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Rampur Bushahar News: जगातखाना में विकास के वादे हवा, धरातल पर व्यवस्था बदहाल
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जगातखाना निवासी रचित सिंघल। संवाद
चुनावी मुद्दा : सेमी अर्बन पंचायत में टूटे रास्ते, सड़कों पर बह रही गंदगी, कचरे के लगे ढेर
सीवरेज, कचरा प्रबंधन, पार्किंग, बिजली समेत कई सुविधाओं को तरसे ग्रामीण
पंचायत के कुल मतदाता 11,111, बस रही 10 हजार से अधिक आबादी
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। आधुनिकता के दौर में भी कई ग्रामीण इलाके विकास की दृष्टि से पिछड़े हुए हैं। रामपुर शहर के साथ सटी सेमी अर्बन जगातखाना पंचायत का हाल कुछ ऐसा ही है। यहां विकास के वादे हवा और धरातल पर व्यवस्था बदहाल है। निरमंड विकास खंड की सेमी अर्बन इस पंचायत के ग्रामीण आज भी विकास की आस लगाए हुए हैं। चुनाव के दौरान लोगों से विकास के वादे तो किए जाते हैं। इसके बाद जनप्रतिनिधि लोगों की मांगों और समस्याओं को भूल जाते हैं और विकास के दावे हवा होते दिखाई देते हैं। जगातखाना पंचायत में टूटे रास्ते, सड़क पर बह रही गंदगी, जगह-जगह लगे कूड़े-कचरे के ढेर, सड़कों पर जाम और सतलुज नदी में बह रही सीवरेज की गंदगी के हालात आज दिन तक नहीं सुधरे। हालांकि, इन मुद्दों को कई बार उठाया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की फटकार के बाद भी पंचायत की व्यवस्था नहीं सुधर पाई।
वर्तमान में पंचायत के कुल मतदाताओं की संख्या 11,111 हैं, जबकि यहां 10 हजार से भी अधिक आबादी है। शहरीकरण के लिहाज से यहां कंक्रीट का जंगल तो बन गया, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। तीन वर्ष पहले बरसात के दौरान आई आपदा में कई रास्ते क्षतिग्रस्त हो गए थे, जो आज दिन तक दुरुस्त नहीं हो पाए। ऐसे में हजारों लोगों को आवाजाही करना मुश्किल हो रहा है। शहरी क्षेत्र में तब्दील हुई इस पंचायत में सीवरेज प्रणाली की कोई सुविधा नहीं है। सतलुज नदी में सीवरेज की गंदगी ठिकाने लग रही है, जबकि पंचायत के नालों में भी सीवरेज की गंदगी बह रही है। प्राथमिक स्कूल को जाने वाली सड़क पर घरों का गंदा पानी बह रहा है। यही हाल कचरा प्रबंधन का भी है। पंचायत के विभिन्न क्षेत्रों में नियमों के विपरीत खुलेआम कूड़ा-कचरा ठिकाने लगाया जा रहा है। पंचायत में पर्यावरण नियमों की खुली धज्जियां उड़ रही हैं। पंचायत से गुजरने वाली मुख्य सड़क पर नियमों को ताक पर रखकर वाहनों को पार्क किया जा रहा है, जो हादसों का कारण भी बन रहे हैं। पार्किंग की उचित व्यवस्था न होने से आए दिन जाम की समस्या रहती है। पार्क और खेल मैदान की भी अभी तक कोई सुविधा नहीं मिल पाई है। खेल गतिविधियां न होने से युवाओं में नशे की कुरीति भी फैलती जा रही है। पंचायत के जगातखाना, थाचवा-1, थाचवा-2, भड़ैल, चाटी, शरशाया और सिस्वासेरी वार्ड के लोग आज भी विकास की आस लगाए हुए हैं।
जगातखाना के लोगों का कहना
मदन ठाकुर ने कहा कि पंचायत चुनाव के समय विकास के दावे तो होते हैं, लेकिन चुनाव निपटते ही सभी जन समस्याएं ठंडे बस्ते में पड़ जाती हैं। हजारों की आबादी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रही है।
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रचित सिंघल ने कहा कि शहर के साथ लगती इस पंचायत में मूलभूत सुविधाओं की खासी दरकार है। आज भी पंचायत के लोग बिजली, कचरा प्रबंधन, सीवरेज प्रणाली, पार्किंग जैसी समस्याओं से दो चार हो रहे हैं।
धर्म सेन ने बताया कि पंचायत के रास्तों और सड़कों की हालत खस्ता बनी हुई है। चुनाव के दौरान विकास के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद जनता की समस्याओं को दरकिनार किया जा रहा है।
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सीवरेज, कचरा प्रबंधन, पार्किंग, बिजली समेत कई सुविधाओं को तरसे ग्रामीण
पंचायत के कुल मतदाता 11,111, बस रही 10 हजार से अधिक आबादी
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। आधुनिकता के दौर में भी कई ग्रामीण इलाके विकास की दृष्टि से पिछड़े हुए हैं। रामपुर शहर के साथ सटी सेमी अर्बन जगातखाना पंचायत का हाल कुछ ऐसा ही है। यहां विकास के वादे हवा और धरातल पर व्यवस्था बदहाल है। निरमंड विकास खंड की सेमी अर्बन इस पंचायत के ग्रामीण आज भी विकास की आस लगाए हुए हैं। चुनाव के दौरान लोगों से विकास के वादे तो किए जाते हैं। इसके बाद जनप्रतिनिधि लोगों की मांगों और समस्याओं को भूल जाते हैं और विकास के दावे हवा होते दिखाई देते हैं। जगातखाना पंचायत में टूटे रास्ते, सड़क पर बह रही गंदगी, जगह-जगह लगे कूड़े-कचरे के ढेर, सड़कों पर जाम और सतलुज नदी में बह रही सीवरेज की गंदगी के हालात आज दिन तक नहीं सुधरे। हालांकि, इन मुद्दों को कई बार उठाया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की फटकार के बाद भी पंचायत की व्यवस्था नहीं सुधर पाई।
वर्तमान में पंचायत के कुल मतदाताओं की संख्या 11,111 हैं, जबकि यहां 10 हजार से भी अधिक आबादी है। शहरीकरण के लिहाज से यहां कंक्रीट का जंगल तो बन गया, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। तीन वर्ष पहले बरसात के दौरान आई आपदा में कई रास्ते क्षतिग्रस्त हो गए थे, जो आज दिन तक दुरुस्त नहीं हो पाए। ऐसे में हजारों लोगों को आवाजाही करना मुश्किल हो रहा है। शहरी क्षेत्र में तब्दील हुई इस पंचायत में सीवरेज प्रणाली की कोई सुविधा नहीं है। सतलुज नदी में सीवरेज की गंदगी ठिकाने लग रही है, जबकि पंचायत के नालों में भी सीवरेज की गंदगी बह रही है। प्राथमिक स्कूल को जाने वाली सड़क पर घरों का गंदा पानी बह रहा है। यही हाल कचरा प्रबंधन का भी है। पंचायत के विभिन्न क्षेत्रों में नियमों के विपरीत खुलेआम कूड़ा-कचरा ठिकाने लगाया जा रहा है। पंचायत में पर्यावरण नियमों की खुली धज्जियां उड़ रही हैं। पंचायत से गुजरने वाली मुख्य सड़क पर नियमों को ताक पर रखकर वाहनों को पार्क किया जा रहा है, जो हादसों का कारण भी बन रहे हैं। पार्किंग की उचित व्यवस्था न होने से आए दिन जाम की समस्या रहती है। पार्क और खेल मैदान की भी अभी तक कोई सुविधा नहीं मिल पाई है। खेल गतिविधियां न होने से युवाओं में नशे की कुरीति भी फैलती जा रही है। पंचायत के जगातखाना, थाचवा-1, थाचवा-2, भड़ैल, चाटी, शरशाया और सिस्वासेरी वार्ड के लोग आज भी विकास की आस लगाए हुए हैं।
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जगातखाना के लोगों का कहना
मदन ठाकुर ने कहा कि पंचायत चुनाव के समय विकास के दावे तो होते हैं, लेकिन चुनाव निपटते ही सभी जन समस्याएं ठंडे बस्ते में पड़ जाती हैं। हजारों की आबादी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रही है।
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रचित सिंघल ने कहा कि शहर के साथ लगती इस पंचायत में मूलभूत सुविधाओं की खासी दरकार है। आज भी पंचायत के लोग बिजली, कचरा प्रबंधन, सीवरेज प्रणाली, पार्किंग जैसी समस्याओं से दो चार हो रहे हैं।
धर्म सेन ने बताया कि पंचायत के रास्तों और सड़कों की हालत खस्ता बनी हुई है। चुनाव के दौरान विकास के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद जनता की समस्याओं को दरकिनार किया जा रहा है।

जगातखाना निवासी रचित सिंघल। संवाद

जगातखाना निवासी रचित सिंघल। संवाद

जगातखाना निवासी रचित सिंघल। संवाद

जगातखाना निवासी रचित सिंघल। संवाद

जगातखाना निवासी रचित सिंघल। संवाद

जगातखाना निवासी रचित सिंघल। संवाद

जगातखाना निवासी रचित सिंघल। संवाद