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श्रम कानूनों के खिलाफ सड़कों पर उतरे माकपा कार्यकर्ता
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रामपुर बुशहर। श्रम कानून के खिलाफ माकपा कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। शनिवार को सीटू, खेत मजदूर यूनियन और अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय आह्वान पर श्रम कानूनों में बदलाव, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बेचने और किसान विरोधी अध्यादेशों के खिलाफ मजदूरों ने प्रदर्शन किया। रामपुर, झाकड़ी, निरमंड, ज्यूरी, बायल, नाथपा, कोटागाड़, बिथल, दत्तनगर और कोटला सहित कई जगह मजदूर किसान प्रतिरोध दिवस मनाया गया। क्षेत्र के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह, सीटू राज्य उपाध्यक्ष बिहारी सेवगी, नरेंद्र देष्टा, नीलदत्त, रिंकू राम, मोहित, किसान सभा जिला सचिव देवकी नंद, पूर्ण और दिनेश मेहता सहित अन्य वक्ताओं ने केंद्र और प्रदेश सरकार को चेताया कि यदि मजदूर-किसान विरोधी कदमों को समय रहते पीछे नहीं खींचा गया तो किसान आंदोलन को तेज किया जाएगा। कोरोना महामारी के इस दौर में भी शासक वर्ग और सरकारें मजदूर-किसानों का खून चूसने और उनका जमकर शोषण करने में लगे हैं।
प्रदर्शन के दौरान ये उठाईं मांगें
इस दौरान सरकार से श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी परिवर्तन की प्रक्रिया पर रोक लगाने, मजदूरों को 21 हजार रुपये वेतन देने, समान काम का समान वेतन देने, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बेचने पर रोक लगाने, किसान विरोधी अध्यादेशों को वापस लेने, मजदूरों को कोरोना काल के पांच माह का वेतन देने, उनकी छंटनी पर रोक लगाने, फसलों का उचित दाम देने, मनरेगा के तहत दो सौ दिन का रोजगार देने सहित कई अन्य मांगों को पूरा करने की मांग की गई। आंगनबाड़ी, मिड-डे मील और आशा वर्कर को नियमित कर्मचारी घोषित करने, बिजली के बिलों में कटौती, बस किराये को कम करने सहित किसानों का पूर्ण कर्ज माफ करने की मांग रखी। उन्होंने चेताया कि यदि पूंजीपतियों और उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाकर मजदूर-किसानों का शोषण नहीं रोका गया तो सरकार के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।
इस अवसर पर संदीप, रमन शर्मा, राज, सतीश, निशा, विद्या, सरोज, श्यामा, श्याम लाल बुशैहरी, खुशी राम, मंजू, सुशीला, रजनी, राधा, चंद्र शर्मा, जसवीर, हरीश, प्रेम सिंघानिया, राकेश, जितेंद्र, सुरेंद्र, प्रदीप, मोहन, विकेश, कैलाश, कुलदीप, कबीर, मंगत राम, पोविंद्र शर्मा, देवेंद्र, मंजू, मनीता, दुर्गा सिंह और ललिता सहित कई अन्य मौजूद रहे।
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प्रदर्शन के दौरान ये उठाईं मांगें
इस दौरान सरकार से श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी परिवर्तन की प्रक्रिया पर रोक लगाने, मजदूरों को 21 हजार रुपये वेतन देने, समान काम का समान वेतन देने, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बेचने पर रोक लगाने, किसान विरोधी अध्यादेशों को वापस लेने, मजदूरों को कोरोना काल के पांच माह का वेतन देने, उनकी छंटनी पर रोक लगाने, फसलों का उचित दाम देने, मनरेगा के तहत दो सौ दिन का रोजगार देने सहित कई अन्य मांगों को पूरा करने की मांग की गई। आंगनबाड़ी, मिड-डे मील और आशा वर्कर को नियमित कर्मचारी घोषित करने, बिजली के बिलों में कटौती, बस किराये को कम करने सहित किसानों का पूर्ण कर्ज माफ करने की मांग रखी। उन्होंने चेताया कि यदि पूंजीपतियों और उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाकर मजदूर-किसानों का शोषण नहीं रोका गया तो सरकार के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।
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इस अवसर पर संदीप, रमन शर्मा, राज, सतीश, निशा, विद्या, सरोज, श्यामा, श्याम लाल बुशैहरी, खुशी राम, मंजू, सुशीला, रजनी, राधा, चंद्र शर्मा, जसवीर, हरीश, प्रेम सिंघानिया, राकेश, जितेंद्र, सुरेंद्र, प्रदीप, मोहन, विकेश, कैलाश, कुलदीप, कबीर, मंगत राम, पोविंद्र शर्मा, देवेंद्र, मंजू, मनीता, दुर्गा सिंह और ललिता सहित कई अन्य मौजूद रहे।
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