{"_id":"5f0f32978ebc3e635313ec4c","slug":"suicide-case-rampur-hp-news-sml3384880176","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षिका आत्महत्या मामले में राष्ट्रपति से न्याय की गुहार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षिका आत्महत्या मामले में राष्ट्रपति से न्याय की गुहार
विज्ञापन
रामपुर बुशहर। शिक्षिका दिव्या कपूर आत्महत्या मामले में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई न होने पर परिजनों में रोष है। परिजनों ने पुलिस की लचर कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठाए हैं। इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को परिजनों ने नवनियुक्त एसडीएम रामपुर सुरेंद्र मोहन से मुलाकात की और एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में परिजनों ने राष्ट्रपति से सीबीआई जांच कर शिक्षिका दिव्या को इंसाफ लगाने की गुहार लगाई। परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि दिव्या आत्महत्या मामले की छानबीन में रामपुर पुलिस ने शुरू से ही लापरवाही बरती है। इसके चलते ससुराल पक्ष के लोग आज खुले में घूम रहे हैं।
गौरतलब है कि नौ जून की शाम को निजी स्कूल में तैनात शिक्षिका दिव्या कपूर ने ससुराल में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। हालांकि, उससे पूर्व शिक्षिका ने सोशल मीडिया में एक नोट डाल कर जमीन विवाद के कारण परेशान करने के आरोप ससुराल पक्ष के लोगों पर लगाए थे। इसके बाद शिमला में पोस्टमार्टम के दौरान सुसाइड नोट भी मिला था और उसमें ससुराल पक्ष के कुछ लोगों के नाम लिखे गए थे। आरोपियों को समय रहते न पकड़ने के आरोप भी लगाए गए, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं। इस मामले में परिजनों और छात्र-छात्राओं की ओर से कैंडल मार्च और रैलियां निकाल कर कई बार विरोध प्रदर्शन भी किए गए। परिजनों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव के कारण सुसाइड नोट में शामिल पांच लोगों को भागने का अवसर मिल गया और वे सभी जमानत पर बाहर आ गए। वहीं, वे सभी आज तक खुले में बाहर घूम रहे हैं। ज्ञापन में परिजनों ने बताया कि इससे पूर्व भी वे मुख्यमंत्री, राज्यपाल और मुख्य न्यायाधीश शिमला को एसडीएम रामपुर के माध्यम से ज्ञापन सौंप चुके हैं। बावजूद इसके आज दिन तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस मौके पर प्रेमनाथ शर्मा, विरेंद्र भलूनी सहित अन्य मौजूद रहे।
विज्ञापन
गौरतलब है कि नौ जून की शाम को निजी स्कूल में तैनात शिक्षिका दिव्या कपूर ने ससुराल में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। हालांकि, उससे पूर्व शिक्षिका ने सोशल मीडिया में एक नोट डाल कर जमीन विवाद के कारण परेशान करने के आरोप ससुराल पक्ष के लोगों पर लगाए थे। इसके बाद शिमला में पोस्टमार्टम के दौरान सुसाइड नोट भी मिला था और उसमें ससुराल पक्ष के कुछ लोगों के नाम लिखे गए थे। आरोपियों को समय रहते न पकड़ने के आरोप भी लगाए गए, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं। इस मामले में परिजनों और छात्र-छात्राओं की ओर से कैंडल मार्च और रैलियां निकाल कर कई बार विरोध प्रदर्शन भी किए गए। परिजनों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव के कारण सुसाइड नोट में शामिल पांच लोगों को भागने का अवसर मिल गया और वे सभी जमानत पर बाहर आ गए। वहीं, वे सभी आज तक खुले में बाहर घूम रहे हैं। ज्ञापन में परिजनों ने बताया कि इससे पूर्व भी वे मुख्यमंत्री, राज्यपाल और मुख्य न्यायाधीश शिमला को एसडीएम रामपुर के माध्यम से ज्ञापन सौंप चुके हैं। बावजूद इसके आज दिन तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस मौके पर प्रेमनाथ शर्मा, विरेंद्र भलूनी सहित अन्य मौजूद रहे।
विज्ञापन