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Rampur Bushahar News: दस माह के बाद भी आपदा प्रभावितों के जख्मों पर नहीं लगा मरहम
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बीते वर्ष 12 जुलाई को भारी बाढ़ के कारण घर, वाहन, जमीन और फसलों को पहुंची थी भारी क्षति
मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी टोंगटोंगचे नाले में नहीं शुरू हुआ दीवार लगाने का कार्य
बीरबल नेगी
सांगला (किन्नौर)। बीते वर्ष 12 जुलाई को किन्नौर जिले की सांगला वैली में आई बाढ़ के कारण करोड़ों की क्षति पहुंची थी। टोंगटोंगचे नाले में आई भयंकर बाढ़ से लोगों के मकान, वाहन और सेब के बगीचों समेत अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा था, लेकिन हैरानी की बात है कि आपदा के दस माह के बाद भी सुरक्षा के लिहाज से किए जाने वाले कार्य नहीं हो पाए हैं। उस समय सांगला पहुंचे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ग्रामीणों को जल्द राहत देने का आश्वासन दिया था, लेकिन हालात आज भी जस के तस बने हुए हैं। लोगों को डर इस बात का सता रहा है कि पिछली बरसात में मिले जख्म अभी हरे ही हैं और फिर से बरसात का सीजन सिर पर आ गया है। इसको देखते हुए ग्रामीणों ने चेताया है कि अगर जल्द सुरक्षा के कार्यों को शुरू नहीं किया गया तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। गौर हो कि बीते वर्ष 12 जुलाई को सांगला वैली के टोंगटोगचे नाले से आई भयानक बाढ़ यहां से पूदो नाले में आई और वैली के थापासारिंग, स्थानीय बाजार सांगला, पूदो नाला, कष्टयचूदेन, जोलारिंग सहित सांगला पंचायत के कई क्षेत्रों में तबाही मचाई थी। बाढ़ में ग्रामीणों के वाहन बह गए, उनके मकानों को भारी क्षति पहुंची और सैकड़ों सेब के पौधे, ओगला, फाफरा, आलू और मटर सहित फसलों को करोड़ों की क्षति पहुंची थी। इतना ही नहीं करीब 90 लोगों के घरों में बाढ़ का मलबा भी भर गया था। उस समय मौके का जायजा लेने मुख्यमंत्री सुक्खू भी पहुंचे थे और ग्रामीणों को जल्द राहत कार्य करवाने का आश्वासन दिया था। इस दौरान ग्रामीणों ने पानी के मुख्य स्रोत जागेखालंग में जेसीबी से खुदाई कर कंक्रीट की दीवार लगाने की मांग की थी, लेकिन दस माह की अवधि बीतने के बाद भी कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। अगर इस बार भी बीते वर्ष की तरह भारी बरसात होती है, तो जागेखालंग स्रोत से होल्डखालंग, किमोखालंग, छूदोखालंग, कोरखायोखालंग नाले से पानी सांगला वैली में भारी तबाही मचा सकता है। ऐसे में करीब आठ से दस हजार लोगों पर खतरा मंडरा रहा है। पंचायत प्रधान सांगला देवसांकी नेगी, उपप्रधान लोकेश कुमार नेगी, महिला मंडल मीरा नेगी, प्रीमिला नेगी, अर्जुन नेगी, मस्तराम नेगी, किशोर कुमार नेगी, रामलाल नेगी, दौलत राम नेगी, केसर नेगी और प्रदीप नेगी सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि सुरक्षा लिहाज से उचित कदम उठाने का मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था। उन्होंने मौके पर एलएनटी लगाकर समस्या का स्थायी समाधान करने की बात कही थी, लेकिन अब तक कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। अब फिर से बरसात का सीजन आने वाला है। ऐसे में वैली में रहने वाले हजारों लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं। उन्होंने चेताया कि अगर जल्द कार्य शुरू नहीं किया गया तो ग्रामीण मजबूरन आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
कोट्स
सुरक्षा के लिहाज से किए जाने वाले कार्यों के बारे में जल शक्ति विभाग को निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन ग्रामीणों की समस्याओं को दूर करने के लिए प्रयासरत है।
डॉ. अमित कुमार शर्मा, उपायुक्त किन्नौर
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मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी टोंगटोंगचे नाले में नहीं शुरू हुआ दीवार लगाने का कार्य
बीरबल नेगी
सांगला (किन्नौर)। बीते वर्ष 12 जुलाई को किन्नौर जिले की सांगला वैली में आई बाढ़ के कारण करोड़ों की क्षति पहुंची थी। टोंगटोंगचे नाले में आई भयंकर बाढ़ से लोगों के मकान, वाहन और सेब के बगीचों समेत अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा था, लेकिन हैरानी की बात है कि आपदा के दस माह के बाद भी सुरक्षा के लिहाज से किए जाने वाले कार्य नहीं हो पाए हैं। उस समय सांगला पहुंचे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ग्रामीणों को जल्द राहत देने का आश्वासन दिया था, लेकिन हालात आज भी जस के तस बने हुए हैं। लोगों को डर इस बात का सता रहा है कि पिछली बरसात में मिले जख्म अभी हरे ही हैं और फिर से बरसात का सीजन सिर पर आ गया है। इसको देखते हुए ग्रामीणों ने चेताया है कि अगर जल्द सुरक्षा के कार्यों को शुरू नहीं किया गया तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। गौर हो कि बीते वर्ष 12 जुलाई को सांगला वैली के टोंगटोगचे नाले से आई भयानक बाढ़ यहां से पूदो नाले में आई और वैली के थापासारिंग, स्थानीय बाजार सांगला, पूदो नाला, कष्टयचूदेन, जोलारिंग सहित सांगला पंचायत के कई क्षेत्रों में तबाही मचाई थी। बाढ़ में ग्रामीणों के वाहन बह गए, उनके मकानों को भारी क्षति पहुंची और सैकड़ों सेब के पौधे, ओगला, फाफरा, आलू और मटर सहित फसलों को करोड़ों की क्षति पहुंची थी। इतना ही नहीं करीब 90 लोगों के घरों में बाढ़ का मलबा भी भर गया था। उस समय मौके का जायजा लेने मुख्यमंत्री सुक्खू भी पहुंचे थे और ग्रामीणों को जल्द राहत कार्य करवाने का आश्वासन दिया था। इस दौरान ग्रामीणों ने पानी के मुख्य स्रोत जागेखालंग में जेसीबी से खुदाई कर कंक्रीट की दीवार लगाने की मांग की थी, लेकिन दस माह की अवधि बीतने के बाद भी कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। अगर इस बार भी बीते वर्ष की तरह भारी बरसात होती है, तो जागेखालंग स्रोत से होल्डखालंग, किमोखालंग, छूदोखालंग, कोरखायोखालंग नाले से पानी सांगला वैली में भारी तबाही मचा सकता है। ऐसे में करीब आठ से दस हजार लोगों पर खतरा मंडरा रहा है। पंचायत प्रधान सांगला देवसांकी नेगी, उपप्रधान लोकेश कुमार नेगी, महिला मंडल मीरा नेगी, प्रीमिला नेगी, अर्जुन नेगी, मस्तराम नेगी, किशोर कुमार नेगी, रामलाल नेगी, दौलत राम नेगी, केसर नेगी और प्रदीप नेगी सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि सुरक्षा लिहाज से उचित कदम उठाने का मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था। उन्होंने मौके पर एलएनटी लगाकर समस्या का स्थायी समाधान करने की बात कही थी, लेकिन अब तक कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। अब फिर से बरसात का सीजन आने वाला है। ऐसे में वैली में रहने वाले हजारों लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं। उन्होंने चेताया कि अगर जल्द कार्य शुरू नहीं किया गया तो ग्रामीण मजबूरन आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
कोट्स
सुरक्षा के लिहाज से किए जाने वाले कार्यों के बारे में जल शक्ति विभाग को निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन ग्रामीणों की समस्याओं को दूर करने के लिए प्रयासरत है।
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डॉ. अमित कुमार शर्मा, उपायुक्त किन्नौर