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सरकार की गलत नीतियों से बिजली बोर्ड को 14.36 करोड़ का हुआ नुकसान : नेगी
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बोर्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर को हटाकर की जाए स्थायी नियुक्ति, पेंशनरों को तुरंत पेंशन देने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ(किन्नौर)। हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड के गठन को 52 साल हो गए हैं, तबसे लेकर पिछले साल तक कुल 18,00 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा था। सरकार की गलत नीतियों के कारण एक साल में 14 करोड़ 36 लाख रुपये का बिजली बोर्ड को नुकसान हुआ है। इस कारण बिजली बोर्ड के कर्मचारी और पेंशनधारकों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। सरकार और बोर्ड प्रबंधन की नाकामी से बोर्ड के कर्मचारी और पेंशनर खासे मायूस हैं। हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन की उपाध्यक्ष रतन ज्योति नेगी ने कहा कि बिजली बोर्ड में पहले एक गांव से बिजली बिल के भुगतान से 5 से 10 लाख रुपये तक सरकार को कमाई होती थी, लेकिन सरकार की गलत नीति और पॉलिसी के कारण हर घर को 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने की गलत पॉलिसी का खामियाजा भुगतान पड़ रहा है। अब गांव से 10,000 रुपये की आमदनी भी प्राप्त नहीं हो रही है। वहीं दूसरी ओर बिजली बोर्ड के मैनेजिंग डॉयरेक्टर के पास तीन-तीन सरकारी विभाग होने के कारण बोर्ड के काम पर गलत असर पड़ रहा है। इन्हें तुरंत बिजली बोर्ड से हटाकर स्थायी मैनेजिंग डायरेक्टर लगाना चाहिए। सरकार के पास कर्मचारियों को वेतन देने का बजट तक नहीं है, मगर बोर्ड के अधिकारी के गलत नीतियों से अब उपभोक्ताओं को स्मार्ट बिजली मीटर लगवाने का आदेश दे रहा है लेकिन कर्मचारियों ने इस आदेश की फाइल को रोककर रखा है। प्रदेश में पिछले साल ही प्रदेश बिजली बोर्ड द्वारा इलेक्ट्रॉनिक मीटर उपभोक्ता को लगाए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले रास्ते से सरकार बिजली बोर्ड में अदानी और अंबानी को घुसाने की कोशिश कर रही है। बोर्ड के कर्मचारियों ने हड़ताल करने पर छह तारीख को वेतन दिया गया लेकिन बोर्ड के पेंशनर जिनकी संख्या 30 से 35 हजार उन्हें अभी तक पेंशन नहीं दी गई है। बिजली बोर्ड में वर्तमान में 16,000 के करीब कर्मचारी काम कर रहे हैं। बिजली बोर्ड में पहले 15 से 16 हजार उपभोक्ता ही बिजली का प्रयोग किया करते थे, लेकिन अब 50 हजार उपभोक्ता बिजली का प्रयोग करते हैं, फिर भी बिजली बोर्ड को नुकसान ही झेलना पड़ रहा है। एक जमाना था, जब बिजली बोर्ड दूसरे विभागों को लोन के रूप में राशि देता था और सरकार का असली कमाऊ दफ्तर होता था, लेकिन वर्तमान में सरकार की गलत नीतियों के कारण बिजली बोर्ड को करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से बिजली बोर्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर को तुरंत हटाकर स्थाई नियुक्ति करने और बोर्ड के पेंशनरों को तुरंत पेंशन का भुगतान करने की मांग की है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ(किन्नौर)। हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड के गठन को 52 साल हो गए हैं, तबसे लेकर पिछले साल तक कुल 18,00 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा था। सरकार की गलत नीतियों के कारण एक साल में 14 करोड़ 36 लाख रुपये का बिजली बोर्ड को नुकसान हुआ है। इस कारण बिजली बोर्ड के कर्मचारी और पेंशनधारकों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। सरकार और बोर्ड प्रबंधन की नाकामी से बोर्ड के कर्मचारी और पेंशनर खासे मायूस हैं। हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन की उपाध्यक्ष रतन ज्योति नेगी ने कहा कि बिजली बोर्ड में पहले एक गांव से बिजली बिल के भुगतान से 5 से 10 लाख रुपये तक सरकार को कमाई होती थी, लेकिन सरकार की गलत नीति और पॉलिसी के कारण हर घर को 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने की गलत पॉलिसी का खामियाजा भुगतान पड़ रहा है। अब गांव से 10,000 रुपये की आमदनी भी प्राप्त नहीं हो रही है। वहीं दूसरी ओर बिजली बोर्ड के मैनेजिंग डॉयरेक्टर के पास तीन-तीन सरकारी विभाग होने के कारण बोर्ड के काम पर गलत असर पड़ रहा है। इन्हें तुरंत बिजली बोर्ड से हटाकर स्थायी मैनेजिंग डायरेक्टर लगाना चाहिए। सरकार के पास कर्मचारियों को वेतन देने का बजट तक नहीं है, मगर बोर्ड के अधिकारी के गलत नीतियों से अब उपभोक्ताओं को स्मार्ट बिजली मीटर लगवाने का आदेश दे रहा है लेकिन कर्मचारियों ने इस आदेश की फाइल को रोककर रखा है। प्रदेश में पिछले साल ही प्रदेश बिजली बोर्ड द्वारा इलेक्ट्रॉनिक मीटर उपभोक्ता को लगाए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले रास्ते से सरकार बिजली बोर्ड में अदानी और अंबानी को घुसाने की कोशिश कर रही है। बोर्ड के कर्मचारियों ने हड़ताल करने पर छह तारीख को वेतन दिया गया लेकिन बोर्ड के पेंशनर जिनकी संख्या 30 से 35 हजार उन्हें अभी तक पेंशन नहीं दी गई है। बिजली बोर्ड में वर्तमान में 16,000 के करीब कर्मचारी काम कर रहे हैं। बिजली बोर्ड में पहले 15 से 16 हजार उपभोक्ता ही बिजली का प्रयोग किया करते थे, लेकिन अब 50 हजार उपभोक्ता बिजली का प्रयोग करते हैं, फिर भी बिजली बोर्ड को नुकसान ही झेलना पड़ रहा है। एक जमाना था, जब बिजली बोर्ड दूसरे विभागों को लोन के रूप में राशि देता था और सरकार का असली कमाऊ दफ्तर होता था, लेकिन वर्तमान में सरकार की गलत नीतियों के कारण बिजली बोर्ड को करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से बिजली बोर्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर को तुरंत हटाकर स्थाई नियुक्ति करने और बोर्ड के पेंशनरों को तुरंत पेंशन का भुगतान करने की मांग की है।