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आजादी के सात दशक बाद भी नंती-टिक्कर के लिए नहीं बनी सड़क
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नंती टिक्कर में सड़क की सुविधा न होने पर ग्रामीण मरीजों को 10 किलोमीटर पैदल सड़क पर पहुंचाने पर मजब
- फोटो : RAMPUR-HP
ज्यूरी(रामपुर बुशहर)। आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी 15/20 वैली के दुर्गम क्षेत्र नंती-टिक्कर के लोग सड़क सुविधा से वंचित हैं। इसके चलते क्षेत्र के लोगों को मरीजों को करीब दस किलोमीटर पैदल पीठ या पालकी पर उठा कर सडक तक पहुंचाने को मजबूर होना पड़ रहा है। वर्तमान में प्रदेश के कोने-कोने में सड़क पहुंच चुकी है, लेकिन इस क्षेत्र को जाने वाली सड़क वन विभाग की एनओसी के चक्कर में वन विभाग और लोक निर्माण विभाग के कार्यालयों में पिछले पांच सालों से धूम रही है। क्षेत्र के लोगों की इस परेशानी को न तो लोक निर्माण विभाग और न ही वन विभाग गंभीरता से ले रहा है जिसका खामियाजा हजारों लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
बीते रोज भी नंती-टिक्कर में पीयूष नाम के युवक को कुत्ते ने बुरी तरह से काट लिया। सड़क न होने के कारण घायल को गांव के लोगों ने कुर्सी पर बैठा कर दो डंडों के सहारे उपचार के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर फांचा तक पैदल पहुंचाया। खासी मशक्कत के बाद मरीज को सड़क तक पहुंचाया गया और फिर अस्पताल तक पहुंचा कर इलाज शुरू किया गया।
ग्रामीणों निशु सांसटा, अशोक, जितेंद्र, सतीश, भरत, अब्बू, अंकुश, साहिल, नरेश और निखिल का कहना है कि गांव की सड़क की फाइल वन विभाग की एनओसी के लिए लगी आपत्तियों को दूर न करने के कारण एक्सईएन लोक निर्माण विभाग रामपुर और डीएफओ वन विभाग के रामपुर दफ्तरों में पांच सालों से घूम रही है। एनओसी न मिलने के कारण इस गांव को अभी तक सड़क से नहीं जोड़ा जा सका है। सरकार और नेता भी लोगों की समस्याओं का समाधान करने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
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ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस सड़क की फाइल को जल्द एनओसी की आपत्तियां दूर कर सड़क निर्माण कार्य पूरा करने का आदेश दें।
उधर, एसडीओ लोनिवि सराहन गोवर्धन शर्मा ने बताया कि इस सड़क को बनाने में लगी आपत्तियों को हटाने संबंधित फाइल को एसडीएम रामपुर से डीसी शिमला को भेज दिया गया है। वन और पर्यावरण की एनओसी मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।
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बीते रोज भी नंती-टिक्कर में पीयूष नाम के युवक को कुत्ते ने बुरी तरह से काट लिया। सड़क न होने के कारण घायल को गांव के लोगों ने कुर्सी पर बैठा कर दो डंडों के सहारे उपचार के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर फांचा तक पैदल पहुंचाया। खासी मशक्कत के बाद मरीज को सड़क तक पहुंचाया गया और फिर अस्पताल तक पहुंचा कर इलाज शुरू किया गया।
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ग्रामीणों निशु सांसटा, अशोक, जितेंद्र, सतीश, भरत, अब्बू, अंकुश, साहिल, नरेश और निखिल का कहना है कि गांव की सड़क की फाइल वन विभाग की एनओसी के लिए लगी आपत्तियों को दूर न करने के कारण एक्सईएन लोक निर्माण विभाग रामपुर और डीएफओ वन विभाग के रामपुर दफ्तरों में पांच सालों से घूम रही है। एनओसी न मिलने के कारण इस गांव को अभी तक सड़क से नहीं जोड़ा जा सका है। सरकार और नेता भी लोगों की समस्याओं का समाधान करने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
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ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस सड़क की फाइल को जल्द एनओसी की आपत्तियां दूर कर सड़क निर्माण कार्य पूरा करने का आदेश दें।
उधर, एसडीओ लोनिवि सराहन गोवर्धन शर्मा ने बताया कि इस सड़क को बनाने में लगी आपत्तियों को हटाने संबंधित फाइल को एसडीएम रामपुर से डीसी शिमला को भेज दिया गया है। वन और पर्यावरण की एनओसी मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।