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Rampur Bushahar News: न अंग्रेजी-गणित और न विज्ञान विषय के शिक्षक, कैसे संवरेगा बच्चों का भविष्य
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पौढ़िया स्कूल
पौड़िया स्कूल में शिक्षकों का टोटा, 70 छात्रों की पढ़ाई प्रभावित
महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों के पद रिक्त होने से विद्यार्थियों का भविष्य बना अंधकारमय
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)।
दुर्गम क्षेत्र के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल पौड़िया में लंबे समय से शिक्षकों के कई पद खाली चल रहे हैं। हाल ही में प्रदेश में करीब साढ़े सात सौ प्रिंसिपलों की नियुक्ति के बावजूद यह स्कूल अभी भी आवश्यक स्टाफ से वंचित है, जिससे 70 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वर्तमान में केवल शारीरिक शिक्षक और इतिहास के प्रवक्ता के पद ही भरे हुए हैं, जबकि अंग्रेजी, राजनीति शास्त्र, भूगोल, गणित और विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों के पद रिक्त हैं। ऐसे में छात्रों को सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करनी पड़ रही है। हालांकि, तैनात शिक्षक अपनी क्षमता से अधिक कार्य करते हुए व्यवस्था को बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। शिक्षकों की कमी के चलते कई अभिभावकों ने अपने बच्चों का दाखिला दूसरे स्कूलों में करवा दिया है। वहीं, गरीब और मजदूर वर्ग के परिवारों के बच्चे इसी स्कूल पर निर्भर हैं। निकटतम अन्य स्कूल करीब 20 किलोमीटर दूर हैं और वहां तक पहुंचने के लिए कोई नियमित परिवहन सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान सीताराम ने बताया कि पिछले सत्र में गणित अध्यापक की व्यवस्था वैकल्पिक प्रबंधन समिति और शिक्षकों के आर्थिक सहयोग से की गई थी, जो स्कूल पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि शारीरिक शिक्षक दिनेश गजटा और प्रवक्ता मनोज चौहान के आने से छात्रों और अभिभावकों में उत्साह बढ़ा है और छात्र संख्या में भी इजाफा हुआ है। इसके बावजूद गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे प्रमुख विषयों के पद अभी तक खाली हैं। इन पदों को भरने के लिए कई बार शिक्षा मंत्री और विभाग के समक्ष मांग उठाई गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
शिक्षा
मंत्री से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल
स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों सीताराम, लायक राम, घनश्याम, विनोद रांटा, देवेंद्र शर्मा, आशा, सुलोचना, निशा देवी, राधा देवी, रक्षा और सुनीता ने निर्णय लिया है कि शीघ्र ही एक प्रतिनिधिमंडल शिक्षा मंत्री से मिलकर समस्या के समाधान की मांग करेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि दुर्गम क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए जल्द ही शिक्षकों के रिक्त पद भरे जाएंगे।
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महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों के पद रिक्त होने से विद्यार्थियों का भविष्य बना अंधकारमय
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)।
दुर्गम क्षेत्र के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल पौड़िया में लंबे समय से शिक्षकों के कई पद खाली चल रहे हैं। हाल ही में प्रदेश में करीब साढ़े सात सौ प्रिंसिपलों की नियुक्ति के बावजूद यह स्कूल अभी भी आवश्यक स्टाफ से वंचित है, जिससे 70 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वर्तमान में केवल शारीरिक शिक्षक और इतिहास के प्रवक्ता के पद ही भरे हुए हैं, जबकि अंग्रेजी, राजनीति शास्त्र, भूगोल, गणित और विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों के पद रिक्त हैं। ऐसे में छात्रों को सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करनी पड़ रही है। हालांकि, तैनात शिक्षक अपनी क्षमता से अधिक कार्य करते हुए व्यवस्था को बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। शिक्षकों की कमी के चलते कई अभिभावकों ने अपने बच्चों का दाखिला दूसरे स्कूलों में करवा दिया है। वहीं, गरीब और मजदूर वर्ग के परिवारों के बच्चे इसी स्कूल पर निर्भर हैं। निकटतम अन्य स्कूल करीब 20 किलोमीटर दूर हैं और वहां तक पहुंचने के लिए कोई नियमित परिवहन सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान सीताराम ने बताया कि पिछले सत्र में गणित अध्यापक की व्यवस्था वैकल्पिक प्रबंधन समिति और शिक्षकों के आर्थिक सहयोग से की गई थी, जो स्कूल पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि शारीरिक शिक्षक दिनेश गजटा और प्रवक्ता मनोज चौहान के आने से छात्रों और अभिभावकों में उत्साह बढ़ा है और छात्र संख्या में भी इजाफा हुआ है। इसके बावजूद गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे प्रमुख विषयों के पद अभी तक खाली हैं। इन पदों को भरने के लिए कई बार शिक्षा मंत्री और विभाग के समक्ष मांग उठाई गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
शिक्षा
मंत्री से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल
स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों सीताराम, लायक राम, घनश्याम, विनोद रांटा, देवेंद्र शर्मा, आशा, सुलोचना, निशा देवी, राधा देवी, रक्षा और सुनीता ने निर्णय लिया है कि शीघ्र ही एक प्रतिनिधिमंडल शिक्षा मंत्री से मिलकर समस्या के समाधान की मांग करेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि दुर्गम क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए जल्द ही शिक्षकों के रिक्त पद भरे जाएंगे।
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