{"_id":"661e8a30744465f4210986da","slug":"rampur-news-nitther-kullu-hailing-nither-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1031-114755-2024-04-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: नित्थर में ओलावृष्टि से सेब का फसल को नुकसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: नित्थर में ओलावृष्टि से सेब का फसल को नुकसान
विज्ञापन
सेब, नाशपाती समेत अन्य फसलों के प्रभावित होने का खतरा बढ़ा, बागवान चिंतित
फ्लावरिंग के दौरान तापमान लुढ़कने से उत्पादन हो सकता है प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर(कुल्लू)। नित्थर क्षेत्र में मंगलवार दोपहर के बाद अचानक हुई ओलावृष्टि से सेब समेत अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। वहीं मौसम ने एक बार फिर बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार को किन्नौर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी भी रिकॉर्ड की है। इससे प्रदेशभर में तापमान लुढ़क गया है। इससे सेब समेत नाशपाती और गुठलीदार पौधों की फसल प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है। जानकारी के अनुसार उपतहसील नित्थर के क्यूरी, घरौली ढमाह, निन्था और एडशी में मंगलवार दोपहर भारी ओलावृष्टि हुई। इससे सेब की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। मौसम ने एक बार फिर बागवानों की मेहनत पर ओलावृष्टि ने पानी फेर दिया है। ओलावृष्टि से प्रभावित बागवानों ने प्रदेश सरकार और बागवानी विभाग से नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग उठाई है। बताया जा रहा है कि नित्थर के ढमाह, निन्था, एडशी और क्यूरी में भारी ओलावृष्टि हुई। क्षे में करीब 10 से 15 मिनट तक ओलावृष्टि हुई है। वर्तमान में मध्यम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब और नाशपाती की फ्लावरिंग चल रही है। अच्छी फसल के लिए आजकल मौसम साफ रहना जरूरी है, लेकिन पिछले कई दिनों से मौसम के कड़े तेवरों ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। इस दौरान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो रही है तो वहीं ओलावृष्टि से भी फ्लावरिंग प्रभावित हो रही है। क्षेत्र के बागवान भूपिंद्र ठाकुर, सिकंदर ठाकुर,पवनेश ठाकुर, सुनील भारती, पवन और मोहन ठाकुर का कहना है इस साल पहले ही मौसम की मार से सेब बहुत कम है और अब ओलावृष्टि से बागवानों को करोड़ों का नुकसान हुआ है।
किन्नौर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी से बढ़ी ठंड
जनजातीय जिला किन्नौर में मंगलवार को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई है। इससे पूरा जिला एक बार फिर ठंड की चपेट में आ गया है। बागवानों की चिंता यह है कि जिले के निचले क्षेत्रों में भी फ्लावरिंग का दौर शुरू हो गया है। तापमान में गिरावट दर्ज होने से फ्लावरिंग पर विपरीत असर पड़ सकता है। इससे आने वाले समय में उत्पादन भी प्रभावित होगा। वहीं मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी मौसम खराब रहने का पुर्वानुमान है। इससे फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।
विज्ञापन
फ्लावरिंग के दौरान तापमान लुढ़कने से उत्पादन हो सकता है प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर(कुल्लू)। नित्थर क्षेत्र में मंगलवार दोपहर के बाद अचानक हुई ओलावृष्टि से सेब समेत अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। वहीं मौसम ने एक बार फिर बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार को किन्नौर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी भी रिकॉर्ड की है। इससे प्रदेशभर में तापमान लुढ़क गया है। इससे सेब समेत नाशपाती और गुठलीदार पौधों की फसल प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है। जानकारी के अनुसार उपतहसील नित्थर के क्यूरी, घरौली ढमाह, निन्था और एडशी में मंगलवार दोपहर भारी ओलावृष्टि हुई। इससे सेब की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। मौसम ने एक बार फिर बागवानों की मेहनत पर ओलावृष्टि ने पानी फेर दिया है। ओलावृष्टि से प्रभावित बागवानों ने प्रदेश सरकार और बागवानी विभाग से नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग उठाई है। बताया जा रहा है कि नित्थर के ढमाह, निन्था, एडशी और क्यूरी में भारी ओलावृष्टि हुई। क्षे में करीब 10 से 15 मिनट तक ओलावृष्टि हुई है। वर्तमान में मध्यम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब और नाशपाती की फ्लावरिंग चल रही है। अच्छी फसल के लिए आजकल मौसम साफ रहना जरूरी है, लेकिन पिछले कई दिनों से मौसम के कड़े तेवरों ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। इस दौरान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो रही है तो वहीं ओलावृष्टि से भी फ्लावरिंग प्रभावित हो रही है। क्षेत्र के बागवान भूपिंद्र ठाकुर, सिकंदर ठाकुर,पवनेश ठाकुर, सुनील भारती, पवन और मोहन ठाकुर का कहना है इस साल पहले ही मौसम की मार से सेब बहुत कम है और अब ओलावृष्टि से बागवानों को करोड़ों का नुकसान हुआ है।
किन्नौर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी से बढ़ी ठंड
जनजातीय जिला किन्नौर में मंगलवार को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई है। इससे पूरा जिला एक बार फिर ठंड की चपेट में आ गया है। बागवानों की चिंता यह है कि जिले के निचले क्षेत्रों में भी फ्लावरिंग का दौर शुरू हो गया है। तापमान में गिरावट दर्ज होने से फ्लावरिंग पर विपरीत असर पड़ सकता है। इससे आने वाले समय में उत्पादन भी प्रभावित होगा। वहीं मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी मौसम खराब रहने का पुर्वानुमान है। इससे फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।
विज्ञापन