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सराहन में गुरु का महत्व बताया

Thu, 26 May 2022 11:18 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 26 May 2022 11:18 PM IST
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shri magbhagwat kath in sarahan
पावन आरती सराहन में एसडीएम रामपुर सुरेंद्र मोहन दीप प्रज्वलित करते हुए - फोटो : RAMPUR-HP
ज्यूरी (रामपुर बुशहर)। सराहन मां भीमाकाली मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा में साध्वी कालिंदी भारती ने अपने प्रवचनों से लोगों को ब्रह्मज्ञान के बारे में विस्तार से समझाया। इस दौरान बड़ी संख्या में आसपास के लोगों ने उपस्थिति दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि भगत ध्रुव की बालक अवस्था है लेकिन वह प्रभु से मिलने की उत्कंठा लिए वन में जाकर तपस्या करनी शुरू कर देता है। यहां उसकी भेंट नारद से होती है, जो उनको ब्रह्मज्ञान प्रदान कर उसके घट के भीतर ही ईश्वर के प्रत्यक्ष दर्शन करवा देते हैं।
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आज मानव भी प्रभु से मिलने के लिए तत्पर है लेकिन उसके पास प्रभु प्राप्ति का कोई भी साधन नहीं है। हमारे सभी वेद, शास्त्रों और धार्मिक ग्रंथों में यही लिखा है कि ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति के लिए हमें गुरु की शरणागति होना पड़ता है। जब भी एक जीव परमात्मा की खोज में निकलता है तो वह सीधा परमात्मा को प्राप्त नहीं कर पाता। परमात्मा अमृत का सागर है किंतु मानव उस अमृत पान से सदा वंचित रह जाता है।
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सतगुरु से संबंध के बिना ज्ञान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि कबीर को प्रकाशित करने वाले सूर्य रूपी गुरु रामानंद थे। नरेंद्र को विवेकानंद बनाने वाले श्रेष्ठ गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस थे। गुरु संसार सागर से पार उतारने वाले हैं और उनका दिया हुआ ज्ञान नाव के समान बताया गया है। इस दौरान मंदिर में आयोजित पावन आरती में एसडीएम रामपुर सुरेंद्र मोहन, मंदिर अधिकारी बालक राम नेगी और विपिन भलूनी विशेष रुप से मौजूद रहे।
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