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Rampur Bushahar News: जनजातीय साहित्य सहभ्रमण महोत्सव का शुभारंभ

Sun, 22 Oct 2023 10:46 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 22 Oct 2023 10:46 PM IST
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रिकांगपिओ (किन्नौर)। किन्नौर जिले के कल्पा में प्रथम जनजातीय साहित्य सह भ्रमण महोत्सव का रविवार को शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पद्मश्री विद्यानंद सरैक ने अनुभव को साझा कर लोगों का ज्ञानवर्धन किया। साथ ही संगीत कला और हिमाचल की संस्कृति को प्रस्तुत कर समा बांधा।
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पद्मश्री विद्यानंद सरैक ने सिरमौर जिले के सांस्कृतिक इतिहास से शुरू करते हुए पूरे हिमाचल के जिलों की संस्कृति और कला से लोगों को अवगत करवाया। उन्होंने हिमाचल के सभी जिलों के लोक गीतों को स्वरबद्ध करते हुए संपूर्ण हिमाचली संस्कृति का प्रस्तुतीकरण किया। इसके बाद प्रोफेसर विद्या सागर नेगी ने किन्नौर जिला के इतिहास और समृद्ध संस्कृति के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
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उन्होंने अपने साहित्यिक अनुभव को साझा करते हुए बताया कि जिला किन्नौर का अत्यंत प्राचीन और गूढ़ इतिहास है। किन्नर कैलाश की गोद में बसा जनजातीय जिला किन्नौर अपने नैसर्गिक सौंदर्य, देव परंपराओं सांस्कृतिक विविधताओं और अनूठी संस्कृति से भरपूर है। जनजातीय साहित्य सह भ्रमण महोत्सव में प्रदेश और जिले के प्रसिद्ध साहित्यकारों के बीच एक पैनल चर्चा का भी आयोजन किया गया।
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इसमें साहित्यकारों ने अपने-अपने साहित्य के क्षेत्र से संबंधित विचार रखे और साहित्यिक वातावरण स्थापित किया। जनजातीय साहित्य पर चर्चा में प्रोफेसर विद्या सागर नेगी, प्रोफेसर डाॅ. स्नेहलता नेगी, अजय, तोबदन, देवेंद्र सिंह गोलदार और भगत सिंह किन्नर ने भाग लिया। चर्चा में जनजातीय साहित्य और वाचक परंपरा पर भी चर्चा की गई। महोत्सव के प्रथम दिन ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति दी गई।

कवयित्री मेधावी शर्मा ने छात्र और छात्राओं को अध्ययन के महत्व पर भी विस्तृत जानकारी प्रदान की। उपायुक्त किन्नौर तोरुल एस रवीश ने सभी व्यक्तियों का खतक भेंटकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस जनजातीय साहित्य सह भ्रमण उत्सव को आयोजित करने का उद्देश्य प्रदेश और जिले के साहित्यकारों को मंच प्रदान कर उनके साहित्यिक अनुभव को साझा करना है। इस अवसर पर सभी गण्यमान्य व्यक्तियों को स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। महोत्सव के तीनों दिन आर्ट गैलरी शिमला की प्रदर्शनी और किन्नौर जिले के स्वयं सहायता समूहों द्वारा स्थानीय उत्पादों के स्टॉल लगाए गए।


इस अवसर पर लाहौल स्पीति से साहित्यकार तोबदन, किन्नौर के साहित्यकार भगत सिंह किन्नर, देवेंद्र सिंह गोलदार, दिल्ली विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका डाॅ. स्नेहलता नेगी, कुल्लू महाविद्यालय के प्राध्यापक डाॅ. ईशान मार्वल सहित अन्य गण्यमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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