फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   operetion stop in kheneri hospital due to doctor call for departmentel inquery

खनेरी अस्पताल में डॉक्टर पर विभागीय जांच, मुश्किल में मरीजों की जान

Tue, 31 Aug 2021 10:47 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 31 Aug 2021 10:47 PM IST
विज्ञापन
रामपुर बुशहर। प्रदेश के चार जिलों के हजारों लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने वाले महात्मा गांधी खनेरी अस्पताल के एकमात्र एनेस्थीसिया डॉक्टर पर विभागीय जांच बैठने से मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई है।
विज्ञापन

डॉक्टर के जांच के लिए शिमला बुलाए जाने से अस्पताल में होने वाली सभी ऑपरेशन लटक गए हैं तो वहीं मरीजों को मजबूर आईजीएमसी रेफर किया जा रहा है। इससे सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को पेश आ रही है। सीजेरियन ऑपरेशन की स्थिति में उन्हें एनेस्थीसिया की सुविधा नहीं होने पर आईजीएमसी शिमला भेजा जा रहा है।
विज्ञापन

जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले समय ऑपरेशन नहीं होने से महिला मरीज की मौत हो गई थी। उस समय भी एनेस्थीसिया डॉक्टर के इंतजार में मरीज घंटों अस्पताल में दर्द से कराहती रही। देर शाम एनेस्थीसिया डॉक्टर के पहुंचने पर मरीज का ऑपरेशन भी किया गया मगर उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसको लेकर बार एसोसिएशन की शिकायत पर पुलिस ने अस्पताल के डॉक्टरों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है। वहीं मामले की विभाग ने विभागीय जांच भी बैठाई है। इसी जांच के लिए डॉक्टर को शिमला बुलाया गया है। ऐसे में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को मजबूरन शिमला रेफर किया जा रहा है। इसमें अधिकतर गर्भवती महिलाएं शामिल हैं।
अस्पताल में हर रोज एक हजार की ओपीडी
खनेरी अस्पताल चार जिलों का सबसे बड़ा अस्पताल है। यहां शिमला, किन्नौर, कुल्लू और मंडी जिला से मरीज उपचार के लिए आते हैं। यही वजह है कि यहां हर रोज की ओपीडी एक हजार से अधिक है। हैरानी इस बात की है कि चार जिलों का मुख्य अस्पताल होने के बावजूद यहां सरकार ने एकमात्र एनेस्थीसिया डॉक्टर की नियुक्ति की है। ऐसे में डॉक्टर के अवकाश पर जाने से ऑपरेशन पूरी तरह से टल जाते हैं।
सौ किलोमीटर दूर है आईजीएमसी
खनेरी अस्पताल में आपातकालीन परिस्थिति में ऑपरेशन नहीं होने पर मरीज की जान पर बन आती है। इसकी वजह यह है कि यहां से आईजीएमसी शिमला की दूरी करीब 100 किलोमीटर है। ऐसे में मरीज को यहां पहुंचाने में चार घंटे लग जाते हैं। ऐसी परिस्थिति में कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ जाते हैं। इसको देखते हुए सरकार को यहां पर्याप्त संख्या में एनेस्थीसिया डॉक्टर की तैनाती करनी चाहिए।

खनेरी अस्पताल के महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश ने बताया कि अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के ऑपरेशन होने हैं लेकिन बिना एनेस्थीसिया डॉक्टर के ऑपरेशन करना संभव नहीं है। ऐसे में मरीजों को शिमला रेफर करने के सिवाय उनके पास कोई विकल्प नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed