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ग्रामीणों ने लगाए नो मींस नो के नारे, एडीएम किए शांत
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पूह (किन्नौर)। जिला किन्नौर में सतलुज नदी पर प्रस्तावित 980 मेगावाट की जंगी-ठोपन जलविद्युत परियोजना का ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं। सोमवार को परियोजना को लेकर एडीएम पूह अश्वनी कुमार की अध्यक्षता में ग्राम पंचायत मूरंग में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया।
मगर यहां भी ग्रामीणों ने इसके निर्माण का विरोध करते हुए जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने इस दौरान नो मींस नो और एसजेवीएनएल गो बैक, गो बैक के नारे लगाए। एडीएम पूह अश्वनी कुमार ने ग्रामीणों को शांत करने की कोशिश की लेकिन लोग एक ही बात पर अड़े रहे कि किसी भी सूरत में विकास के लिए पर्यावरण की बलि नहीं चढ़ने दी जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के निर्माण से जहां एक ओर पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, दूसरी ओर उनकी फसलों और मकानों पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। परियोजना निर्माण के समय भारी भरकम ब्लास्टिंग की जाती है। इससे मकानों में दरारें आने का खतरा बना रहता है। हालांकि प्रशासन सतलुज नदी पर प्रस्तावित 980 मेगावाट जंगी-ठोपन परियोजना स्थापित करने के लिए ग्रामीणों को परियोजना की लाभकारी नीतियों से अवगत करवा रहे हैं।
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मगर प्रशासन और कंपनी के अधिकारी जहां भी जा रहे हैं, ग्रामीण परियोजना निर्माण पर आपत्ति जता रहे हैं। यही नहीं गत वर्ष अगस्त माह में भी वन अधिकार संघर्ष समिति, हिमलोक जागृति संघ सहित अन्य समितियों के साथ मिलकर हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर परियोजना निर्माण का जमकर विरोध किया था।
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मगर यहां भी ग्रामीणों ने इसके निर्माण का विरोध करते हुए जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने इस दौरान नो मींस नो और एसजेवीएनएल गो बैक, गो बैक के नारे लगाए। एडीएम पूह अश्वनी कुमार ने ग्रामीणों को शांत करने की कोशिश की लेकिन लोग एक ही बात पर अड़े रहे कि किसी भी सूरत में विकास के लिए पर्यावरण की बलि नहीं चढ़ने दी जाएगी।
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ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के निर्माण से जहां एक ओर पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, दूसरी ओर उनकी फसलों और मकानों पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। परियोजना निर्माण के समय भारी भरकम ब्लास्टिंग की जाती है। इससे मकानों में दरारें आने का खतरा बना रहता है। हालांकि प्रशासन सतलुज नदी पर प्रस्तावित 980 मेगावाट जंगी-ठोपन परियोजना स्थापित करने के लिए ग्रामीणों को परियोजना की लाभकारी नीतियों से अवगत करवा रहे हैं।
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मगर प्रशासन और कंपनी के अधिकारी जहां भी जा रहे हैं, ग्रामीण परियोजना निर्माण पर आपत्ति जता रहे हैं। यही नहीं गत वर्ष अगस्त माह में भी वन अधिकार संघर्ष समिति, हिमलोक जागृति संघ सहित अन्य समितियों के साथ मिलकर हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर परियोजना निर्माण का जमकर विरोध किया था।