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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   If they were not in the revenue records, how were 16 lush green Kayal and Pine trees cut down

Rampur Bushahar News: राजस्व रिकॉर्ड में नहीं थे तो कैसे कट गए 16 हरे-भरे कायल और चीड़

Fri, 22 May 2026 11:39 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 22 May 2026 11:39 PM IST
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ग्रामीणों ने लगाया आरोप, सोलर पावर कंपनी के प्रभाव में आकर काटे पेड़
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प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर लोगों ने उठाए सवाल

संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सौर ऊर्जा परियोजना के लिए भूमि चयन और पेड़ों की कटाई को लेकर पलकन गांव में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सोलर पावर कंपनी के प्रभाव में आकर 16 हरे-भरे कायल और चीड़ के पेड़ों को काट दिया गया, जबकि राजस्व दस्तावेजों के आधार पर भूमि स्वीकृत की गई, उनमें इन पेड़ों का कोई उल्लेख तक नहीं था। मामले ने अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली और राजस्व विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि राजस्व रिकॉर्ड में नहीं थे तो कैसे 16 हरे-भरे कायल और चीड़ कट गए। ग्रामीण मनोज, बलदेव, राजिंद्र, हरप्रीत और प्रेम राज का कहना है कि जिस भूमि को कागजों में बंजर और खाली दर्शाया गया है। वास्तविकता में वहां वर्षों पुराने पेड़ मौजूद थे। सबसे हैरानी की बात यह है कि परियोजना से पहले राजस्व, वन और अन्य विभागों के अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण भी किया था। इसके बावजूद रिकॉर्ड में पेड़ों का उल्लेख न होना कई अधिकारियों की भूमिका को संदेह के घेरे में ला रहा है। डीएफओ रवि शंकर ने भी माना है कि संबंधित राजस्व रिकॉर्ड में पेड़ों का उल्लेख नहीं था। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि रिकॉर्ड में दूसरी भूमि दिखाई गई थी, तो फिर पेड़ किसी और स्थान पर कैसे काट दिए गए। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया। इसमें कुछ प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों की मिलीभगत से इन्कार नहीं किया जा सकता।
मामले की निष्पक्ष जांच हुई तो नप सकते कंपनी के प्रभाव में आए कई बड़े अधिकारी
ग्रामीण मनोज, बलदेव, राजिंद्र, हरप्रीत और प्रेम राज ने बताया कि आज जिस पहाड़ी से पेड़ काटे गए, वह कभी पूरी तरह बंजर थी। गांव के लोगों ने वर्षों पहले यहां पौधे लगाए थे और उन्हें अपने बच्चों की तरह संभाला। ग्रामीणों ने बताया कि गर्मियों में आग से बचाने के लिए कई बार आधी-आधी रात तक पहरा देना पड़ता था। वर्षों की मेहनत से तैयार हुई हरियाली को कुछ घंटों में उजाड़ दिया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाई जाए। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई, तो कई बड़े अधिकारी और राजनीतिक संरक्षण देने वाले चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
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कार्रवाई नहीं हुई तो एक सप्ताह में जाएंगे न्यायालय
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो एक सप्ताह के भीतर मामला न्यायालय में ले जाया जाएगा। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी रोष है। उनका कहना है कि यदि सरकारी रिकॉर्ड में हकीकत को दबाकर पर्यावरण से खिलवाड़ किया गया है, तो यह केवल पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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