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Rampur Bushahar News: डिसवानी गांव से लौटे देवता, शांतड़ी अनुष्ठान संपन्न
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तलवारें लहराकर खूंदों ने किया नृत्य
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहडू। तहसील चिड़गांव के डिसवानी गांव के दाखूल मंदिर में तीसरे दिन धार्मिक अनुष्ठान शांतड़ी संपन्न हो गया है। उच्छड़-पाछड़ की रस्म के बाद अनुष्ठान का समापन हुआ। इसके बाद भोज का आयोजन किया गया। बतौर मेहमान पहुंचे तीन देवता पालकी पर सवार होकर लोग ढोल नगाड़ों की थाप पर लौट गए। दोपहर करीब दो बजे से प्रस्थान शुरू हुआ। इस दौरान खूंद तलवारें लहराते हुए नाचते-गाते रहे।
अनुष्ठान से देवता गुडारू छुपाड़ी वापस अपने मंदिर लौट गए। देवता शिकडू महाराज और देवता गुडारू थली साथ लगते गवास गांव में मेहमानवाजी के लिए रवाना हुए। उनके एक दिन बाद लौटने की संभावना है।
शांतड़ी अनुष्ठान का मुख्य आकर्षण हथियारों से लैस देवलुओं का पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों पर नृत्य रहा। आयोजक कमेटी के सभी सदस्यों ने वीरवार दोपहर बाद मेहमान खूंदों को पारंपरिक रूप से विदा किया। देवता डिस्वानी दारखुल गुडारू महाराज मंदिर के मोतमीन रविंद्र रिठवाण ने कहा कि शांद महायज्ञ के बाद शांतड़ी अनुष्ठान का आयोजन करने से पहले वाले बडे़ महायज्ञ को फलीभूत माना जाता है। इसलिए शांतड़ी का आयोजन क्षेत्र की सुख-शांति के लिए किया गया। उन्होंने अनुष्ठान के सफल आयोजन के लिए प्रबंधक कमेटी और क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रशासन, पुलिस विभाग व अन्य विभागों का भी सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
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रोहडू। तहसील चिड़गांव के डिसवानी गांव के दाखूल मंदिर में तीसरे दिन धार्मिक अनुष्ठान शांतड़ी संपन्न हो गया है। उच्छड़-पाछड़ की रस्म के बाद अनुष्ठान का समापन हुआ। इसके बाद भोज का आयोजन किया गया। बतौर मेहमान पहुंचे तीन देवता पालकी पर सवार होकर लोग ढोल नगाड़ों की थाप पर लौट गए। दोपहर करीब दो बजे से प्रस्थान शुरू हुआ। इस दौरान खूंद तलवारें लहराते हुए नाचते-गाते रहे।
अनुष्ठान से देवता गुडारू छुपाड़ी वापस अपने मंदिर लौट गए। देवता शिकडू महाराज और देवता गुडारू थली साथ लगते गवास गांव में मेहमानवाजी के लिए रवाना हुए। उनके एक दिन बाद लौटने की संभावना है।
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शांतड़ी अनुष्ठान का मुख्य आकर्षण हथियारों से लैस देवलुओं का पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों पर नृत्य रहा। आयोजक कमेटी के सभी सदस्यों ने वीरवार दोपहर बाद मेहमान खूंदों को पारंपरिक रूप से विदा किया। देवता डिस्वानी दारखुल गुडारू महाराज मंदिर के मोतमीन रविंद्र रिठवाण ने कहा कि शांद महायज्ञ के बाद शांतड़ी अनुष्ठान का आयोजन करने से पहले वाले बडे़ महायज्ञ को फलीभूत माना जाता है। इसलिए शांतड़ी का आयोजन क्षेत्र की सुख-शांति के लिए किया गया। उन्होंने अनुष्ठान के सफल आयोजन के लिए प्रबंधक कमेटी और क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रशासन, पुलिस विभाग व अन्य विभागों का भी सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
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