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निरमंड में मजदूरों नें मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
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मनरेगा मजदूर अपनी मांगों को लेकर धरना देते हुए।
- फोटो : RAMPUR-HP
रामपुर बुशहर। प्रदेश भवन एवं सड़क निर्माण मजदूर यूनियन संबधित सीटू इकाई निरमंड ने अखिल भारतीय भवन एवं सड़क निर्माण फेडरेशन के आह्वान पर सोमवार को मांगों को लेकर हल्ला बोला। केंद्र और राज्य सरकारों की मजदूर, किसान और आम जनता विरोधी नीतियों के खिलाफ मजदूरों ने प्रदर्शन कर विरोध जताया। महासचिव पूर्ण ठाकुर और अध्यक्ष परस राम ने केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश सरकार को चेताते हुए कहा कि मजदूर विरोधी कदमों से हाथ पीछे खींचें अन्यथा मजदूर आंदोलन तेज किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के इस संकट काल में भी शासक वर्ग और सरकारें मजदूरों का शोषण कर रही हैं। लॉकडाउन को केंद्र सरकार की ओर से गलत तरीके से लागू करने के कारण लॉकडाउन ने आग में घी डालने का काम किया। देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है। निर्माण क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले सामान की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसका नतीजा यह हुआ कि लॉकडाउन के कारण देश में 14 करोड़ लोग बेरोजगार हो गए और कई मजदूरों की जानें भूख से चली गईं। यूनियन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि प्रवासी मजदूर कानून को दूसरे कानूनों में मर्ज न किया जाए बल्कि, इनकी खामियों को दूर करके इसे सख्ती से लागू किया जाए।
इन मांगों को उठाया प्रमुखता से
हर परिवार के एक सदस्य के लिए 10 किलो अनाज, अगले 6 माह तक सभी परिवारों को छह माह तक 7500 रुपये नकद और सबको रोजगार सुनिश्चित करने की मांग की है। काम के घंटे में बढ़ोतरी पर रोक, आवश्यक वस्तु अधिनियम और कृषि व्यापार अध्यादेश वापस लाने, श्रम कानूनों में किए गए बदलाव पर रोक लगाने, कोरोना योद्धाओं को सुरक्षा बीमा और रिस्क भत्ता प्रदान देने, सभी मजदूरों को 7500 रुपये 6 महीने तक नकद आय मदद प्रदान करने, मनरेगा में 200 दिन का रोजगार देने, मजदूरों की छंटनी, तालाबंदी और वेतन में कटौती बंद करने सहित विभिन्न मांगों को पूरा करने की गुहार लगाई। वहीं चेताया कि यदि केंद्र प्रदेश सरकार मजदूर विरोधी फैसलों में बदलाव नहीं करेगी तो नौ अगस्त को पूरे देश में मजदूर और किसानों के साथ मिलकर जेल भरो आंदोलन छेड़ा जाएगा।
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इस मौके पर किसान सभा जिला महासचिव देवकी नंद, जगदीश, दुर्गा नंद, श्याम लाल, राजकुमार, संगत राम, वेद राम, मौलक राम, सीता राम, राजू, पदम, शोभा राम, बाल कृष्ण, तोता राम, सीता देवी, मीना देवी, राजकुमारी, खिला देवी, रीता देवी और देवी सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के इस संकट काल में भी शासक वर्ग और सरकारें मजदूरों का शोषण कर रही हैं। लॉकडाउन को केंद्र सरकार की ओर से गलत तरीके से लागू करने के कारण लॉकडाउन ने आग में घी डालने का काम किया। देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है। निर्माण क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले सामान की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसका नतीजा यह हुआ कि लॉकडाउन के कारण देश में 14 करोड़ लोग बेरोजगार हो गए और कई मजदूरों की जानें भूख से चली गईं। यूनियन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि प्रवासी मजदूर कानून को दूसरे कानूनों में मर्ज न किया जाए बल्कि, इनकी खामियों को दूर करके इसे सख्ती से लागू किया जाए।
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इन मांगों को उठाया प्रमुखता से
हर परिवार के एक सदस्य के लिए 10 किलो अनाज, अगले 6 माह तक सभी परिवारों को छह माह तक 7500 रुपये नकद और सबको रोजगार सुनिश्चित करने की मांग की है। काम के घंटे में बढ़ोतरी पर रोक, आवश्यक वस्तु अधिनियम और कृषि व्यापार अध्यादेश वापस लाने, श्रम कानूनों में किए गए बदलाव पर रोक लगाने, कोरोना योद्धाओं को सुरक्षा बीमा और रिस्क भत्ता प्रदान देने, सभी मजदूरों को 7500 रुपये 6 महीने तक नकद आय मदद प्रदान करने, मनरेगा में 200 दिन का रोजगार देने, मजदूरों की छंटनी, तालाबंदी और वेतन में कटौती बंद करने सहित विभिन्न मांगों को पूरा करने की गुहार लगाई। वहीं चेताया कि यदि केंद्र प्रदेश सरकार मजदूर विरोधी फैसलों में बदलाव नहीं करेगी तो नौ अगस्त को पूरे देश में मजदूर और किसानों के साथ मिलकर जेल भरो आंदोलन छेड़ा जाएगा।
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इस मौके पर किसान सभा जिला महासचिव देवकी नंद, जगदीश, दुर्गा नंद, श्याम लाल, राजकुमार, संगत राम, वेद राम, मौलक राम, सीता राम, राजू, पदम, शोभा राम, बाल कृष्ण, तोता राम, सीता देवी, मीना देवी, राजकुमारी, खिला देवी, रीता देवी और देवी सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।