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Rampur Bushahar News: किन्नौर में 695 किसानों को वितरित किया कोदे का 400 किलो बीज

Sun, 19 Mar 2023 10:57 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 19 Mar 2023 10:57 PM IST
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रिकांगपिओ (किन्नौर)। कोदा स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होता है। इसका सेवन रक्त को शुद्ध करने, शरीर में प्रतिरोध शक्ति में सुधार लाने, एनीमिया, मधुमेह, कब्ज से राहत देने और अच्छी नींद लाने में मददगार होता है।
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इसके अलावा अस्थमा और गुर्दे की समस्याओं, प्रोस्टेट, रक्त कैंसर और आंत, थायरॉइड, गले, यकृत के कैंसर से संबंधित समस्याओं से छुटकारा दिलाने में भी कोदे का सेवन सहायक होता है। इसमें विटामिन और खनिज प्रचूर मात्रा में होते हैं। यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र संघ 2023 को मोटे अनाजों का अंतरराष्ट्रीय वर्ष मना रहा है।
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कोदे का स्वाद खाने में मीठा, कड़वा और तीखा होता है। कृषि विभाग परियोजना निदेशक आत्मा सोमराज नेगी ने बताया कि चौलाई भी स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी माना गया है। इसका स्थानीय नाम चौलाई, राजगिरि, रामदना और सलियार है। यह दांतों के रोग, कंठ की बीमारी, दस्त, ल्यूकोरिया, घाव और रक्त विकारों के निदान में लाभकारी है। चौलाई पाचन तंत्र को मजबूत करने का काम करता हैं। इसमें प्रोटीन, विटामिन, एवीएसी, आयरन और कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है। वहीं कांगनी को स्थानीय भाषा में कांगनी और कोणी कहते हैं। यह अनाज हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। इसमें आठ प्रतिशत फाइबर, 12 प्रतिशत प्रोटीन मौजूद है, जो मधुमेह के रोगियों के लिए काफी फायदेमंद है। यह बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए भी काफी कारगर माना जाता है। किन्नौर जिले में मोटे अनाज कोदे का 695 किसानों को 400 किलो बीज के रूप में दिया गया है। इसके तहत पौंडा गांव के 50 किसानों को 60 किलो, चगांव के 50 किसानों 60 किलो, रिकांगपिओ में 140 किसानों को 80 किलो और किसान मेले में 455 किसानों को 200 किलोग्राम बीज मुफ्त वितरित किया गया है।
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सोमराज नेगी ने कहा कि मोटे अनाजों के महत्व को समझते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ वर्ष 2023 को मोटे अनाजों का अंतरराष्ट्रीय वर्ष मना रहा है। भारतीय उपमहाद्वीप में पोषक मोटे अनाजों कोदा, कांगनी, साबा, चौलाई, कुटकी का इतिहास पांच हजार वर्ष पुराना है। ये पोषण युक्त मोटे अनाज हमारे भोजन का केंद्र बिंदु थे, लेकिन समय के साथ-साथ अन्य अनाजों ने इनका स्थान लिया है।
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