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Rampur Bushahar News: किन्नौर में भी बर्फबारी को तरसे लोग, सेब समेत अन्य फसलों का उत्पादन होगा प्रभावित
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निचले क्षेत्रों में चिलिंग ऑवर्स पूरा न होने से सेब की फसल पर पड़ सकता है असर, देवी-देवताओं की शरण में पहुंचे लोग
बगीचों में बेहतर फसल के लिए 1,000 से 1,,400 घंटे तक चिलिंग ऑवर्स पूरा होना जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
भावानगर (किन्नौर)। लंबे अरसे से सूखे की मार झेल रहे जनजातीय जिला किन्नौर के किसानों और बागवानों को भी आगामी वर्ष में होने वाले सेब की फसल को लेकर चिंता सताने लगी है। क्षेत्र के बागवान बर्फबारी की आस में आसमान की और लंबे समय से टकटकी लगाए हुए है, लेकिन कुदरत की बेरुखी जस की तस बनी हुई है। समय रहते पहाड़ों में बर्फबारी नहीं होती है, तो बागवानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिर सकता है। हालत यह है कि समूचे जनजाति जिले किन्नौर में भयंकर सूखे की स्थिति बनी हुई है और ऐसे में सेब बागवान अपने देवी-देवताओं से बर्फबारी होने की प्रार्थना कर रहे हैं। बताते चले की जनजातीय जिला किन्नौर के लोगों की देवी-देवताओं के प्रति अटूट आस्था है। ऐसे में अब जिले के लोगों को आस है कि देवी-देवताओं से जल्द बर्फबारी प्रार्थना करने के बाद ही क्षेत्र का सूखा खत्म होगा। समय रहते बर्फबारी नहीं होती है, तो सेब के बगीचों में चिलिंग आवर्स पूरा नहीं हो पाएंगे। इससे सेब की अच्छी फसल नहीं हो पाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार जिन क्षेत्रों में 7 डिग्री से कम तापमान इन दिनों में रहता है वहां पर चिलिंग आवर की समस्या नहीं रहती है। वहीं निचले क्षेत्रों में चिलिंग ऑवर पूरा करने के लिए प्राप्त बर्फबारी का होना जरूरी है। सेब जहां से प्रदेश की आर्थिकी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है, तो वही जनजातीय जिला किन्नौर के लोगों की आर्थिकी का भी प्रमुख साधन है। सेब के पारंपरिक बगीचों में उम्दा फसल के लिए 1,000 से 1,400 घंटे तक चिलिंग ऑवर्स होना जरूरी है । स्पर वैरायटी के सेब के बगीचों में 700 से 1,000 तक चीलिंग ऑवर पूरा होना अत्यंत जरूरी है। बागवानी विशेषज्ञ बागवानी विभाग किन्नौर डॉ. रूपेश नेगी ने बताया कि जिस जगह पर तापमान 7 डिग्री से कम रहता है, वहां पर सेब के पौधों में चिलिंग ऑवर्स की दिक्कत नहीं रहती है जबकि निचले इलाकों में चिलिंग ऑवर्स पूरा होने के लिए लिए समय पर बर्फबारी होना बेहद जरूरी है।
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बगीचों में बेहतर फसल के लिए 1,000 से 1,,400 घंटे तक चिलिंग ऑवर्स पूरा होना जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
भावानगर (किन्नौर)। लंबे अरसे से सूखे की मार झेल रहे जनजातीय जिला किन्नौर के किसानों और बागवानों को भी आगामी वर्ष में होने वाले सेब की फसल को लेकर चिंता सताने लगी है। क्षेत्र के बागवान बर्फबारी की आस में आसमान की और लंबे समय से टकटकी लगाए हुए है, लेकिन कुदरत की बेरुखी जस की तस बनी हुई है। समय रहते पहाड़ों में बर्फबारी नहीं होती है, तो बागवानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिर सकता है। हालत यह है कि समूचे जनजाति जिले किन्नौर में भयंकर सूखे की स्थिति बनी हुई है और ऐसे में सेब बागवान अपने देवी-देवताओं से बर्फबारी होने की प्रार्थना कर रहे हैं। बताते चले की जनजातीय जिला किन्नौर के लोगों की देवी-देवताओं के प्रति अटूट आस्था है। ऐसे में अब जिले के लोगों को आस है कि देवी-देवताओं से जल्द बर्फबारी प्रार्थना करने के बाद ही क्षेत्र का सूखा खत्म होगा। समय रहते बर्फबारी नहीं होती है, तो सेब के बगीचों में चिलिंग आवर्स पूरा नहीं हो पाएंगे। इससे सेब की अच्छी फसल नहीं हो पाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार जिन क्षेत्रों में 7 डिग्री से कम तापमान इन दिनों में रहता है वहां पर चिलिंग आवर की समस्या नहीं रहती है। वहीं निचले क्षेत्रों में चिलिंग ऑवर पूरा करने के लिए प्राप्त बर्फबारी का होना जरूरी है। सेब जहां से प्रदेश की आर्थिकी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है, तो वही जनजातीय जिला किन्नौर के लोगों की आर्थिकी का भी प्रमुख साधन है। सेब के पारंपरिक बगीचों में उम्दा फसल के लिए 1,000 से 1,400 घंटे तक चिलिंग ऑवर्स होना जरूरी है । स्पर वैरायटी के सेब के बगीचों में 700 से 1,000 तक चीलिंग ऑवर पूरा होना अत्यंत जरूरी है। बागवानी विशेषज्ञ बागवानी विभाग किन्नौर डॉ. रूपेश नेगी ने बताया कि जिस जगह पर तापमान 7 डिग्री से कम रहता है, वहां पर सेब के पौधों में चिलिंग ऑवर्स की दिक्कत नहीं रहती है जबकि निचले इलाकों में चिलिंग ऑवर्स पूरा होने के लिए लिए समय पर बर्फबारी होना बेहद जरूरी है।