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Rampur Bushahar News: चेबड़ी में धूमधाम से मनाया 18 बैशाख का ठिरशु मेला
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स्वांग नृत्य रहा मेले का मुख्य आर्कषण, हजारों लोगों ने की शिरकत
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर(कुल्लू)। उपतहसील नित्थर के अंतर्गत चेबड़ी गांव में 18 बैसाख का ठिरशु मेला उत्साह के साथ मनाया गया। मेले में दुराह,लोट,पलेही, कुठेड़,नित्थर और देहरा के हजारों लोगों ने भाग लिया। मेला माता भुवनेश्वरी के सानिध्य और उनके भव्य प्रांगण में आयोजित हुआ, जिसमें सुबह से महिलाओं और पुरुषों ने इस मेले में बड़ी संख्या में भाग लिया। मेले की शोभा बढ़ाने के लिए माता भगवती डगेनी अपने देवलुओं के साथ में मेले में पहुंची। इस दौरान चेबड़ी गांव के लोगों ने माता का पूर्जा अर्चना करके स्वागत किया। मेले का मुख्य आकर्षण स्वांग नृत्य और पारंपरिक नाटी रहा। इस अवसर पर रथ यात्रा पुराने मंदिर से प्रांगण तक निकाली गई। मंदिर के कारदार होशियार चंद शर्मा, मंदिर कमेटी के उपप्रधान चंद्र पॉल शर्मा और शिक्षक बैनर्जी शर्मा ने कहा कि मेला सदियों से इसी तरह से मनाया जा रहा है। हम सभी गांव वाले इस दुर्गम और प्राचीन कला, जिसको स्वांग नृत्य कहते हैं, को अभी भी संजोकर रखने का प्रयास कर रहे हैं। नित्थर क्षेत्र के दर्जनों ग्रामीणों ने पारंपरिक गीतों और ढोल नगाड़ों के साथ नाटी का आनंद लिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर(कुल्लू)। उपतहसील नित्थर के अंतर्गत चेबड़ी गांव में 18 बैसाख का ठिरशु मेला उत्साह के साथ मनाया गया। मेले में दुराह,लोट,पलेही, कुठेड़,नित्थर और देहरा के हजारों लोगों ने भाग लिया। मेला माता भुवनेश्वरी के सानिध्य और उनके भव्य प्रांगण में आयोजित हुआ, जिसमें सुबह से महिलाओं और पुरुषों ने इस मेले में बड़ी संख्या में भाग लिया। मेले की शोभा बढ़ाने के लिए माता भगवती डगेनी अपने देवलुओं के साथ में मेले में पहुंची। इस दौरान चेबड़ी गांव के लोगों ने माता का पूर्जा अर्चना करके स्वागत किया। मेले का मुख्य आकर्षण स्वांग नृत्य और पारंपरिक नाटी रहा। इस अवसर पर रथ यात्रा पुराने मंदिर से प्रांगण तक निकाली गई। मंदिर के कारदार होशियार चंद शर्मा, मंदिर कमेटी के उपप्रधान चंद्र पॉल शर्मा और शिक्षक बैनर्जी शर्मा ने कहा कि मेला सदियों से इसी तरह से मनाया जा रहा है। हम सभी गांव वाले इस दुर्गम और प्राचीन कला, जिसको स्वांग नृत्य कहते हैं, को अभी भी संजोकर रखने का प्रयास कर रहे हैं। नित्थर क्षेत्र के दर्जनों ग्रामीणों ने पारंपरिक गीतों और ढोल नगाड़ों के साथ नाटी का आनंद लिया।