्रशासन ने उपायुक्त शिमला को भेजी रिपोर्ट
. सुरक्षा कार्यों के लिए लोक निर्माण और वन विभाग से मांगे प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
नोगवैली और 12/20 क्षेत्र को जोड़ने वाली सुंडा-सनेई सड़क पर भूस्खलन का खतरा बरकरार है। वर्ष 2023 से जोखिमभरे बने इस क्षेत्र का बीते दिनों भू वैज्ञानिक और संयुक्त विभागीय दल ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद भूवैज्ञानिक ने भूस्खलन के वैज्ञानिक कारणों और सुरक्षा उपायों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उपमंडल प्रशासन को सौंपी है। रामपुर के एसडीएम हर्ष अमरेंद्र सिंह ने यह रिपोर्ट जिला आपदा प्राधिकरण को भेजी है। सहायक भू वैज्ञानिक सुनील वर्मा ने प्रशासन को सौंपी रिपोर्ट में बताया कि आपदा प्रभावित क्षेत्र में समस्या के स्थायी समाधान के लिए जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) से तकनीकी आकलन करवाया जाना चाहिए। साथ ही दल ने पानी की सही निकासी, कटाव रोधी मैट और गहरी जड़ों वाले पौधे लगाने की सलाह दी है। दल ने रिपोर्ट में बताया कि जब तक स्थायी रूप से स्थिर करने का काम शुरू नहीं होता, तब तक पानी की निकासी बिना रुकावट होती रहे, इसके लिए सड़क के किनारे बनी मौजूदा नालियों की नियमित रूप से सफाई होनी चाहिए। डंसा और रचोली पंचायत के ग्रामीणों ने इस समस्या से स्थायी निजात दिलाने की मांग की है। नोगवैली को जोड़ने वाली सुंडा-सनेई सड़क पर ग्रामीण जोखिमभरा सफर करने को मजबूर हैं। वर्ष 2023 में आई प्राकृतिक आपदा के बाद से यहां भूस्खलन का सिलसिला जारी है और हर वर्ष यहां भूस्खलन की घटनाएं पेश आ रही हैं। आपदा प्रभावित इस क्षेत्र के ठीक नीचे रचोली पंचायत का खोयी गांव है, जहां रहने वाले ग्रामीण खतरों के साये में जीवन यापन कर रहे हैं। जन प्रतिनिधियों और ग्रामीण तीन साल से इस समस्या के समाधान की मांग उठा रहे हैं।
रिपोर्ट में सुरक्षा के बताए उपाय
रिपोर्ट में टीम ने भूस्खलन क्षेत्र की सुरक्षा के उपाय बताए हैं। लंबे समय तक स्थिरता बनाए रखने के उपाय ढलान को स्थायी रूप से स्थिर करने के लिए पानी को सुरक्षित रूप से रोकने और हटाने के लिए एक व्यापक सतही और उप सतही जल निकासी प्रणाली विकसित करने की सलाह दी है। जियोटेक्सटाइल, कटाव-रोधी मैट, हाइड्रोसीडिंग और उपयुक्त बायो इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग करके खुली ढलानों को स्थिर करने के लिए कहा है। मिट्टी को बांधे रखने और कटाव को कम करने के लिए गहरी जड़ों वाले स्थानीय पेड़-पौधे लगाने, ढलान में होने वाली हलचल का पता लगाने के लिए सेंसर लगाने और जहां भी चट्टान गिरने का खतरा हो, वहां चुनिंदा रॉक स्केलिंग करने की सलाह दी है। बस्तियों, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को बचाने के लिए विस्तृत इंजीनियरिंग भू-वैज्ञानिक और भू-तकनीकी जांच करने को भी कहा है। वहीं उपमंडल प्रशासन ने लोक निर्माण और वन विभाग को भी आपदा प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा के लिहाज से किए जाने वाले कार्यों के प्रस्ताव तैयार कर भेजने के निर्देश दिए हैं।
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भूवैज्ञानिक की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट को जिला आपदा प्राधिकरण को भेज दी गई है। लोक निर्माण और वन विभाग से भी सुरक्षा कार्यों के प्रस्ताव मंगाए गए हैं। - हर्ष अमरेंद्र सिंह,
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एसडीएम, रामपुर

सुंडा-सनेई सडक़ पर आपदा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करते भू वैज्ञानिक और विभागों के प्रतिनिधि।

सुंडा-सनेई सडक़ पर आपदा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करते भू वैज्ञानिक और विभागों के प्रतिनिधि।

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