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Rampur Bushahar News: एक माह के स्वर्ग प्रवास पर निकले देवी-देवता

Tue, 14 Jan 2025 11:00 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jan 2025 11:00 PM IST
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Rampur Bushahr, Makar Sankranti festival, Lohri festival
मकर संक्रांति के अवसर पर सत्यनारायण मंदिर रामपुर में किया हवन और पूजा पाठ। संवाद
ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना और खिचड़ी बांटकर दी विदाई
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मंदिरों के कपाट बंद, धार्मिक अनुष्ठान भी नहीं होंगे

फाल्गुन संक्रांति को देवालय लौटने पर गूर के माध्यम से सुनाएंगे फलादेश

संवाद न्यूज एजेंसी

रामपुर बुशहर। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर देवी-देवता एक माह के स्वर्ग प्रवास पर निकल चुके हैं। ग्रामीणों ने सुबह तड़के करीब चार बजे पूजा-अर्चना कर और खिचड़ी बांटकर अपने-अपने आराध्य देवताओं को विदाई दी। अब फाल्गुन संक्रांति के उपलक्ष्य पर देवी-देवता अपने मंदिरों में लौटेंगे और अपने गूर के माध्यम से वर्ष भर का अच्छा-बुरा फलादेश सुनाएंगे। गौर हो कि देवी-देवताओं के स्वर्ग प्रवास पर चले जाने से मंदिरों के कपाट बंद हो गए हैं और मंदिरों में किसी भी तरह का धार्मिक अनुष्ठान भी नहीं होगा। करीब एक माह तक अधिकांश मंदिर सुने पड़ जाएंगे और कोई भी चहल-पहल मंदिरों में नहीं होगी। जिला शिमला और कुल्लू जिले के कुछ देवी-देवता एक सप्ताह, 15 दिन, जबकि अधिकांश देवता साहिब एक माह के लिए इंद्रदेव की सभा में शामिल होते हैं। यहां देवी-देवता सालभर के होने वाले अच्छे-बुरे फलादेश पर मंथन करते हैं। फाल्गुन संक्रांति पर देवता साहिब अपने मंदिरों में प्रवेश करेंगे। इस दिन का ग्रामीणों को बेसब्री से इंतजार रहता है, क्योंकि इस दिन देवता अपने गूर के माध्यम से साल भर का फलादेश सुनाते हैं। परशुराम मंदिर समिति के अध्यक्ष खेलचंद नेगी ने कहा कि मकर संक्रांति के पर्व पर मंगलवार सुबह करीब चार-पांच बजे ग्रामीणों ने खिचड़ी बांट कर और पूजा-अर्चना कर देवता साहिब को स्वर्ग प्रवास पर विदा किया गया। एक माह तक मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे।


ग्रामीण अपने घरों में विशेष पत्ती (पाजा) से करेंगे पूजा

मान्यता अनुसार लोहड़ी और मकर संक्रांति के पावन पर्व से ग्रामीण अपने घरों में धूप की पूजा नहीं करते हैं। अब एक माह तक विशेष पत्ती (पाजा) से अपने घरों में पूजा करेंगे। इस पत्ती की खुशबू से घर महकेंगे।
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