{"_id":"6661c3b875f9e44efe07c898","slug":"rampur-news-pabbar-river-fortification-scheme-rohru-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1035-117006-2024-06-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: राजनीति की भेंट चढ़ गई पब्बर तटीकरण परियोजना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: राजनीति की भेंट चढ़ गई पब्बर तटीकरण परियोजना
विज्ञापन
वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने किया था 90.82 करोड़ से निर्मित होने वाली योजना का शिलान्यास
बरसात में नदी का तेज बहाव सैकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन को कर रहा बर्बाद
राजेश हंसरेटा।
रोहड़ू। बरसात में पब्बर नदी का विकराल रूप नदी तट के साथ लगती सैंकड़ों बीघा उपजाऊ भूमि को नष्ट कर देता है। इस समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2015 में पब्बर नदी का तटीकरण करने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन नौ साल बीतने के बाद भी यह योजना कागजों में सिमटकर रह गई है। जानकारों की मानें तो यह योजना राजनीति की भेंट चढ़ गई, जिसका खामियाजा क्षेत्र की आबादी उठाने को मजबूर है। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बडियारा के मांदली में टिक्करी-हाटकोटी पब्बर तटीकरण योजना का शिलान्यास किया था। पब्बर नदी पर टिक्करी से हाटकोटी तक कुल 27 किलोमीटर के क्षेत्र का तटीकरण कार्य करने के लिए 190. 82 करोड़ रुपये की लागत आनी थी। इससे 662 करोड़ रुपये की संपत्ती सुरक्षित होना सुनिश्चित किया गया था। योजना पर 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार की ओर से जारी होनी थी जबकि दस प्रतिशत राशि प्रदेश सरकार द्वारा खर्च की जानी थी, लेकिन योजना शुरू होने से पहले ही राजनीति की भेंट चढ़ गई। योजना के शिलान्यास के समय केंद्र सरकार के प्रतिनिधि संसदीय क्षेत्र के सांसद को बुलाया तक नहीं गया न ही सांसद का नाम शिलान्यास पट्टिका में अंकित किया गया। इसके कारण न तो केंद्र से योजना के लिए बजट आया न ही योजना आज तक सिरे चढ़ सकी। पब्बर नदी तटीकरण योजना के पूरा नहीं होने से रोहड़ू के पर्यटन कारोबार को भी खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसकी वजह यह है कि टिक्करी से लेकर हाटकोटी तक नदी के किनारे बने हट बह जाते हैं। इससे पर्यटन व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ता है तो वहीं नदी के किनारे की उपजाऊ भूमि भी बह जाती है, जिससे बागवानों और किसानों को हर साल नुकसान झेलना पड़ता है। वहीं योजना के शिलान्यास के समय लोगों को उम्मीद थी कि योजना के बनने से उनकी दशकों से चली आ रही समस्या का समाधान होगा और उनके खेत और बगीचे सुरक्षित हो सकेंगे, लेकिन उस समय योजना के शिलान्यास में हुई राजनीति का खामियाजा आज तक क्षेत्र की जनता उठा रही है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार के साथ सामंजस्य स्थापित करके इस योजना पर काम करना चाहिए, जिससे उनकी दशकों से चली आ रही परेशानी का समाधान हो सके।
कोट्स
पब्बर नदी तटीकरण योजना के लिए बजट का कोई भी प्रावधान नहीं है। इस कारण योजना लंबे समय से सिरे नहीं चढ़ सकी है।
यशपाल ठाकुर, अधिशाासी अभियंता, जल शक्ति विभाग
विज्ञापन
बरसात में नदी का तेज बहाव सैकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन को कर रहा बर्बाद
राजेश हंसरेटा।
रोहड़ू। बरसात में पब्बर नदी का विकराल रूप नदी तट के साथ लगती सैंकड़ों बीघा उपजाऊ भूमि को नष्ट कर देता है। इस समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2015 में पब्बर नदी का तटीकरण करने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन नौ साल बीतने के बाद भी यह योजना कागजों में सिमटकर रह गई है। जानकारों की मानें तो यह योजना राजनीति की भेंट चढ़ गई, जिसका खामियाजा क्षेत्र की आबादी उठाने को मजबूर है। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बडियारा के मांदली में टिक्करी-हाटकोटी पब्बर तटीकरण योजना का शिलान्यास किया था। पब्बर नदी पर टिक्करी से हाटकोटी तक कुल 27 किलोमीटर के क्षेत्र का तटीकरण कार्य करने के लिए 190. 82 करोड़ रुपये की लागत आनी थी। इससे 662 करोड़ रुपये की संपत्ती सुरक्षित होना सुनिश्चित किया गया था। योजना पर 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार की ओर से जारी होनी थी जबकि दस प्रतिशत राशि प्रदेश सरकार द्वारा खर्च की जानी थी, लेकिन योजना शुरू होने से पहले ही राजनीति की भेंट चढ़ गई। योजना के शिलान्यास के समय केंद्र सरकार के प्रतिनिधि संसदीय क्षेत्र के सांसद को बुलाया तक नहीं गया न ही सांसद का नाम शिलान्यास पट्टिका में अंकित किया गया। इसके कारण न तो केंद्र से योजना के लिए बजट आया न ही योजना आज तक सिरे चढ़ सकी। पब्बर नदी तटीकरण योजना के पूरा नहीं होने से रोहड़ू के पर्यटन कारोबार को भी खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसकी वजह यह है कि टिक्करी से लेकर हाटकोटी तक नदी के किनारे बने हट बह जाते हैं। इससे पर्यटन व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ता है तो वहीं नदी के किनारे की उपजाऊ भूमि भी बह जाती है, जिससे बागवानों और किसानों को हर साल नुकसान झेलना पड़ता है। वहीं योजना के शिलान्यास के समय लोगों को उम्मीद थी कि योजना के बनने से उनकी दशकों से चली आ रही समस्या का समाधान होगा और उनके खेत और बगीचे सुरक्षित हो सकेंगे, लेकिन उस समय योजना के शिलान्यास में हुई राजनीति का खामियाजा आज तक क्षेत्र की जनता उठा रही है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार के साथ सामंजस्य स्थापित करके इस योजना पर काम करना चाहिए, जिससे उनकी दशकों से चली आ रही परेशानी का समाधान हो सके।
कोट्स
पब्बर नदी तटीकरण योजना के लिए बजट का कोई भी प्रावधान नहीं है। इस कारण योजना लंबे समय से सिरे नहीं चढ़ सकी है।
यशपाल ठाकुर, अधिशाासी अभियंता, जल शक्ति विभाग