{"_id":"6318d3b69363490656119b1b","slug":"palu-re-jatre-started-in-rohru-rampur-hp-news-sml420945378","type":"story","status":"publish","title_hn":"रोहल मे देवता पवासी की पालु री जातरे शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रोहल मे देवता पवासी की पालु री जातरे शुरू
विज्ञापन
रोहल के भादो मेले में उपस्थित ग्रामीण व देवता
- फोटो : RAMPUR-HP
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रोहडू़। दूरदराज पंचायत रोहल में देवता महाराज पवासी का पारंपरिक भादो मेला (पालु री जातरे)
का बुधवार को दैविक परंपराओं के साथ आगाज हुआ। इस दौरान स्थानीय देवता विष्णु नारायण ने शिरकत कर लोगों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद दिया। मेले के पहले दिन स्थानीय ग्रामीणों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर जमकर झूमे। मेले की शुरूआत फुवालों के मेले से हुई। पहले दिन दोपहर के बाद स्थानीय फुवालों (भेड़ पालक) ने कुल देवता पर पवित्र फूल मालाओं को अर्पित किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि देवता को चढ़ाए जाने वाले इन फूलों करीब 11,000 फीट की ऊंचाई से लाया जाता है।
इस दौरान फूलों को तोड़ते वाले को व्रत करना पड़ता है। इसमें ब्रह्मकमल (डोडा), नेसर और सुपाली किस्म के दुर्लभ फूल शामिल हैं। यहां से फूलों को लाने के बाद माला बनाई जाती है। परंपरा के मुताबिक मेले के पहले दिन स्थानीय फुवाल कुल देवता के समक्ष पूरे सालभर की दुख और तकलीफों को भी बताते हैं। देवता पवासी के मोतमीन कैलाश मेहता ने बताया की भादो मेला आरंभ हो गया है। मेले में क्षेत्र की आसपास की पंचायतों के सैकड़ों लोगों ने शिरकत कर देवता का आशीर्वाद प्राप्त किया।
विज्ञापन
का बुधवार को दैविक परंपराओं के साथ आगाज हुआ। इस दौरान स्थानीय देवता विष्णु नारायण ने शिरकत कर लोगों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद दिया। मेले के पहले दिन स्थानीय ग्रामीणों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर जमकर झूमे। मेले की शुरूआत फुवालों के मेले से हुई। पहले दिन दोपहर के बाद स्थानीय फुवालों (भेड़ पालक) ने कुल देवता पर पवित्र फूल मालाओं को अर्पित किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि देवता को चढ़ाए जाने वाले इन फूलों करीब 11,000 फीट की ऊंचाई से लाया जाता है।
इस दौरान फूलों को तोड़ते वाले को व्रत करना पड़ता है। इसमें ब्रह्मकमल (डोडा), नेसर और सुपाली किस्म के दुर्लभ फूल शामिल हैं। यहां से फूलों को लाने के बाद माला बनाई जाती है। परंपरा के मुताबिक मेले के पहले दिन स्थानीय फुवाल कुल देवता के समक्ष पूरे सालभर की दुख और तकलीफों को भी बताते हैं। देवता पवासी के मोतमीन कैलाश मेहता ने बताया की भादो मेला आरंभ हो गया है। मेले में क्षेत्र की आसपास की पंचायतों के सैकड़ों लोगों ने शिरकत कर देवता का आशीर्वाद प्राप्त किया।
विज्ञापन