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Rampur Bushahar News: किन्नौर में पर्यटन की संभावनाएं अपार, सरकार से मदद की दरकार
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जनजातीय जिले में हेलीपोर्ट, पार्किंग, पार्क और साहसिक खेलों की गतिविधियों का अभाव
कई सरकारें आईं और गईं लेकिन जिले में पर्यटन को नहीं लग पाए पंख
बीरबल नेगी
सांगला (किन्नौर)। मनमोहक नजारों के लिए देश-विदेश में जनजातीय जिला किन्नौर मशहूर है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ियां, झरने, नदियां और नजारे पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं। हर वर्ष हजारों की संख्या में यहां देशी और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। कुल मिलाकर बात की जाए तो यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन पर्यटन को पंख लगाने के लिए मूलभूत सुविधाएं और पर्यटकों को आकर्षित करने की सुविधाओं की आज भी दरकार महसूस की जा रही है। प्रदेश में कई सरकारें आईं और गईं, पर्यटन को बढ़ावा देने के लाख दावे हुए, लेकिन आज भी ले के पर्यटन स्थल हेलीपोर्ट, पार्किंग, पार्क, साहसिक खेलों और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में पर्यटन को बढ़ावा देने के सरकारी इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाके जनजातीय जिला किन्नौर में सेब उत्पादन के अलावा पर्यटन कमाई का बड़ा जरिया है। जिले में पर्यटन से जुड़े अनेक स्थल हैं, जिनमें कल्पा, सांगला, बटसेरी, रक्षम, छितकुल, नाको, भावावैली और निचार सहित अनेक पर्यटन स्थल शामिल हैं। बात करें इन क्षेत्रों में सुविधाओं की तो यहां आने के लिए पर्यटकों को जिले की खस्ताहाल सड़काें से पहुंचना पड़ता है। वहीं अगर मौसम खराब हो तो सड़कें अवरुद्ध होने से पर्यटक यहां नहीं पहुंच पाते। ऐसे में सबसे अधिक मांग हेलीपोर्ट की उठ रही है। वर्षों से इन पर्यटन स्थलों पर वायुमार्ग के जरिये आने की कोई सुविधा नहीं मिल पाई है। इसके अलावा पर्यटन स्थल पार्किंग, पार्क, मूलभूत सुविधाओं से भी जूझ रहे हैं। यही हाल साहसिक खेलों का भी है। जिले में ट्रैकिंग, रॉक क्लाइमिंग, रीवर क्रॉसिंग, रीवर राफ्टिंग, स्कीइंग, आईस स्केटिंग सहित अन्य साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए भी आज तक कोई ठोस कार्य नहीं हो पाए हैं। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर जनजातीय क्षेत्रों को पर्यटन के दृष्टिगत विकसित करने के दावे तो लाख होते रहे, लेकिन धरातल पर एक भी दावा सच नहीं हो पाया है। इस लोकसभा चुनाव जिले के पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने और सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाने की लोगों में उम्मीद जगी है।
क्या कहते हैं जिले के लोग
जिले के पर्यटन स्थलों में आज भी सुविधाओं की खासी दरकार है। सरकार की ओर से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की उड़ान-2 योजना के तहत हेली सेवाएं शुरू की जानी चाहिए। हेलीपोर्ट का निर्माण भी किया जाना जरूरी है।
चंद्रमोहन नेगी, अध्यक्ष, किन्नौर पर्यटन एसोसिएशन
कोट्स
किन्नौर जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां प्राकृतिक खूबसूरती को देखकर ही पर्यटक पहुंच रहे हैं। सरकार को पर्यटन स्थलों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवानी चाहिए, जिससे पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
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शांता कुमार नेगी, जिला परिषद सदस्य
कोट्स
जिले के आध्यात्मिक स्थानों और मनोरम नजारों की बदौलत ही पर्यटन कारोबार चल रहा है। सरकार को साहसिक खेलों को बढ़ावा देने का प्रयास करना चाहिए। इससे देश विदेश से आने वाले सैलानी आकर्षित होंगे।
रामेश्वर हुरम, उपाध्यक्ष, किन्नौर पर्यटन एसोसिएशन
कोट्स
जिले के पर्यटन स्थलों में पार्किंग, पार्क सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जानी चाहिए, जिससे पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके। इससे स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार के द्वार भी खुलेंगे।
जिया लाल नेगी
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कई सरकारें आईं और गईं लेकिन जिले में पर्यटन को नहीं लग पाए पंख
बीरबल नेगी
सांगला (किन्नौर)। मनमोहक नजारों के लिए देश-विदेश में जनजातीय जिला किन्नौर मशहूर है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ियां, झरने, नदियां और नजारे पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं। हर वर्ष हजारों की संख्या में यहां देशी और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। कुल मिलाकर बात की जाए तो यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन पर्यटन को पंख लगाने के लिए मूलभूत सुविधाएं और पर्यटकों को आकर्षित करने की सुविधाओं की आज भी दरकार महसूस की जा रही है। प्रदेश में कई सरकारें आईं और गईं, पर्यटन को बढ़ावा देने के लाख दावे हुए, लेकिन आज भी ले के पर्यटन स्थल हेलीपोर्ट, पार्किंग, पार्क, साहसिक खेलों और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में पर्यटन को बढ़ावा देने के सरकारी इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाके जनजातीय जिला किन्नौर में सेब उत्पादन के अलावा पर्यटन कमाई का बड़ा जरिया है। जिले में पर्यटन से जुड़े अनेक स्थल हैं, जिनमें कल्पा, सांगला, बटसेरी, रक्षम, छितकुल, नाको, भावावैली और निचार सहित अनेक पर्यटन स्थल शामिल हैं। बात करें इन क्षेत्रों में सुविधाओं की तो यहां आने के लिए पर्यटकों को जिले की खस्ताहाल सड़काें से पहुंचना पड़ता है। वहीं अगर मौसम खराब हो तो सड़कें अवरुद्ध होने से पर्यटक यहां नहीं पहुंच पाते। ऐसे में सबसे अधिक मांग हेलीपोर्ट की उठ रही है। वर्षों से इन पर्यटन स्थलों पर वायुमार्ग के जरिये आने की कोई सुविधा नहीं मिल पाई है। इसके अलावा पर्यटन स्थल पार्किंग, पार्क, मूलभूत सुविधाओं से भी जूझ रहे हैं। यही हाल साहसिक खेलों का भी है। जिले में ट्रैकिंग, रॉक क्लाइमिंग, रीवर क्रॉसिंग, रीवर राफ्टिंग, स्कीइंग, आईस स्केटिंग सहित अन्य साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए भी आज तक कोई ठोस कार्य नहीं हो पाए हैं। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर जनजातीय क्षेत्रों को पर्यटन के दृष्टिगत विकसित करने के दावे तो लाख होते रहे, लेकिन धरातल पर एक भी दावा सच नहीं हो पाया है। इस लोकसभा चुनाव जिले के पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने और सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाने की लोगों में उम्मीद जगी है।
क्या कहते हैं जिले के लोग
जिले के पर्यटन स्थलों में आज भी सुविधाओं की खासी दरकार है। सरकार की ओर से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की उड़ान-2 योजना के तहत हेली सेवाएं शुरू की जानी चाहिए। हेलीपोर्ट का निर्माण भी किया जाना जरूरी है।
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चंद्रमोहन नेगी, अध्यक्ष, किन्नौर पर्यटन एसोसिएशन
कोट्स
किन्नौर जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां प्राकृतिक खूबसूरती को देखकर ही पर्यटक पहुंच रहे हैं। सरकार को पर्यटन स्थलों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवानी चाहिए, जिससे पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
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शांता कुमार नेगी, जिला परिषद सदस्य
कोट्स
जिले के आध्यात्मिक स्थानों और मनोरम नजारों की बदौलत ही पर्यटन कारोबार चल रहा है। सरकार को साहसिक खेलों को बढ़ावा देने का प्रयास करना चाहिए। इससे देश विदेश से आने वाले सैलानी आकर्षित होंगे।
रामेश्वर हुरम, उपाध्यक्ष, किन्नौर पर्यटन एसोसिएशन
कोट्स
जिले के पर्यटन स्थलों में पार्किंग, पार्क सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जानी चाहिए, जिससे पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके। इससे स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार के द्वार भी खुलेंगे।
जिया लाल नेगी