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Rampur Bushahar News: सराहन क्षेत्र में बढ़ रहे भालुओं के हमले, ढाई वर्ष में चार मामले आए सामने
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. बड़े भूभाग में फैले जंगल के कारण संवेदनशील बना क्षेत्र
. अब एनाइडर सिस्टम से जंगली जानवरों को दूर रखने का किया जा रहा प्रयास
. जंगली जानवरों के हमलों से बचाव को लेकर घर-घर जाकर किया जा रहा जागरूक : गुरहर्ष
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। उपमंडल रामपुर में भालुओं के हमलों के आंकड़े में लगातार इजाफा हो रहा है। सराहन क्षेत्र इसको लेकर काफी संवेदनशील बना हुआ है। यहां बड़े भूभाग में फैले जंगल जंगली जानवरों की दहशत का कारण बने हुए हैं। सराहन क्षेत्र की बात करें, तो यहां ढाई वर्ष में भालुओं के हमले के 4 मामले सामने आ चुके हैं। खासकर, इस सीजन में यह समस्या बढ़ जाती है। इससे पूर्व बधाल, रांवी, बठारा और डंसा क्षेत्र में भालुओं के हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सराहन के भगावट वन बीट में पेश आई घटना के बाद वन विभाग यहां एनाइडर सिस्टम स्थापित करेगा। भालुओं और अन्य जंगली जानवरों से मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए यह सिस्टम काफी कारगर साबित हो रहा है। एनाइडर (एनिमल इंट्रजन डिटेक्शन एंड रेपेलेंट सिस्टम) एक आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरण है, जिसका उपयोग वन विभाग की ओर से मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए किया जाता है। यह सिस्टम सेंसर तकनीक के तहत कार्य करता है और इस डिवाइस में एडवांस मोशन, इंफ्रारेड सेंसर लगे होते हैं, जो जंगल से निकलकर खेतों या रिहायशी इलाकों की तरफ आने वाले जंगली जानवरों की आहट को 100 मीटर की दूरी से ही पहचान लेते हैं। जानवर के करीब आते ही यह सिस्टम सक्रिय हो जाता है और तेज एलईडी फ्लैश लाइट चमकाने के साथ-साथ अलग-अलग तरह की डरावनी आवाजें और सायरन बजने लगता है।
हिमाचल प्रदेश के वन क्षेत्रों में फसलों और मानव सुरक्षा को लेकर इस एनाइडर सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। वनों की ओर लगातार बढ़ते रिहायशी इलाके भी हमले की वजह माने जा रहे हैं। सराहन क्षेत्र में लोगों के बगीचे जंगल के साथ लगते इलाकों में है। ऐसे में यहां जंगली जानवरों की आवाजाही सक्रिय रूप से बनी हुई है। हालांकि, वन विभाग लगातार ग्रामीणों को जंगली जानवरों के हमलों से बचाव को लेकर जागरूक कर रहा है। वन कर्मी घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। वहीं, वन विभाग ने जंगल के साथ लगते इलाकों में ग्रामीणों को अकेले न जाने, समूहों में घर से बाहर निकलने से सुरक्षा के सभी मापदंड पूरा करने का आह्वान किया है। वन विभाग रामपुर के डीएफओ गुरहर्ष सिंह ने बताया कि जंगलों के साथ लगते इलाके संवेदनशील बने हुए हैं। भगावट बीट में जहां हमला पेश आया है वहां एनाइडर सिस्टम लगाए जा रहे हैं। बड़े भूभाग में फैले जंगल के कारण भालू को पकड़ना मुश्किल है। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से अपने खेतों और बगीचों में जाते समय समूह में जाने और वन विभाग की ओर से सुझाए गए सुरक्षा उपायों को अपनाने का आह्वान किया है।
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. अब एनाइडर सिस्टम से जंगली जानवरों को दूर रखने का किया जा रहा प्रयास
. जंगली जानवरों के हमलों से बचाव को लेकर घर-घर जाकर किया जा रहा जागरूक : गुरहर्ष
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। उपमंडल रामपुर में भालुओं के हमलों के आंकड़े में लगातार इजाफा हो रहा है। सराहन क्षेत्र इसको लेकर काफी संवेदनशील बना हुआ है। यहां बड़े भूभाग में फैले जंगल जंगली जानवरों की दहशत का कारण बने हुए हैं। सराहन क्षेत्र की बात करें, तो यहां ढाई वर्ष में भालुओं के हमले के 4 मामले सामने आ चुके हैं। खासकर, इस सीजन में यह समस्या बढ़ जाती है। इससे पूर्व बधाल, रांवी, बठारा और डंसा क्षेत्र में भालुओं के हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सराहन के भगावट वन बीट में पेश आई घटना के बाद वन विभाग यहां एनाइडर सिस्टम स्थापित करेगा। भालुओं और अन्य जंगली जानवरों से मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए यह सिस्टम काफी कारगर साबित हो रहा है। एनाइडर (एनिमल इंट्रजन डिटेक्शन एंड रेपेलेंट सिस्टम) एक आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरण है, जिसका उपयोग वन विभाग की ओर से मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए किया जाता है। यह सिस्टम सेंसर तकनीक के तहत कार्य करता है और इस डिवाइस में एडवांस मोशन, इंफ्रारेड सेंसर लगे होते हैं, जो जंगल से निकलकर खेतों या रिहायशी इलाकों की तरफ आने वाले जंगली जानवरों की आहट को 100 मीटर की दूरी से ही पहचान लेते हैं। जानवर के करीब आते ही यह सिस्टम सक्रिय हो जाता है और तेज एलईडी फ्लैश लाइट चमकाने के साथ-साथ अलग-अलग तरह की डरावनी आवाजें और सायरन बजने लगता है।
हिमाचल प्रदेश के वन क्षेत्रों में फसलों और मानव सुरक्षा को लेकर इस एनाइडर सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। वनों की ओर लगातार बढ़ते रिहायशी इलाके भी हमले की वजह माने जा रहे हैं। सराहन क्षेत्र में लोगों के बगीचे जंगल के साथ लगते इलाकों में है। ऐसे में यहां जंगली जानवरों की आवाजाही सक्रिय रूप से बनी हुई है। हालांकि, वन विभाग लगातार ग्रामीणों को जंगली जानवरों के हमलों से बचाव को लेकर जागरूक कर रहा है। वन कर्मी घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। वहीं, वन विभाग ने जंगल के साथ लगते इलाकों में ग्रामीणों को अकेले न जाने, समूहों में घर से बाहर निकलने से सुरक्षा के सभी मापदंड पूरा करने का आह्वान किया है। वन विभाग रामपुर के डीएफओ गुरहर्ष सिंह ने बताया कि जंगलों के साथ लगते इलाके संवेदनशील बने हुए हैं। भगावट बीट में जहां हमला पेश आया है वहां एनाइडर सिस्टम लगाए जा रहे हैं। बड़े भूभाग में फैले जंगल के कारण भालू को पकड़ना मुश्किल है। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से अपने खेतों और बगीचों में जाते समय समूह में जाने और वन विभाग की ओर से सुझाए गए सुरक्षा उपायों को अपनाने का आह्वान किया है।
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