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Rampur Bushahar News: पेटीएम को धोखाधड़ी मामले में सेटलमेंट रिपोर्ट पेश करने का आदेश
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सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी से हुई 10 लाख रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा है मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
सत्र न्यायाधीश किन्नौर ने डिजिटल पेमेंट कंपनी वन 97 कम्युनिकेशन लिमिटेड (पेटीएम) की पुनरीक्षण याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया है। यह मामला कल्पा के एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी से केवाईसी अपडेट के बहाने हुई 10 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी से जुड़ा है। अदालत ने पेटीएम को सेटलमेंट रिपोर्ट पेश करने और संबंधित पक्षों को मामले में शामिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी। सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी के खाते से 10,18,497 रुपये की धोखाधड़ी हुई थी। उन्हें केवाईसी अपडेट के बहाने अज्ञात व्यक्तियों ने निशाना बनाया था। धोखाधड़ी के बाद, 7,53,497 रुपये वन 97 कम्युनिकेशन लिमिटेड के 34 मर्चेंट पूल खातों में चले गए। पुलिस ने इन खातों को फ्रीज कर दिया था। सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी ने पैसे जारी करने के लिए आवेदन किया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, किन्नौर ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को इन खातों से 7,53,497 रुपये सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी को जारी करने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ वन 97 कम्युनिकेशन लिमिटेड ने पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। वन 97 कम्युनिकेशन लिमिटेड ने अपनी याचिका में कहा कि 7,53,497 रुपये उसके 34 फ्रीज किए गए मर्चेंट पूल खातों में थे। कंपनी ने तर्क दिया कि ये खाते ऑनलाइन खरीद के लिए विभिन्न उपयोगकर्ताओं से राशि एकत्रित करने के लिए बैंक की ओर से उपयोग किए जाते हैं। कंपनी ने खुद को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (आईटी अधिनियम) की धारा 79 के तहत एक मध्यस्थ बताया। कंपनी ने कहा कि वह तीसरे पक्ष की जानकारी या डेटा के लिए उत्तरदायी नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा कि उसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बारे में सूचित नहीं किया गया था। सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी के वकील ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पेटीएम ने अदालत के समक्ष सभी तथ्य पेश नहीं किए हैं। वकील ने तर्क दिया कि आईटी अधिनियम की धारा 79(3) के तहत मध्यस्थ कंपनी अवैध कार्य में शामिल होने पर उत्तरदायी होती है। राज्य के वकील ने भी कहा कि पेटीएम को सेटलमेंट रिपोर्ट देनी चाहिए। इससे मुख्य अपराधी का पता लगाने में मदद मिलेगी। सत्र न्यायाधीश की अदालत ने पाया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश पेटीएम को सुने बिना पारित किया गया था। अदालत ने वन 97 कम्युनिकेशन लिमिटेड को ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया। कंपनी को सेटलमेंट रिपोर्ट और लाभार्थियों के नाम-पते भी पेश करने होंगे। भारतीय स्टेट बैंक को भी मामले में एक पक्ष के रूप में शामिल किया जाएगा। अमर सिंह को जारी की गई 7,53,497 रुपये की राशि अंतिम निर्णय तक उनसे वापस नहीं ली जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
सत्र न्यायाधीश किन्नौर ने डिजिटल पेमेंट कंपनी वन 97 कम्युनिकेशन लिमिटेड (पेटीएम) की पुनरीक्षण याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया है। यह मामला कल्पा के एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी से केवाईसी अपडेट के बहाने हुई 10 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी से जुड़ा है। अदालत ने पेटीएम को सेटलमेंट रिपोर्ट पेश करने और संबंधित पक्षों को मामले में शामिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी। सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी के खाते से 10,18,497 रुपये की धोखाधड़ी हुई थी। उन्हें केवाईसी अपडेट के बहाने अज्ञात व्यक्तियों ने निशाना बनाया था। धोखाधड़ी के बाद, 7,53,497 रुपये वन 97 कम्युनिकेशन लिमिटेड के 34 मर्चेंट पूल खातों में चले गए। पुलिस ने इन खातों को फ्रीज कर दिया था। सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी ने पैसे जारी करने के लिए आवेदन किया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, किन्नौर ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को इन खातों से 7,53,497 रुपये सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी को जारी करने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ वन 97 कम्युनिकेशन लिमिटेड ने पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। वन 97 कम्युनिकेशन लिमिटेड ने अपनी याचिका में कहा कि 7,53,497 रुपये उसके 34 फ्रीज किए गए मर्चेंट पूल खातों में थे। कंपनी ने तर्क दिया कि ये खाते ऑनलाइन खरीद के लिए विभिन्न उपयोगकर्ताओं से राशि एकत्रित करने के लिए बैंक की ओर से उपयोग किए जाते हैं। कंपनी ने खुद को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (आईटी अधिनियम) की धारा 79 के तहत एक मध्यस्थ बताया। कंपनी ने कहा कि वह तीसरे पक्ष की जानकारी या डेटा के लिए उत्तरदायी नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा कि उसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बारे में सूचित नहीं किया गया था। सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी के वकील ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पेटीएम ने अदालत के समक्ष सभी तथ्य पेश नहीं किए हैं। वकील ने तर्क दिया कि आईटी अधिनियम की धारा 79(3) के तहत मध्यस्थ कंपनी अवैध कार्य में शामिल होने पर उत्तरदायी होती है। राज्य के वकील ने भी कहा कि पेटीएम को सेटलमेंट रिपोर्ट देनी चाहिए। इससे मुख्य अपराधी का पता लगाने में मदद मिलेगी। सत्र न्यायाधीश की अदालत ने पाया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश पेटीएम को सुने बिना पारित किया गया था। अदालत ने वन 97 कम्युनिकेशन लिमिटेड को ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया। कंपनी को सेटलमेंट रिपोर्ट और लाभार्थियों के नाम-पते भी पेश करने होंगे। भारतीय स्टेट बैंक को भी मामले में एक पक्ष के रूप में शामिल किया जाएगा। अमर सिंह को जारी की गई 7,53,497 रुपये की राशि अंतिम निर्णय तक उनसे वापस नहीं ली जाएगी।