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कांडा में वरिष्ठ नागरिक ने सोशल मीडिया पर खोली शिक्षकों की पोल
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नेरवा(रोहड़ू)। समाज में गुरु का महत्व सबसे ऊपर माना गया है। आज के समय में कुछ शिक्षक अपना कार्य सही तरीके से नहीं कर रहे हैं। ऐसा ही मामला बुधवार को सोशल मीडिया में वायरल हुआ। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के माध्यम से शिक्षा खंड कुपवी के तहत आने वाले दूरदराज क्षेत्र में एक वरिष्ठ नागरिकों ने प्राथमिक, माध्यमिक स्कूल सहित आंगनबाड़ी केंद्र कांडा में तैनात शिक्षकों की पोल खोल कर रख दी।
कांडा के ही वरिष्ठ नागरिक देई राम ठाकुर कहा कि इन शिक्षण संस्थानों में तैनात शिक्षकों की मनमर्जी के चलते बच्चों का भविष्य खतरे में है। मुख्याध्यापक सहित अन्य अध्यापकों का न तो स्कूल में आने का कोई निर्धारित समय है, न ही स्कूल से जाने का। शिक्षकों की जब मर्जी होती है, यह तब स्कूल आते हैं और जब मर्जी होती है, चले जाते हैं। बुधवार को दस बजे तक जब इन तीनों शिक्षण संस्थानों में कोई भी अध्यापक नहीं पंहुचा तो एक स्थानीय व्यक्ति ने वरिष्ठ नागरिक द्वारा लगाए गए आरोपों का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद माध्यमिक स्कूल में साढ़े दस बजे शारीरिक शिक्षक तो पंहुच गया परंतु तीनों ही संस्थानों में पौने दो बजे तक कोई भी शिक्षक नहीं पहुंचा था। ग्यारह बजे के करीब स्कूल में मौजूद चपड़ासी से जब पूछा गया कि अध्यापक कब आएंगे तो उसने जवाब दिया कि एक आधे घंटे तक आ जाएंगे। शिक्षकों के इस गैरजिम्मेदाराना रवैये से अभिभावकों में रोष है। वीडियो वायरल करने वाले व्यक्ति का पता कर जब उससे संपर्क साधा गया तो उन्होंने बताया कि माध्यमिक स्कूल में 12, प्राइमरी स्कूल में 15 व आंगनबाड़ी केंद्र में करीब 20 बच्चे पढ़ाई के लिए आते हैं। देई राम ठाकुर व जय दत्त शर्मा ने शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज से मांग की है कि अपनी ड्यूटी में कोताही बरत रहे अध्यापकों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि इन स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न हो।
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कांडा के ही वरिष्ठ नागरिक देई राम ठाकुर कहा कि इन शिक्षण संस्थानों में तैनात शिक्षकों की मनमर्जी के चलते बच्चों का भविष्य खतरे में है। मुख्याध्यापक सहित अन्य अध्यापकों का न तो स्कूल में आने का कोई निर्धारित समय है, न ही स्कूल से जाने का। शिक्षकों की जब मर्जी होती है, यह तब स्कूल आते हैं और जब मर्जी होती है, चले जाते हैं। बुधवार को दस बजे तक जब इन तीनों शिक्षण संस्थानों में कोई भी अध्यापक नहीं पंहुचा तो एक स्थानीय व्यक्ति ने वरिष्ठ नागरिक द्वारा लगाए गए आरोपों का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद माध्यमिक स्कूल में साढ़े दस बजे शारीरिक शिक्षक तो पंहुच गया परंतु तीनों ही संस्थानों में पौने दो बजे तक कोई भी शिक्षक नहीं पहुंचा था। ग्यारह बजे के करीब स्कूल में मौजूद चपड़ासी से जब पूछा गया कि अध्यापक कब आएंगे तो उसने जवाब दिया कि एक आधे घंटे तक आ जाएंगे। शिक्षकों के इस गैरजिम्मेदाराना रवैये से अभिभावकों में रोष है। वीडियो वायरल करने वाले व्यक्ति का पता कर जब उससे संपर्क साधा गया तो उन्होंने बताया कि माध्यमिक स्कूल में 12, प्राइमरी स्कूल में 15 व आंगनबाड़ी केंद्र में करीब 20 बच्चे पढ़ाई के लिए आते हैं। देई राम ठाकुर व जय दत्त शर्मा ने शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज से मांग की है कि अपनी ड्यूटी में कोताही बरत रहे अध्यापकों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि इन स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न हो।
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