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Rampur Bushahar News: बारिश और ठंड से बगीचो में मधुमक्खी के बक्सों को हुआ नुकसान
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बगीचों में रखे मौन बक्सों में पानी भरा, ठंड से सक्रिय भी नहीं मधुमक्खियां
खराब मौसम के साथ परागण प्रक्रिया पर भी हुआ असर
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। पिछले सप्ताह क्षेत्र में हुई भारी बारिश, ओलावृष्टि से अचानक बढ़ी ठंड ने सेब बहुल क्षेत्रों को दोहरी मार दी है। एक ओर जहां बागवानों की फसल पर संकट गहराया है, वहीं मौन (मधुमक्खी) पालकों को भी भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण कई जगह बगीचों में रखे मौन बक्सों में पानी भर गया। कई स्थानों पर ठंड बढ़ने से मधुमक्खियां सक्रिय नहीं हो पाईं। कई कॉलोनियां कमजोर होकर खत्म हो गईं। कई जगह दस से बीस प्रतिशत तक बक्सों को नुकसान हुआ है। क्षेत्र में अधिकांश मौन पालक अपने बक्से सेब बागवानों को परागण के लिए किराये पर देते हैं। खराब मौसम के कारण इन बक्सों को हुए नुकसान का सीधा असर मौन पालकों की आय पर पड़ा है। मौन पालक सन्नी चौहान ने कहा कि देखरेख के अभाव में खराब मौसम के दौरान नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि एक-एक बक्से की लागत हजारों रुपये होती है। कॉलोनी खत्म होने से पूरा निवेश डूब जाता है। इसका बागवानों को भी नुकसान झेलना पड़ा है। खराब मौसम के साथ परागण प्रक्रिया पर असर पड़ा है। सेब की फसल में मधुमक्खियों की अहम भूमिका होती है। खराब परिस्थितियों ने सेब उत्पादन और मौन पालन दोनों को प्रभावित किया है। मौन बक्सों को हुए नुकसान से जहां परागण प्रक्रिया बाधित हुई है, वहीं मौन पालकों की आजीविका पर भी संकट खड़ा हो गया है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति इस सीजन की दिशा तय करेगी।
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खराब मौसम के साथ परागण प्रक्रिया पर भी हुआ असर
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। पिछले सप्ताह क्षेत्र में हुई भारी बारिश, ओलावृष्टि से अचानक बढ़ी ठंड ने सेब बहुल क्षेत्रों को दोहरी मार दी है। एक ओर जहां बागवानों की फसल पर संकट गहराया है, वहीं मौन (मधुमक्खी) पालकों को भी भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण कई जगह बगीचों में रखे मौन बक्सों में पानी भर गया। कई स्थानों पर ठंड बढ़ने से मधुमक्खियां सक्रिय नहीं हो पाईं। कई कॉलोनियां कमजोर होकर खत्म हो गईं। कई जगह दस से बीस प्रतिशत तक बक्सों को नुकसान हुआ है। क्षेत्र में अधिकांश मौन पालक अपने बक्से सेब बागवानों को परागण के लिए किराये पर देते हैं। खराब मौसम के कारण इन बक्सों को हुए नुकसान का सीधा असर मौन पालकों की आय पर पड़ा है। मौन पालक सन्नी चौहान ने कहा कि देखरेख के अभाव में खराब मौसम के दौरान नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि एक-एक बक्से की लागत हजारों रुपये होती है। कॉलोनी खत्म होने से पूरा निवेश डूब जाता है। इसका बागवानों को भी नुकसान झेलना पड़ा है। खराब मौसम के साथ परागण प्रक्रिया पर असर पड़ा है। सेब की फसल में मधुमक्खियों की अहम भूमिका होती है। खराब परिस्थितियों ने सेब उत्पादन और मौन पालन दोनों को प्रभावित किया है। मौन बक्सों को हुए नुकसान से जहां परागण प्रक्रिया बाधित हुई है, वहीं मौन पालकों की आजीविका पर भी संकट खड़ा हो गया है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति इस सीजन की दिशा तय करेगी।