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Rampur Bushahar News: शीर्ष भारतीय पर्वतारोहण पुरस्कार से सम्मानित हुए स्व. एससी नेगी
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56 वर्ष में माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने वाले सबसे उम्रदराज भारतीय बने थे नेगी
सर्वोच्च रैंक वाले सशस्त्र बल अधिकारी के रूप बनाया था अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। किन्नौर जिले के नेसंग गांव से संबंध रखने वाले मशहूर पर्वतारोही स्व. शरब चंदूब नेगी बीएसएफ से बतौर उप महानिरीक्षक (डीआईजी) सेवानिवृत्त को मरणोपरांत शीर्ष भारतीय पर्वतारोहण पुरस्कार मिला है। नेगी की धर्मपत्नी को पर्वतारोहण फाउंडेशन (आईएमएफ) ने असाधारण प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित नैन सिंह-किशन सिंह लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया है। पर्वतारोहण के क्षेत्र में नेगी का योगदान सराहनीय रहा है। शरब चंदूब की 29 सितंबर, 2020 को किन्नौर जिले में मृत्यु हो गई, जब वे स्वेच्छा से चीन सीमा के लिए एक छोटा रास्ता खोजने के लिए एक टोही मिशन का नेतृत्व कर रहे थे।
गौर हो कि 56 साल की उम्र में नेगी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले सबसे उम्रदराज भारतीय बन गए थे। यही नहीं इस उपलब्धि को हासिल करने वाले सर्वोच्च रैंक वाले सशस्त्र बल अधिकारी के रूप में उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया। भारत में पर्वतारोहण और साहसिक गतिविधियों में योगदान और पर्वतारोहण पाठ्यक्रमों में बुनियादी प्रशिक्षण के लिए नेगी को जाना जाएगा। उनके अभियान उन्हें दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों तक ले गए और कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में उनके लचीलेपन और नेतृत्व का प्रदर्शन किया। इन वर्षों में उन्होंने कई अभियानों का नेतृत्व किया और उनमें भाग लिया। विशेष रूप से 2006 में बीएसएफ अभियान के हिस्से के रूप में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की।
33 साल सेना में दी सेवाएं
नेगी के अन्य उल्लेखनीय अभियानों में 1996 में माउंट सासेर कांगड़ी-प्ट, 2005 में माउंट सतोपंथ और माउंट चंद्र भागा शृंखला (1994) शामिल हैं। नेगी ने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान बीएसएफ बटालियन की कमान भी संभाली थी। 33 साल की सेवा के बाद वह 2010 में सेवानिवृत्त हुए। अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों से परे नेगी ने पर्वतारोहण समुदाय में, विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश और अन्य आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं को प्रशिक्षण और प्रेरित करने में अमूल्य योगदान दिया। 2012 से 2020 तक हिमाचल प्रदेश एवरेस्ट एसोसिएशन (एचपीईए) के सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहने वाले नेगी ने क्षेत्र में पर्वतारोहण और साहसिक खेलों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नेगी आपदा प्रबंधन और पर्वतारोहण में युवाओं के प्रशिक्षण के भी कट्टर समर्थक थे। 2012 और 2020 के बीच उन्होंने हिपा, शिमला के सहयोग से किन्नौर के युवाओं के लिए आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण और पर्वतीय बचाव, प्राथमिक चिकित्सा और अग्निशमन प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने सहित कई पहलों का समन्वय किया।
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2006 में हासिल की दुर्लभ उपलब्धि
2006 में नेगी ने एक और दुर्लभ उपलब्धि हासिल की, जब बीएसएफ एवरेस्ट अभियान के दौरान उन्होंने 23520 फीट की ऊंचाई से तीन पर्वतारोहियों को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह महत्वपूर्ण क्षण उनके साहस और नेतृत्व का उदाहरण था। शरब चंदूब नेगी के निधन से पर्वतारोहण समुदाय में एक खालीपन आ गया है, लेकिन उनकी विरासत साहसी लोगों और नई पीढि़यों को प्रेरित करती रहेगी। आईएमएफ के लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड के साथ उनकी मरणोपरांत मान्यता उनके साहसिक जीवन, नेतृत्व और पर्वतारोहण के प्रति समर्पण के असाधारण जीवन का प्रमाण है।
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सर्वोच्च रैंक वाले सशस्त्र बल अधिकारी के रूप बनाया था अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। किन्नौर जिले के नेसंग गांव से संबंध रखने वाले मशहूर पर्वतारोही स्व. शरब चंदूब नेगी बीएसएफ से बतौर उप महानिरीक्षक (डीआईजी) सेवानिवृत्त को मरणोपरांत शीर्ष भारतीय पर्वतारोहण पुरस्कार मिला है। नेगी की धर्मपत्नी को पर्वतारोहण फाउंडेशन (आईएमएफ) ने असाधारण प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित नैन सिंह-किशन सिंह लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया है। पर्वतारोहण के क्षेत्र में नेगी का योगदान सराहनीय रहा है। शरब चंदूब की 29 सितंबर, 2020 को किन्नौर जिले में मृत्यु हो गई, जब वे स्वेच्छा से चीन सीमा के लिए एक छोटा रास्ता खोजने के लिए एक टोही मिशन का नेतृत्व कर रहे थे।
गौर हो कि 56 साल की उम्र में नेगी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले सबसे उम्रदराज भारतीय बन गए थे। यही नहीं इस उपलब्धि को हासिल करने वाले सर्वोच्च रैंक वाले सशस्त्र बल अधिकारी के रूप में उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया। भारत में पर्वतारोहण और साहसिक गतिविधियों में योगदान और पर्वतारोहण पाठ्यक्रमों में बुनियादी प्रशिक्षण के लिए नेगी को जाना जाएगा। उनके अभियान उन्हें दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों तक ले गए और कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में उनके लचीलेपन और नेतृत्व का प्रदर्शन किया। इन वर्षों में उन्होंने कई अभियानों का नेतृत्व किया और उनमें भाग लिया। विशेष रूप से 2006 में बीएसएफ अभियान के हिस्से के रूप में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की।
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33 साल सेना में दी सेवाएं
नेगी के अन्य उल्लेखनीय अभियानों में 1996 में माउंट सासेर कांगड़ी-प्ट, 2005 में माउंट सतोपंथ और माउंट चंद्र भागा शृंखला (1994) शामिल हैं। नेगी ने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान बीएसएफ बटालियन की कमान भी संभाली थी। 33 साल की सेवा के बाद वह 2010 में सेवानिवृत्त हुए। अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों से परे नेगी ने पर्वतारोहण समुदाय में, विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश और अन्य आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं को प्रशिक्षण और प्रेरित करने में अमूल्य योगदान दिया। 2012 से 2020 तक हिमाचल प्रदेश एवरेस्ट एसोसिएशन (एचपीईए) के सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहने वाले नेगी ने क्षेत्र में पर्वतारोहण और साहसिक खेलों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नेगी आपदा प्रबंधन और पर्वतारोहण में युवाओं के प्रशिक्षण के भी कट्टर समर्थक थे। 2012 और 2020 के बीच उन्होंने हिपा, शिमला के सहयोग से किन्नौर के युवाओं के लिए आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण और पर्वतीय बचाव, प्राथमिक चिकित्सा और अग्निशमन प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने सहित कई पहलों का समन्वय किया।
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2006 में हासिल की दुर्लभ उपलब्धि
2006 में नेगी ने एक और दुर्लभ उपलब्धि हासिल की, जब बीएसएफ एवरेस्ट अभियान के दौरान उन्होंने 23520 फीट की ऊंचाई से तीन पर्वतारोहियों को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह महत्वपूर्ण क्षण उनके साहस और नेतृत्व का उदाहरण था। शरब चंदूब नेगी के निधन से पर्वतारोहण समुदाय में एक खालीपन आ गया है, लेकिन उनकी विरासत साहसी लोगों और नई पीढि़यों को प्रेरित करती रहेगी। आईएमएफ के लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड के साथ उनकी मरणोपरांत मान्यता उनके साहसिक जीवन, नेतृत्व और पर्वतारोहण के प्रति समर्पण के असाधारण जीवन का प्रमाण है।