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प्रदेश में कानून व्यवस्था चरमराई : रितिका
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संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। प्रदेश में कानून व्यवस्था इतनी कमज़ोर है कि अपराधी बेखौफ दिन दिहाड़े किसी छात्रा पर जानलेवा हमला कर रहा है। प्रदेश में ऐसी शर्मनाक घटना होना सरकार की निक्कम्मी कानून व्यवस्था को दर्शाता है। प्रदेश सरकार का हिमाचल की महिलाओं, बेटियों की सुरक्षा और इस घटना से उनका कोई लेना-देना नही है। यह बात अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई रिकांगपिओ की जिला सयोंजिका रितिका नेगी ने कही। शनिवार को रिकांगपिओ के मुख्य चौक पर कांगड़ा के पालमपुर बस अड्डे में हुए घटनाक्रम के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई रिकांगपिओ ने कहा कि रामपुर में निरंतर बढ़ रहे अपराधों की संख्या और कांगड़ा के पालमपुर में जो भयावह घटना सामने आई है, वो हिमाचल प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाती है। पालमपुर बस स्टैंड में दिन दहाड़े किसी युवती पर जानलेवा हमला हो जाता है। उसे गंभीर परिस्थिति में टांडा मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाना पड़ जाता है। इस घटना से और प्रदेश सरकार के निक्कमे कानून व्यवस्था से ऐसी स्थिति आ गई है कि महिलाएं और बेटियां स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। ऐसे दिन दहाड़े कानून व्यवस्था और बेटियों की सुरक्षा की धज्जियां उड़ाना शर्मनाक है।
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रिकांगपिओ (किन्नौर)। प्रदेश में कानून व्यवस्था इतनी कमज़ोर है कि अपराधी बेखौफ दिन दिहाड़े किसी छात्रा पर जानलेवा हमला कर रहा है। प्रदेश में ऐसी शर्मनाक घटना होना सरकार की निक्कम्मी कानून व्यवस्था को दर्शाता है। प्रदेश सरकार का हिमाचल की महिलाओं, बेटियों की सुरक्षा और इस घटना से उनका कोई लेना-देना नही है। यह बात अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई रिकांगपिओ की जिला सयोंजिका रितिका नेगी ने कही। शनिवार को रिकांगपिओ के मुख्य चौक पर कांगड़ा के पालमपुर बस अड्डे में हुए घटनाक्रम के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई रिकांगपिओ ने कहा कि रामपुर में निरंतर बढ़ रहे अपराधों की संख्या और कांगड़ा के पालमपुर में जो भयावह घटना सामने आई है, वो हिमाचल प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाती है। पालमपुर बस स्टैंड में दिन दहाड़े किसी युवती पर जानलेवा हमला हो जाता है। उसे गंभीर परिस्थिति में टांडा मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाना पड़ जाता है। इस घटना से और प्रदेश सरकार के निक्कमे कानून व्यवस्था से ऐसी स्थिति आ गई है कि महिलाएं और बेटियां स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। ऐसे दिन दहाड़े कानून व्यवस्था और बेटियों की सुरक्षा की धज्जियां उड़ाना शर्मनाक है।