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Rampur Bushahar News: सड़कों के किनारे शुरू हुई सेब के पौधों बिक्री, नर्सरी एक्ट की हो रही अनदेखी
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विदेशी किस्मों के नाम पर बागवानों से हो रही लूट, रोग ग्रस्त पौधें होने से झेलना पड़ सकता है नुकसान
विशेषज्ञों की सलाह, प्रमाणित नर्सरी से ही खरीदें पौधे, लें पक्का बिल
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। बारिश और हिमपात के बाद सड़कों पर सेब के अप्रमाणित पौधों की बिक्री शुरू हो गई है। बागवानी विभाग के तमाम दावों के बाद फल पौधशाला रजिस्ट्रीकरण विनियम अधिनियम 2015 का इस साल भी उल्लंघन हो रहा है। बाहरी राज्य और क्षेत्र की गैर प्रमाणित नर्सरी से तैयार विदेशी सेब की किस्मों के नाम पर गैर प्रमाणित पौधों की बिक्री बागवानी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। हालांकि सरकार ने इस बार गैर प्रमाणित सेब के पौधाें को बेचने वालों पर पहले की कड़ी कार्रवाई के लिए कहा था लेकिन इसको लेकर सख्त कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। नियमों की बात करें तो फल पौधशाला रजिस्ट्रीकरण विनियम अधिनियम 2015 के अनुसार सड़कों के किनारे पौधे बेचना गैर कानूनी है। पंजीकृत पौधशाला की नर्सरी निकालने पर उद्यान विभाग की टीम को निरीक्षण करना होता है। इसमें खराब और बीमारी से ग्रस्त पौधों को मौके पर ही नष्ट किया जाता है। इसके बाद अधिनियम का उल्लंघन करने पर एक साल तक की सजा का प्रावधान भी है लेकिन रोहड़ू, चिड़गांव और जुब्बल सहित सेब बहुल क्षेत्र में कुछ बिचौलिए के माध्यम से सेब के लाखों पौधे गैर प्रमाणित नर्सरियों से बेचे जा रहे हैं। हालत यह है कि क्षेत्र की सड़कों पर भी इसकी मंडी सजना शुरू हो चुकी है। बागवानी विशेषज्ञ एवं कृषि विज्ञान केंद्र के पूर्व प्रभारी डॉ नरेंद्र कायथ ने बताया कि बागवान प्रमाणित नर्सरी से ही पौधे खरीदें। पौधे की खरीद के समय उसका पक्का बिल जिसमें वैरायटी और दाम लिखा हो जरूर साथ लें। उन्होंने बागवानों को सलाह दी कि सड़क के किनारे बिक रहे पौधों को बिल्कुल न खरीदें। बागवान नई किस्म के नाम पर मनमाने दाम वसूलने वालों की सरकार के पास लिखित में शिकायत कर सकते हैं। अप्रमाणित नर्सरियों से पौधे खरीदकर रोपने से आने वाले समय में आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। गैर प्रमाणित नर्सरियों से लाए गए अधिकांश पौधे रोग ग्रस्त हो सकते हैं। उन्होंने कहा लोग सड़कों पर पौधे बेचने वालों की उद्यान विभाग के उच्च अधिकारियों से शिकायत कर सकते हैं।
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विशेषज्ञों की सलाह, प्रमाणित नर्सरी से ही खरीदें पौधे, लें पक्का बिल
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। बारिश और हिमपात के बाद सड़कों पर सेब के अप्रमाणित पौधों की बिक्री शुरू हो गई है। बागवानी विभाग के तमाम दावों के बाद फल पौधशाला रजिस्ट्रीकरण विनियम अधिनियम 2015 का इस साल भी उल्लंघन हो रहा है। बाहरी राज्य और क्षेत्र की गैर प्रमाणित नर्सरी से तैयार विदेशी सेब की किस्मों के नाम पर गैर प्रमाणित पौधों की बिक्री बागवानी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। हालांकि सरकार ने इस बार गैर प्रमाणित सेब के पौधाें को बेचने वालों पर पहले की कड़ी कार्रवाई के लिए कहा था लेकिन इसको लेकर सख्त कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। नियमों की बात करें तो फल पौधशाला रजिस्ट्रीकरण विनियम अधिनियम 2015 के अनुसार सड़कों के किनारे पौधे बेचना गैर कानूनी है। पंजीकृत पौधशाला की नर्सरी निकालने पर उद्यान विभाग की टीम को निरीक्षण करना होता है। इसमें खराब और बीमारी से ग्रस्त पौधों को मौके पर ही नष्ट किया जाता है। इसके बाद अधिनियम का उल्लंघन करने पर एक साल तक की सजा का प्रावधान भी है लेकिन रोहड़ू, चिड़गांव और जुब्बल सहित सेब बहुल क्षेत्र में कुछ बिचौलिए के माध्यम से सेब के लाखों पौधे गैर प्रमाणित नर्सरियों से बेचे जा रहे हैं। हालत यह है कि क्षेत्र की सड़कों पर भी इसकी मंडी सजना शुरू हो चुकी है। बागवानी विशेषज्ञ एवं कृषि विज्ञान केंद्र के पूर्व प्रभारी डॉ नरेंद्र कायथ ने बताया कि बागवान प्रमाणित नर्सरी से ही पौधे खरीदें। पौधे की खरीद के समय उसका पक्का बिल जिसमें वैरायटी और दाम लिखा हो जरूर साथ लें। उन्होंने बागवानों को सलाह दी कि सड़क के किनारे बिक रहे पौधों को बिल्कुल न खरीदें। बागवान नई किस्म के नाम पर मनमाने दाम वसूलने वालों की सरकार के पास लिखित में शिकायत कर सकते हैं। अप्रमाणित नर्सरियों से पौधे खरीदकर रोपने से आने वाले समय में आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। गैर प्रमाणित नर्सरियों से लाए गए अधिकांश पौधे रोग ग्रस्त हो सकते हैं। उन्होंने कहा लोग सड़कों पर पौधे बेचने वालों की उद्यान विभाग के उच्च अधिकारियों से शिकायत कर सकते हैं।