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प्रदेश में सेब की खेती बनी घाटे का सौदा : सिंघा
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सेब उत्पादक संघ के रामपुर में आयोजित राज्य सम्मेलन में बागवानों की समस्याओं पर हुई चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती घाटे का सौदा बन गया है। हिमाचल प्रदेश का बागवान बेहतर सेब पैदा तो करता है, लेकिन सेब की मंडी में उससे लूट हो जाती है। किसान और बागवान आढ़तियों से अपने पैसे भी नहीं ले पा रहे हैं। यह बात सेब उत्पादक संघ के रामपुर में आयोजित राज्य सम्मेलन में पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने कही। उन्होंने कहा कि सेब मंडी में नियंत्रण करने का जो कानून है, उसकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्रदेश सरकार की नीति के अनुसार सेब किलो के हिसाब से बिकेगा। मंडी में 24 किलो से अधिक सेब नहीं बेचा जाएगा लेकिन मंडी के अंदर जो आढ़ती ने तय किया वही हुआ और 40 किलो की पेटी भी बिक गई। करोड़ों का रुपये आढ़तियों ने बागवानों का दबाकर रखा है जो बागवानों को अभी तक नहीं मिल पाया है। रामपुर में आयोजित सेब उत्पादक संघ का राज्य स्तरीय सम्मेलन में सेब उत्पादकों की विभिन्न समस्याओं पर भी चर्चा की गई और रणनीति बनाई। इस दौरान सेब उत्पादकों ने आरोप लगाया कि किसानों की सब्सिडी बंद करके बड़े उद्योगपतियों को कोल्ड स्टोर लगाने के लिए सब्सिडी दी जा रही है। सम्मेलन में 18 ब्लाॅकों से 89 प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सम्मेलन में सेब के खेती पर चर्चा की गई। राज्य अध्यक्ष सोहन सिंह ठाकुर ने कहा कि खेती में जो लागत लग रही है और खेती के सभी उपकरण महंगे हो रहे हैं। इसके कारण बागवानों की आय में कटौती हो रही है जो बागवानों के लिए घाटे का सौदा हो रहा है। 18 जनवरी से लेकर 19 जनवरी तक चंडीगढ़ में राष्ट्र स्तर पर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इसमें बागवानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर चर्चा की जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती घाटे का सौदा बन गया है। हिमाचल प्रदेश का बागवान बेहतर सेब पैदा तो करता है, लेकिन सेब की मंडी में उससे लूट हो जाती है। किसान और बागवान आढ़तियों से अपने पैसे भी नहीं ले पा रहे हैं। यह बात सेब उत्पादक संघ के रामपुर में आयोजित राज्य सम्मेलन में पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने कही। उन्होंने कहा कि सेब मंडी में नियंत्रण करने का जो कानून है, उसकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्रदेश सरकार की नीति के अनुसार सेब किलो के हिसाब से बिकेगा। मंडी में 24 किलो से अधिक सेब नहीं बेचा जाएगा लेकिन मंडी के अंदर जो आढ़ती ने तय किया वही हुआ और 40 किलो की पेटी भी बिक गई। करोड़ों का रुपये आढ़तियों ने बागवानों का दबाकर रखा है जो बागवानों को अभी तक नहीं मिल पाया है। रामपुर में आयोजित सेब उत्पादक संघ का राज्य स्तरीय सम्मेलन में सेब उत्पादकों की विभिन्न समस्याओं पर भी चर्चा की गई और रणनीति बनाई। इस दौरान सेब उत्पादकों ने आरोप लगाया कि किसानों की सब्सिडी बंद करके बड़े उद्योगपतियों को कोल्ड स्टोर लगाने के लिए सब्सिडी दी जा रही है। सम्मेलन में 18 ब्लाॅकों से 89 प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सम्मेलन में सेब के खेती पर चर्चा की गई। राज्य अध्यक्ष सोहन सिंह ठाकुर ने कहा कि खेती में जो लागत लग रही है और खेती के सभी उपकरण महंगे हो रहे हैं। इसके कारण बागवानों की आय में कटौती हो रही है जो बागवानों के लिए घाटे का सौदा हो रहा है। 18 जनवरी से लेकर 19 जनवरी तक चंडीगढ़ में राष्ट्र स्तर पर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इसमें बागवानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर चर्चा की जाएगी।