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Rampur Bushahar News: घरेलू हिंसा और कलह से टूट रहे हसंते-खेलते परिवार
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आनी से महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय में हर साल सामने आ रहे हैं 70 से 80 मामले
परिवारों में कलह, नशे में मारपीट और अवैध संबंध माना जा रहा मुख्य कारण
हरिकृष्ण शर्मा
आनी (कुल्लू)। घरेलू हिंसा, कलह और नशा हंसते खेलते परिवारों को तोड़ रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय के रिकॉर्ड के मुताबिक आनी खंड में प्रतिवर्ष 70 से 80 मामले घरेलू हिंसा के सामने आ रहे हैं। हालांकि अधिकतर मामले विभाग की सूझबूझ और कांउसलिंग से सुलझा लिए जाते हैं लेकिन कई ऐसे भी मामले हैं, जो सालों से अदालतों में उलझकर रह गए हैं। ऐसे में जहां एक हंसता-खेलता परिवार टूट जाता है, वहीं परिवारों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले साढ़े तीन सालों से अभी तक की बात करें तो आनी ब्लॉक में करीब 260 घरेलू हिंसा के मामले केवल महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय आनी में दर्ज हुए हैं। इसमें विभाग की सूझबूझ से 188 मामलों का सुलझा लिया गया जबकि 73 मामलों पर सहमति न बनने के चलते यह कोर्ट में भेज दिए गए हैं। रिकॉर्ड की बात करें तो वर्ष 2020-21 में 80 मामले, 2021-22 में 63 मामले, 2022-23 में 75 मामले और 2023-24 में अभी तक 37 मामले घरेलू हिंसा के सामने आ चुके हैं। अधिकतर मामलों में परिवारों में कलह जैसे सास-बहु का आपस में न बनना, पति का नशे में मारपीट या लड़ाई-झगड़ा, अवैध संबंध, भागकर या छोटी उम्र में शादी विवाह करना ऐसे मुख्य कारण सामने आए हैं। हालांकि लोगों को जागरूक करने के लिए विभाग की ओर से गांव-गांव में जागरूकता शिविर भी लगाए जाते हैं, जिससे ऐसे मामलों में परिवारों की कांउसलिंग हो सके और घरेलू हिंसा के मामले परिवारों की सोच परिवर्तित कर शांत हो सके। आनी की सामाजिक कार्यकर्ता शशि मल्होत्रा ने बताया कि आज के शिक्षित समाज में घरेलू हिंसा के मामले आना बेहद चिंता का विषय है। ऐसे मामलों में एक हंसते खेलते परिवार बिखर जाते हैं। इसमें परिवारों को स्वयं अपने भविष्य के बारे में सोचने की जरूरत है, जिससे एक परिवार अपने जीवन के पल सुख से व्यतीत कर सकें। सीडीपीओ आनी इंद्रसिंह गर्ग ने कहा कि विभाग लगातार गांव-गांव में जागरूकता शिविरों के जरिये ऐसे मामलों को कम करने की कोशिश कर रहा है। अब हम 21वीं सदी में प्रवेश कर चुके हैं। ऐसे मामलों में परिवारों को सुधार करने की आवश्यकता है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों और समाजसेवियों से भी अपील की कि ऐसे मामलों पर ग्राम सभाओं और ग्राम पंचायतों की बैठकों में संज्ञान लें।
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परिवारों में कलह, नशे में मारपीट और अवैध संबंध माना जा रहा मुख्य कारण
हरिकृष्ण शर्मा
आनी (कुल्लू)। घरेलू हिंसा, कलह और नशा हंसते खेलते परिवारों को तोड़ रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय के रिकॉर्ड के मुताबिक आनी खंड में प्रतिवर्ष 70 से 80 मामले घरेलू हिंसा के सामने आ रहे हैं। हालांकि अधिकतर मामले विभाग की सूझबूझ और कांउसलिंग से सुलझा लिए जाते हैं लेकिन कई ऐसे भी मामले हैं, जो सालों से अदालतों में उलझकर रह गए हैं। ऐसे में जहां एक हंसता-खेलता परिवार टूट जाता है, वहीं परिवारों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले साढ़े तीन सालों से अभी तक की बात करें तो आनी ब्लॉक में करीब 260 घरेलू हिंसा के मामले केवल महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय आनी में दर्ज हुए हैं। इसमें विभाग की सूझबूझ से 188 मामलों का सुलझा लिया गया जबकि 73 मामलों पर सहमति न बनने के चलते यह कोर्ट में भेज दिए गए हैं। रिकॉर्ड की बात करें तो वर्ष 2020-21 में 80 मामले, 2021-22 में 63 मामले, 2022-23 में 75 मामले और 2023-24 में अभी तक 37 मामले घरेलू हिंसा के सामने आ चुके हैं। अधिकतर मामलों में परिवारों में कलह जैसे सास-बहु का आपस में न बनना, पति का नशे में मारपीट या लड़ाई-झगड़ा, अवैध संबंध, भागकर या छोटी उम्र में शादी विवाह करना ऐसे मुख्य कारण सामने आए हैं। हालांकि लोगों को जागरूक करने के लिए विभाग की ओर से गांव-गांव में जागरूकता शिविर भी लगाए जाते हैं, जिससे ऐसे मामलों में परिवारों की कांउसलिंग हो सके और घरेलू हिंसा के मामले परिवारों की सोच परिवर्तित कर शांत हो सके। आनी की सामाजिक कार्यकर्ता शशि मल्होत्रा ने बताया कि आज के शिक्षित समाज में घरेलू हिंसा के मामले आना बेहद चिंता का विषय है। ऐसे मामलों में एक हंसते खेलते परिवार बिखर जाते हैं। इसमें परिवारों को स्वयं अपने भविष्य के बारे में सोचने की जरूरत है, जिससे एक परिवार अपने जीवन के पल सुख से व्यतीत कर सकें। सीडीपीओ आनी इंद्रसिंह गर्ग ने कहा कि विभाग लगातार गांव-गांव में जागरूकता शिविरों के जरिये ऐसे मामलों को कम करने की कोशिश कर रहा है। अब हम 21वीं सदी में प्रवेश कर चुके हैं। ऐसे मामलों में परिवारों को सुधार करने की आवश्यकता है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों और समाजसेवियों से भी अपील की कि ऐसे मामलों पर ग्राम सभाओं और ग्राम पंचायतों की बैठकों में संज्ञान लें।