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Rampur Bushahar News: हड़ताल से पंचायतों के विकास कार्यों पर लगा विराम
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बोले, जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, वह काम नहीं लौटेंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहडू। जिला परिषद कर्मचारियों के अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाने से पंचायतों में विकास कार्यों पर विराम लग गया है। कर्मचारियों के समर्थन के लिए अब पंचायतों के प्रधान, उप प्रधान, बीडीसी सदस्य, वार्ड सदस्य भी हड़ताल में शामिल हो रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधियों ने उनकी इकलौती मांग को जायज ठहराते हुए सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का सरकार से आग्रह किया है।
महासंघ रोहड़ू खंड के अध्यक्ष नरेंद्र हिरवानी ने बताया कि विभाग में कर्मचारियों के न होने के कारण हमें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनको सरकार के वित्तीय और अन्य लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है, जबकि 24 वर्षों से लगातार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सभी कार्य बखूबी निभा रहे हैं। ग्रामीण विकास विभाग में योजनाओं में कार्यरत कर्मचारियों तक को विभाग में लिया गया। इस कारण कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है। बार-बार सरकार से आग्रह के बाद उनको पूरे हिमाचल में हड़ताल के लिए मजबूर होना पड़ा है।
उन्होंने कहा एक विभाग में सम्मान कार्य करने वाले कर्मचारियों पर दोहरा मापदंड अपनाया है, जब वित्तीय लाभ देने की बात सामने आती तो उनको सरकार और विभाग अपना कर्मचारी मानने से इंकार किया जा रहा है। उन्होंन ने कहा कि सरकार बनाने से पूर्व इस विसंगति को वर्तमान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पूर्ण करने का आश्वासन दिया था। जिला परिषद कर्मचारी महासंघ की हड़ताल में शामिल बराल पंचायत के प्रधान गोपाल पांजटा ने बताया कि पंचायती राज के तहत ग्रामीण विकास में अहम भूमिका निभाने वाले इन कर्मचारियों की मांग जायज है। इन कर्मचारियों की मांग पर आश्वासन देकर वापस काम पर जाने को कहा गया। उसके बाद उनके साथ न्याय नहीं हुआ। अब पंचायतों में होने वाले विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार जिला परिषद कैडर के समस्त कर्मचारियों और अधिकारियों को ग्रामीण विकास या पंचायतीराज विभाग में विलय संबंधी मांग को पूरा करे। उन्होंने कहा कि मांग पूरी नहीं हुई तो उनकी हड़ताल लगातार जारी रहेगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहडू। जिला परिषद कर्मचारियों के अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाने से पंचायतों में विकास कार्यों पर विराम लग गया है। कर्मचारियों के समर्थन के लिए अब पंचायतों के प्रधान, उप प्रधान, बीडीसी सदस्य, वार्ड सदस्य भी हड़ताल में शामिल हो रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधियों ने उनकी इकलौती मांग को जायज ठहराते हुए सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का सरकार से आग्रह किया है।
महासंघ रोहड़ू खंड के अध्यक्ष नरेंद्र हिरवानी ने बताया कि विभाग में कर्मचारियों के न होने के कारण हमें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनको सरकार के वित्तीय और अन्य लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है, जबकि 24 वर्षों से लगातार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सभी कार्य बखूबी निभा रहे हैं। ग्रामीण विकास विभाग में योजनाओं में कार्यरत कर्मचारियों तक को विभाग में लिया गया। इस कारण कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है। बार-बार सरकार से आग्रह के बाद उनको पूरे हिमाचल में हड़ताल के लिए मजबूर होना पड़ा है।
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उन्होंने कहा एक विभाग में सम्मान कार्य करने वाले कर्मचारियों पर दोहरा मापदंड अपनाया है, जब वित्तीय लाभ देने की बात सामने आती तो उनको सरकार और विभाग अपना कर्मचारी मानने से इंकार किया जा रहा है। उन्होंन ने कहा कि सरकार बनाने से पूर्व इस विसंगति को वर्तमान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पूर्ण करने का आश्वासन दिया था। जिला परिषद कर्मचारी महासंघ की हड़ताल में शामिल बराल पंचायत के प्रधान गोपाल पांजटा ने बताया कि पंचायती राज के तहत ग्रामीण विकास में अहम भूमिका निभाने वाले इन कर्मचारियों की मांग जायज है। इन कर्मचारियों की मांग पर आश्वासन देकर वापस काम पर जाने को कहा गया। उसके बाद उनके साथ न्याय नहीं हुआ। अब पंचायतों में होने वाले विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार जिला परिषद कैडर के समस्त कर्मचारियों और अधिकारियों को ग्रामीण विकास या पंचायतीराज विभाग में विलय संबंधी मांग को पूरा करे। उन्होंने कहा कि मांग पूरी नहीं हुई तो उनकी हड़ताल लगातार जारी रहेगी।
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