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बखनाओ पंचायत से कटे वार्ड के लोगों ने किया आनी नगर पंचायत में जुडने का विरोध
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आनी (कुल्लू)। उपमंडल की बखनाओ पंचायत के वार्ड ठोगी, शमेशा और रोपड़ी के लोगों ने वार्डों को आनी नगर पंचायत में समायोजित करने का कड़ा विरोध किया है। लोगों का कहना है कि नगर पंचायत में जुड़ने के बाद ग्रामीणों के हित खत्म हो जाएंगे। आनी को नगर पंचायत के बजाय सदर पंचायत का दर्जा प्रदान किया जाए।
वार्ड के युवक मंडल अध्यक्ष तिलकराज शर्मा, ज्ञान चंद, ग्रामीण सुरेश कुमार, डोला राम, संजय कुमार, लाल चंद, रणवीर सिंह, राम कृष्ण, कमली देवी, संतोष कुमार, प्रकाश चंद, राजेंद्र सिंह, हेमराज, धर्म पाल, कुक्कू आर्यन और दलीप कुमार सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि वे ग्रामीण परिवेश से जुड़े लोग हैं और मनरेगा और खेतीबाड़ी से अपना जीवन यापन कर रहे हैं। जबकि, नगर पंचायत में जुड़ने पर जहां उन्हें मनरेगा रोजगार से वंचित रहना पड़ेगा, वहीं पिछड़े क्षेत्र से संबंधित अन्य लाभों से भी हाथ धोना पड़ेगा। ग्रामीणों ने कहा कि नगर पंचायत में जुड़ने का उन्हें कोई लाभ नहीं है, उल्टा उन्हें भारी भरकम टैक्स अदा करना होगा, जिसे अदा करने में वे असमर्थ होंगे। आनी को नगर पंचायत बनाने के बजाय सरकार इसे एक स्वतंत्र सदर पंचायत बनाए। वर्तमान में आनी कस्बा चार-पांच पंचायतों के अधिकार क्षेत्र में आता है, जिससे आनी का समुचित विकास नहीं हो पा रहा है। सरकार ने पूर्व में जिन पंचायतों को नगर पंचायत का दर्जा दिया है, वहां बीते कई सालों से सुविधाओं का अभाव है। वहां के लोग आज भी अनावश्यक टैक्स की मार और असुविधाओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में सरकार गंभीरता से इस पर विचार करे।
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वार्ड के युवक मंडल अध्यक्ष तिलकराज शर्मा, ज्ञान चंद, ग्रामीण सुरेश कुमार, डोला राम, संजय कुमार, लाल चंद, रणवीर सिंह, राम कृष्ण, कमली देवी, संतोष कुमार, प्रकाश चंद, राजेंद्र सिंह, हेमराज, धर्म पाल, कुक्कू आर्यन और दलीप कुमार सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि वे ग्रामीण परिवेश से जुड़े लोग हैं और मनरेगा और खेतीबाड़ी से अपना जीवन यापन कर रहे हैं। जबकि, नगर पंचायत में जुड़ने पर जहां उन्हें मनरेगा रोजगार से वंचित रहना पड़ेगा, वहीं पिछड़े क्षेत्र से संबंधित अन्य लाभों से भी हाथ धोना पड़ेगा। ग्रामीणों ने कहा कि नगर पंचायत में जुड़ने का उन्हें कोई लाभ नहीं है, उल्टा उन्हें भारी भरकम टैक्स अदा करना होगा, जिसे अदा करने में वे असमर्थ होंगे। आनी को नगर पंचायत बनाने के बजाय सरकार इसे एक स्वतंत्र सदर पंचायत बनाए। वर्तमान में आनी कस्बा चार-पांच पंचायतों के अधिकार क्षेत्र में आता है, जिससे आनी का समुचित विकास नहीं हो पा रहा है। सरकार ने पूर्व में जिन पंचायतों को नगर पंचायत का दर्जा दिया है, वहां बीते कई सालों से सुविधाओं का अभाव है। वहां के लोग आज भी अनावश्यक टैक्स की मार और असुविधाओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में सरकार गंभीरता से इस पर विचार करे।
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