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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   Mite infestation rises in apple orchards; quality and production at risk.

Rampur Bushahar News: सेब के बगीचों में माइट का प्रकोप बढ़ा, गुणवत्ता और उत्पादन खतरे में

Sat, 04 Jul 2026 11:26 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jul 2026 11:26 PM IST
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गर्म मौसम बना माइट के लिए अनुकूल, सेब उत्पादकों को सतर्क रहने की सलाह
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पत्तियों से रस चूसकर फल के आकार, रंग और गुणवत्ता पर डालता है असर
नियमित निरीक्षण, नमी बनाए रखने और संतुलित उर्वरक के उपयोग की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। प्रदेश के ऊपरी क्षेत्रों में बारिश के साथ बढ़ते तापमान के कारण सेब के बगीचों में माइट का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। बागवानी विशेषज्ञों ने इसको लेकर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि यदि समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया तो यह सेब की फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर गंभीर असर डाल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्म मौसम माइट के तेजी से फैलने के लिए सबसे अनुकूल होता है। मादा माइट प्रतिदिन कई अंडे देती है। अनुकूल तापमान में ये अंडे लगभग 24 घंटे के भीतर विकसित होना शुरू हो जाते हैं। पांच से सात दिनों में उनसे नए माइट निकल आते हैं। इसी कारण इनकी संख्या बहुत कम समय में कई गुना बढ़ जाती है। इससे पूरे बगीचे में संक्रमण फैल सकता है। माइट पत्तियों की निचली सतह से रस चूसता है। इससे पत्तियों पर पीले या भूरे धब्बे बनने लगते हैं। धीरे-धीरे पत्तियां कांस्य रंग की होकर सूखने लगती हैं। वे समय से पहले झड़ जाती हैं।
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इससे प्रकाश संश्लेषण प्रभावित होता है। फल का आकार छोटा रह जाता है। फल का रंग और गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। अगले वर्ष की फसल भी इससे प्रभावित हो सकती है। बागवानी विशेषज्ञ उषा शर्मा ने बागवानों को नियमित रूप से पत्तियों का निरीक्षण करने की सलाह दी है। शुरुआती अवस्था में प्रभावित पत्तियों को हटाना, बगीचे में नमी बनाए रखना और अनावश्यक धूल जमने से बचाव महत्वपूर्ण है। संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें और एक ही कीटनाशक का लगातार उपयोग न करें, जिससे माइट में प्रतिरोधक क्षमता विकसित न हो। बागवानी विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, माइट का प्रकोप दिखने पर पंजीकृत एकारिसाइड (माइटनाशी) का छिड़काव करें। दवा का चयन और मात्रा स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बागवानी अधिकारी की सलाह से तय करें।
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