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Rampur Bushahar News: किसानों की जमीन बेखदली को लेकर अध्यादेश लाए सरकार
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ठियोग में एसडीएम के माध्यम से सरकार को भेजा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)। वन विभाग की ओर से प्रदेश में किसानों की जमीनों से बेदखली रोकने और सरकार से इस बारे में अध्यादेश लाने की मांग को लेकर हिमाचल प्रदेश सेब उत्पादक संघ ने एसडीएम के जरिये मुख्यमंत्री को मंगलवार को ज्ञापन भेजा। संघ के प्रदेश अध्यक्ष सोहन ठाकुर की अगुवाई में दिए ज्ञापन में संघ ने मांग की है कि हिमाचल उच्च न्यायालय में पूनम गुप्ता एवं अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य वाली रिट याचिका में अंतिम आदेश आने तक बेदखली की कार्रवाई रोकी जाए। संघ ने संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन एवं स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों के तहत सरकार से अध्यादेश लाकर करवाई स्थगित करने की भी मांग की है। संघ ने कहा है कि 25 फरवरी, 1952 की अधिसूचना में सभी प्रकार की बंजर भूमि को वन के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जो कि अस्थायी प्रावधान था। इसके अलावा बेकार और बंजर भूमि को 1927 के वन अधिनियम और 1980 के वन संरक्षण अधिनियम में परिभाषित नहीं किया गया है, इसलिए इसे भारत के संविधान के अधिकार क्षेत्र से बाहर घोषित किया जाए और जब तक ऐसा नहीं होता है, तब तक सभी प्रकार की बेदखलियां रोकी जाएं। संघ ने प्रदेश के सभी किसानों को कम से कम पांच बीघा कृषि जमीन देने और उसे नियमित करने, सभी भूमिहीनों को ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में क्रमश: दो और तीन बिस्वा जमीन देने, सड़क किनारे स्टॉल लगाकर रोजी कमा रहे लोगों को बेदखल न करने सहित अन्य मांगें मुख्यमंत्री से पूरी करने की गुहार लगाई है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)। वन विभाग की ओर से प्रदेश में किसानों की जमीनों से बेदखली रोकने और सरकार से इस बारे में अध्यादेश लाने की मांग को लेकर हिमाचल प्रदेश सेब उत्पादक संघ ने एसडीएम के जरिये मुख्यमंत्री को मंगलवार को ज्ञापन भेजा। संघ के प्रदेश अध्यक्ष सोहन ठाकुर की अगुवाई में दिए ज्ञापन में संघ ने मांग की है कि हिमाचल उच्च न्यायालय में पूनम गुप्ता एवं अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य वाली रिट याचिका में अंतिम आदेश आने तक बेदखली की कार्रवाई रोकी जाए। संघ ने संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन एवं स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों के तहत सरकार से अध्यादेश लाकर करवाई स्थगित करने की भी मांग की है। संघ ने कहा है कि 25 फरवरी, 1952 की अधिसूचना में सभी प्रकार की बंजर भूमि को वन के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जो कि अस्थायी प्रावधान था। इसके अलावा बेकार और बंजर भूमि को 1927 के वन अधिनियम और 1980 के वन संरक्षण अधिनियम में परिभाषित नहीं किया गया है, इसलिए इसे भारत के संविधान के अधिकार क्षेत्र से बाहर घोषित किया जाए और जब तक ऐसा नहीं होता है, तब तक सभी प्रकार की बेदखलियां रोकी जाएं। संघ ने प्रदेश के सभी किसानों को कम से कम पांच बीघा कृषि जमीन देने और उसे नियमित करने, सभी भूमिहीनों को ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में क्रमश: दो और तीन बिस्वा जमीन देने, सड़क किनारे स्टॉल लगाकर रोजी कमा रहे लोगों को बेदखल न करने सहित अन्य मांगें मुख्यमंत्री से पूरी करने की गुहार लगाई है।