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Rampur Bushahar News: सेब सीजन के लिए महत्वपूर्ण सड़क पर सफर खतरनाक
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नेरवा- मिनस-विकासनगर सड़क कई जगह क्षतिग्रस्त, नहीं लगे पैरापिट और क्रैश बैरियर
नेरवा (रोहड़ू)। पड़ोसी राज्य उत्तराखंड से गुजरने वाले नेरवा-मिनस-विकासनगर मार्ग पर सेब और टमाटर सीजन के दौरान हर साल वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। एक साल में कई लोग मौत को शिकार हो रहे। बुधवार सुबह छह बजे नेरवा तहसील के केदी पंचायत से सेब लेकर सहारनपुर गई एक पिकअप वापसी में मिनस से लगभग नौ किलोमीटर पहले टौंस नदी में समा गई। पिकअप में सवार एक व्यक्ति भाग्यवश छिटक कर ढांक में अटक गया, जिससे उसकी जान बच गई। दूसरा गाड़ी समेत टौंस नदी में जा गिरा। दुर्घटना स्थल पर कोई भी पैरापिट और क्रैश बैरियर नहीं लगा था। इस मार्ग से सेब व टमाटर सीजन के दौरान उत्तराखंड से अधिक हिमाचल के वाहन गुजरते हैं। चौपाल विधानसभा क्षेत्र के नेरवा, चौपाल, कुपवी के अतिरिक्त जुब्बल और रोहड़ू क्षेत्र से फसलों के वाहन इसी मार्ग से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान की मंडियों में भेजे जाते हैं। इसके बावजूद यह मार्ग उत्तराखंड सरकार की बेरुखी का शिकार है।प्रशासन ने इस मार्ग पर बढ़ते हादसों को रोकने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए हैं। इस वर्ष भारी बारिश के चलते यह मार्ग कई जगह भूस्खलन होने से क्षतिग्रस्त हो गया है। कई स्थानों पर बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। कई जगह गहरे गड्ढे हैं। उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग ने यहां पर्याप्त मशीनरी भी नहीं तैनात नहीं की है और न ही दुर्घटना संभावित स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए हैं। अधिकांश ब्लैक स्पॉट पर क्रैश बैरियर और पैराफिट नहीं हैं। दो वर्ष पूर्व सरकार ने इसकी मैटलिंग करनी शुरू की थी, जो आज तक पूरी नहीं हो पाई है।
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नेरवा (रोहड़ू)। पड़ोसी राज्य उत्तराखंड से गुजरने वाले नेरवा-मिनस-विकासनगर मार्ग पर सेब और टमाटर सीजन के दौरान हर साल वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। एक साल में कई लोग मौत को शिकार हो रहे। बुधवार सुबह छह बजे नेरवा तहसील के केदी पंचायत से सेब लेकर सहारनपुर गई एक पिकअप वापसी में मिनस से लगभग नौ किलोमीटर पहले टौंस नदी में समा गई। पिकअप में सवार एक व्यक्ति भाग्यवश छिटक कर ढांक में अटक गया, जिससे उसकी जान बच गई। दूसरा गाड़ी समेत टौंस नदी में जा गिरा। दुर्घटना स्थल पर कोई भी पैरापिट और क्रैश बैरियर नहीं लगा था। इस मार्ग से सेब व टमाटर सीजन के दौरान उत्तराखंड से अधिक हिमाचल के वाहन गुजरते हैं। चौपाल विधानसभा क्षेत्र के नेरवा, चौपाल, कुपवी के अतिरिक्त जुब्बल और रोहड़ू क्षेत्र से फसलों के वाहन इसी मार्ग से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान की मंडियों में भेजे जाते हैं। इसके बावजूद यह मार्ग उत्तराखंड सरकार की बेरुखी का शिकार है।प्रशासन ने इस मार्ग पर बढ़ते हादसों को रोकने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए हैं। इस वर्ष भारी बारिश के चलते यह मार्ग कई जगह भूस्खलन होने से क्षतिग्रस्त हो गया है। कई स्थानों पर बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। कई जगह गहरे गड्ढे हैं। उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग ने यहां पर्याप्त मशीनरी भी नहीं तैनात नहीं की है और न ही दुर्घटना संभावित स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए हैं। अधिकांश ब्लैक स्पॉट पर क्रैश बैरियर और पैराफिट नहीं हैं। दो वर्ष पूर्व सरकार ने इसकी मैटलिंग करनी शुरू की थी, जो आज तक पूरी नहीं हो पाई है।