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Rampur Bushahar News: गरीबों के संसाधन छीनकर अमीरों के हवाले कर रही सरकार

Tue, 20 May 2025 11:16 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 20 May 2025 11:16 PM IST
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Kisan Sabha staged a protest in Rampur, Jhakdi and Bayal
बायल में सीटू के कार्यकर्ता धरना प्रदर्शन करते हुए।
रामपुर, झाकड़ी और बायल में किसान सभा ने किया रोष प्रदर्शन
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चार श्रम संहिताओं को लागू करने पर तुली सरकार : सभा


संवाद न्यूज एजेंसी

रामपुर बुशहर। केंद्र सरकार देश के गरीबों के संसाधनों को छीनकर अमीरों के हवाले करने का काम कर रही है। देश की एक प्रतिशत आबादी के पास 40.5 प्रतिशत संपत्ति और सबसे गरीब 50 प्रतिशत आबादी के पास सिर्फ 3 प्रतिशत संपत्ति है। सरकार ने पूंजीपतियों का 17 लाख करोड़ का कर्जा माफ किया और किसानों का कुल कर्जा जो 18 लाख करोड़ है, उसका एक रुपया माफ नहीं किया। किसान सभा और सीटू से संबधित यूनियनों ने केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के देशव्यापी प्रदर्शन के आह्वान पर केंद्र सरकार के खिलाफ मंगलवार को झाकड़ी, बायल और रामपुर में रोष प्रदर्शन किया। किसान सभा ने चार श्रम संहिताओं को लागू करने पर रोष जताया।
वहीं, मजदूर नेताओं ने कहा कि अच्छे दिनों का वादा करके सत्ता में आई सरकार ने पिछले 10 वर्षों में मजदूर, कर्मचारी, किसान और आम जनता विरोधी कदम उठाए हैं। किसान, मजदूरों और मेहनतकश लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों के चलते देश में बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और खाद्य असुरक्षा पैदा हुई है। नव उदारवादी नीतियों के कारण आज गरीब और गरीब और अमीर और अमीर होते चले जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने कॉरपोरेट समूहों को बढ़ावा दिया है। इन समूहों के पास भारत की गैर वित्तीय संपत्तियों का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। मजदूर नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार 4 श्रम संहिताओं को लागू करने के लिए उतारू है। आजादी से पहले और बाद में मजदूरों के संघर्षों और कुर्बानियों से बने 44 श्रम कानूनों को 4 मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं में बदल दिया गया है। इससे 74 प्रतिशत मजदूर सामाजिक और 70 प्रतिशत उद्योग सुरक्षा कानून के दायरे से बाहर हो जाएंगे। इन श्रम संहिताओं में कोई भी फार्मूला नहीं है। पहले रोजाना काम के घंटे तय करने की शक्ति कानून में थी, जबकि अब यह शक्ति सरकार के हाथ में है। पिछले वर्षों में कई राज्य सरकारों की ओर से काम के घंटों को 8 से 12 करने के मजदूर विरोधी फैसले देखे जा चुके हैं। श्रम संहिताओं में फिक्स टर्म रोजगार को कानूनी जामा पहनाया गया है। यूनियन बनाने की प्रक्रिया को जटिल कर दिया है। पहले उद्योग मे कार्यरत न्यूनतम 7 या 10 प्रतिशत मजदूर यूनियन बना सकते थे। अब यह 100 या 10 प्रतिशत कर दिया गया है। यह कोड श्रम न्यायालयों को निरस्त कर देता है। उन्होंने कहा कि श्रम संहिता, मजदूरों के मूल अधिकार हड़ताल के अधिकार को कमजोर करती है। ये कोड ठेका प्रथा को मजबूत करते हैं। ठेकेदारों को लाइसेंस लेने के लिए मजदूरों की सीमा को 20 से 50 कर दिया गया है।
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प्रदर्शन में यह रहे मौजूद
प्रदर्शन के दौरान सीटू जिला शिमला अध्यक्ष कुलदीप डोगरा, सचिव अमित, हिमाचल किसान सभा शिमला जिला अध्यक्ष प्रेम, रणजीत, नीलदत्त, 1500 मेगावाट वर्कर्स यूनियन अध्यक्ष गुरदास, महासचिव कामराज, 412 मेगावाट वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष प्रमोद, महासचिव तिलक, कोषाध्यक्ष संजीव, लूहरी हाइड्रो वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष राजपाल भंडारी, महासचिव दिनेश मेहता, 210 मेगावाट वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष मंजीत, महासचिव लोकेंदर, नगर परिषद वर्कर्स यूनियन से ललिता, फलवती, मंजू, सुनमोनी, अंबिका, सुनील, संजीव सहित अन्य मौजूद रहे।
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- संवाद

बायल में सीटू के कार्यकर्ता धरना प्रदर्शन करते हुए।

बायल में सीटू के कार्यकर्ता धरना प्रदर्शन करते हुए।

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