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Rampur Bushahar News: शालवी नदी को प्रदूषण मुक्त करने और मूल स्वरूप में लाने पर मंथन
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26 करोड़ की सीवरेज योजना का मामला भी उठा
संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा (रोहड़ू)। सिटीजन फोरम नेरवा ने शालवी रिवर पार्क में शालवी की धारा नेरवा का अस्तित्व, भविष्य हमारा विषय पर गोष्ठी आयोजित की। इस गोष्ठी में शालवी नदी को प्रदूषण मुक्त करने और उसके मूल स्वरूप में लाने पर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने नदी के प्रदूषण के कारणों और समाधानों पर अपने विचार साझा किए।
गोष्ठी के आयोजक हिमाद्री पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल महेंद्र खागटा ने बताया कि नेरवा व चौपाल के लिए 26 करोड़ रुपये की सीवरेज योजना को प्रदेश सरकार से पांच साल पहले मंजूरी मिली थी। बजट न मिलने के कारण यह योजना लंबित है। उन्होंने सरकार से इस योजना के लिए बजट का प्रावधान करने की गुहार लगाई। योजना के क्रियान्वित होने से नदी के प्रदूषण में अत्यधिक कमी आएगी। शहीद श्याम सिंह सीबीएसई वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नेरवा के उप प्रधानाचार्य कमल भिखटा ने बढ़ती व्यावसायिक खेती को प्रदूषण का मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि कीटनाशकों का एक बड़ा हिस्सा बहकर नदी में पहुंच जाता है। राजकीय महाविद्यालय नेरवा में सहायक प्रोफेसर अंग्रेजी अरुण दफ़राइक ने नदी का जलग्रहण क्षेत्र संरक्षित करने और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि शालवी के बिना नेरवा का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
फ्रेंड्स क्लब नेरवा के प्रवक्ता आशु परसाइक ने कहा कि केवल शालवी ही नहीं, बल्कि इसमें मिलने वाले नदी-नालों को भी साफ रखना पड़ेगा। उन्होंने नदी-नालों को कचरा डालने का स्थान बनाने पर कड़ाई से रोक लगाने की मांग की। नदी किनारे घराट चलाने वाले तीसा राम ने बताया कि कई लोग रात के अंधेरे में कूड़ा झाड़ियों में फेंक जाते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता बताई। दीपक सूद ने कहा कि नदी स्वयं प्रदूषित नहीं होती, उसे मनुष्य प्रदूषित करते हैं।
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डीडी जन्सटा ने बताया कि घर-घर शौचालय बनने और बीते पांच वर्षों में नगर पंचायत नेरवा की ओर से घर-घर से कूड़ा एकत्रित करने से प्रदूषण में भारी कमी आई है। गोष्ठी में नदी किनारे एक सफाई अभियान चलाने और पौधरोपण कार्यक्रम चलाने की भी प्रतिबद्धता जताई गई। शालवी नदी कुपड़ कुंड से निकलती है, जहां से गिरि गंगा का भी उद्गम होता है। गिरि गंगा जुब्बल की ओर और शालवी नेरवा की ओर बहती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा (रोहड़ू)। सिटीजन फोरम नेरवा ने शालवी रिवर पार्क में शालवी की धारा नेरवा का अस्तित्व, भविष्य हमारा विषय पर गोष्ठी आयोजित की। इस गोष्ठी में शालवी नदी को प्रदूषण मुक्त करने और उसके मूल स्वरूप में लाने पर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने नदी के प्रदूषण के कारणों और समाधानों पर अपने विचार साझा किए।
गोष्ठी के आयोजक हिमाद्री पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल महेंद्र खागटा ने बताया कि नेरवा व चौपाल के लिए 26 करोड़ रुपये की सीवरेज योजना को प्रदेश सरकार से पांच साल पहले मंजूरी मिली थी। बजट न मिलने के कारण यह योजना लंबित है। उन्होंने सरकार से इस योजना के लिए बजट का प्रावधान करने की गुहार लगाई। योजना के क्रियान्वित होने से नदी के प्रदूषण में अत्यधिक कमी आएगी। शहीद श्याम सिंह सीबीएसई वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नेरवा के उप प्रधानाचार्य कमल भिखटा ने बढ़ती व्यावसायिक खेती को प्रदूषण का मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि कीटनाशकों का एक बड़ा हिस्सा बहकर नदी में पहुंच जाता है। राजकीय महाविद्यालय नेरवा में सहायक प्रोफेसर अंग्रेजी अरुण दफ़राइक ने नदी का जलग्रहण क्षेत्र संरक्षित करने और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि शालवी के बिना नेरवा का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
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फ्रेंड्स क्लब नेरवा के प्रवक्ता आशु परसाइक ने कहा कि केवल शालवी ही नहीं, बल्कि इसमें मिलने वाले नदी-नालों को भी साफ रखना पड़ेगा। उन्होंने नदी-नालों को कचरा डालने का स्थान बनाने पर कड़ाई से रोक लगाने की मांग की। नदी किनारे घराट चलाने वाले तीसा राम ने बताया कि कई लोग रात के अंधेरे में कूड़ा झाड़ियों में फेंक जाते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता बताई। दीपक सूद ने कहा कि नदी स्वयं प्रदूषित नहीं होती, उसे मनुष्य प्रदूषित करते हैं।
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डीडी जन्सटा ने बताया कि घर-घर शौचालय बनने और बीते पांच वर्षों में नगर पंचायत नेरवा की ओर से घर-घर से कूड़ा एकत्रित करने से प्रदूषण में भारी कमी आई है। गोष्ठी में नदी किनारे एक सफाई अभियान चलाने और पौधरोपण कार्यक्रम चलाने की भी प्रतिबद्धता जताई गई। शालवी नदी कुपड़ कुंड से निकलती है, जहां से गिरि गंगा का भी उद्गम होता है। गिरि गंगा जुब्बल की ओर और शालवी नेरवा की ओर बहती है।