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Rampur Bushahar News: ग्रामीणों ने सजगता से गांव को जलने से बचाया
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पेयजल लाइनें तोड़कर और मिट्टी डालकर बुझाई मंदिर में लगी आग, आसपास के 60 घरों को जलने से बचाया
बीरबल नेगी
सांगला (किन्नौर)। जनजातीय जिले की कानम पंचायत के लोचा लाबरंग मंदिर में लगी आग साथ लगते 60 घरों को अपनी चपेट में ले सकती थी लेकिन ग्रामीणों की सजगता से यहां एक बड़ा हादसा होने से टल गया। देर रात दो बजे जब मंदिर में आग भड़की तो अधिकतर ग्रामीण लोसर पर्व के चलते जागे हुए थे। इसकी सूचना मिलते ही ग्रामीण बचाव कार्य में जुट गए और तीन घंटे की मशक्कत के बाद मंदिर में लगी आग को बुझाया गया। जानकारी के अनुसार कानम पंचायत में रविवार रात से लोसर पर्व मनाया जा रहा था। इसको लेकर ग्रामीण पर्व की खुशी में झूम रहे थे। इसी बीच पंंचायत के लोचा लाबरंग बौद्ध मंदिर में देर रात दो बजे अचानक आग भड़क गई। देखते ही देखते आग बेकाबू हो गई। मंदिर से उठ रही लपटों को देखकर ग्रामीण एकत्रित हुए आग बुझाने के प्रयास में जुट गए। ग्रामीणों ने जल शक्ति विभाग की लाइनें तोड़, घरों से पानी और मिट्टी डालकर दो मंजिला भवन में लगी आग पर किसी तरह से काबू पाया। सुबह करीब पांच बजे ग्रामीणों ने आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया। ग्रामीणों के कठिन प्रयास से मंदिर में रखी करीब एक हजार वर्ष पुरानी मूर्तियों और अन्य सामान को जलने से बचा लिया। इतना ही नहीं अगर आग पर समय रहते काबू न पाया गया होता तो ऊपरी कानम गांव के करीब 60 घर इसकी चपेट में आ सकते थे। हालांकि इसके बाद मौके पर दमकल वाहन भी पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों ने आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया था। कानम पंचायत उपप्रधान जसवंत सिंह नेगी ने बताया कि मंदिर में आग लगने की सूचना लगते ही सभी ग्रामीण आग बुझाने में जुट गए। सभी ग्रामीणों के प्रयास से एक बड़ा हादसा होने से टल गया। ग्रामीणों ने आग बुझाने में हर संभव प्रयास किया।
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बीरबल नेगी
सांगला (किन्नौर)। जनजातीय जिले की कानम पंचायत के लोचा लाबरंग मंदिर में लगी आग साथ लगते 60 घरों को अपनी चपेट में ले सकती थी लेकिन ग्रामीणों की सजगता से यहां एक बड़ा हादसा होने से टल गया। देर रात दो बजे जब मंदिर में आग भड़की तो अधिकतर ग्रामीण लोसर पर्व के चलते जागे हुए थे। इसकी सूचना मिलते ही ग्रामीण बचाव कार्य में जुट गए और तीन घंटे की मशक्कत के बाद मंदिर में लगी आग को बुझाया गया। जानकारी के अनुसार कानम पंचायत में रविवार रात से लोसर पर्व मनाया जा रहा था। इसको लेकर ग्रामीण पर्व की खुशी में झूम रहे थे। इसी बीच पंंचायत के लोचा लाबरंग बौद्ध मंदिर में देर रात दो बजे अचानक आग भड़क गई। देखते ही देखते आग बेकाबू हो गई। मंदिर से उठ रही लपटों को देखकर ग्रामीण एकत्रित हुए आग बुझाने के प्रयास में जुट गए। ग्रामीणों ने जल शक्ति विभाग की लाइनें तोड़, घरों से पानी और मिट्टी डालकर दो मंजिला भवन में लगी आग पर किसी तरह से काबू पाया। सुबह करीब पांच बजे ग्रामीणों ने आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया। ग्रामीणों के कठिन प्रयास से मंदिर में रखी करीब एक हजार वर्ष पुरानी मूर्तियों और अन्य सामान को जलने से बचा लिया। इतना ही नहीं अगर आग पर समय रहते काबू न पाया गया होता तो ऊपरी कानम गांव के करीब 60 घर इसकी चपेट में आ सकते थे। हालांकि इसके बाद मौके पर दमकल वाहन भी पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों ने आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया था। कानम पंचायत उपप्रधान जसवंत सिंह नेगी ने बताया कि मंदिर में आग लगने की सूचना लगते ही सभी ग्रामीण आग बुझाने में जुट गए। सभी ग्रामीणों के प्रयास से एक बड़ा हादसा होने से टल गया। ग्रामीणों ने आग बुझाने में हर संभव प्रयास किया।