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हिमाचल में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना समय की जरूरत : चेतन बरागटा
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मां हाटेश्वरी और गिरिगंगा को पर्यटन मानचित्र पर उचित स्थान देने की उठाई मांग
स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। भाजपा नेता चेतन बरागटा ने हिमाचल प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है। प्रदेश के धार्मिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने की जरूरत है। चेतन बरागटा ने कहा कि निचले हिमाचल में स्थित ज्वालामुखी, मां चामुंडा, श्रीनयना देवी और मां बज्रेश्वरी जैसे प्रसिद्ध शक्तिपीठों में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इससे आसपास के क्षेत्रों में होटल व्यवसाय, परिवहन, दुकानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। इसी तरह प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों को भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि शिमला जिले के जुब्बल-कोटखाई-नावर क्षेत्र में स्थित मां हाटेश्वरी मंदिर और गिरिगंगा जैसे पवित्र स्थलों में धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इन स्थलों की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता के साथ प्राकृतिक सुंदरता को ध्यान में रखते हुए इन्हें पर्यटन मानचित्र पर उचित स्थान मिलना चाहिए। इसके लिए श्रद्धालुओं की सुविधा के अनुरूप आवश्यक सुविधाएं विकसित करने की जरूरत है। बरागटा ने कहा कि मां हाटेश्वरी मंदिर के पावन प्रांगण में पहुंचकर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। ऐसे धार्मिक स्थलों को व्यापक पहचान मिलने से क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों की आर्थिकी को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सभी क्षेत्रों के प्रमुख धार्मिक स्थलों को समान अवसर दिए जाने चाहिए। विकास योजनाएं तैयार करते समय स्थानीय आस्था, प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। भाजपा नेता चेतन बरागटा ने हिमाचल प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है। प्रदेश के धार्मिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने की जरूरत है। चेतन बरागटा ने कहा कि निचले हिमाचल में स्थित ज्वालामुखी, मां चामुंडा, श्रीनयना देवी और मां बज्रेश्वरी जैसे प्रसिद्ध शक्तिपीठों में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इससे आसपास के क्षेत्रों में होटल व्यवसाय, परिवहन, दुकानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। इसी तरह प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों को भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि शिमला जिले के जुब्बल-कोटखाई-नावर क्षेत्र में स्थित मां हाटेश्वरी मंदिर और गिरिगंगा जैसे पवित्र स्थलों में धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इन स्थलों की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता के साथ प्राकृतिक सुंदरता को ध्यान में रखते हुए इन्हें पर्यटन मानचित्र पर उचित स्थान मिलना चाहिए। इसके लिए श्रद्धालुओं की सुविधा के अनुरूप आवश्यक सुविधाएं विकसित करने की जरूरत है। बरागटा ने कहा कि मां हाटेश्वरी मंदिर के पावन प्रांगण में पहुंचकर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। ऐसे धार्मिक स्थलों को व्यापक पहचान मिलने से क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों की आर्थिकी को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सभी क्षेत्रों के प्रमुख धार्मिक स्थलों को समान अवसर दिए जाने चाहिए। विकास योजनाएं तैयार करते समय स्थानीय आस्था, प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।