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Rampur Bushahar News: एचआरटीसी के कर्मियों को नहीं मिली मासिक पेंशन
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एचआरटीसी कर्मियों ने बैठक आयोजित कर जताया रोष
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। एचआरटीसी के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की दिवाली इस बार फीकी रही है। निगम के पेंशनरों को डीए की किस्त तो दूर मासिक पेंशन का भुगतान भी नहीं किया गया है। इसके चलते पेंशनरों में भारी रोष है। बुधवार को एचआरटीसी पेंशनर कल्याण संगठन ने बैठक में रोष व्यक्त किया। संगठन के प्रधान गुलाब सिंह ने बताया कि एक ओर प्रदेश में हिमाचल पथ परिवहन निगम 50 वर्ष पूरा होने पर स्वर्ण जयंती मना रही है। दूसरी ओर एचआरटीसी को इस मुकाम तक पहुंचाने वाले कर्मियों के हितों को दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 12 अक्तूबर को एचआरटीसी की स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्यमंत्री ने पेंशनरों को दिवाली से पहले चार प्रतिशत डीए देने का वादा किया था, लेकिन डीए देना तो दूर आज दिन तक मासिक पेंशन भी पेंशनरों को नहीं दी गई है। प्रदेश सरकार व परिवहन निगम प्रबंधन सेवानिवृत्त हो चुके बुजुर्ग कर्मियों की सुध नहीं ले रहा है। संगठन लंबे समय से मांग कर रहा है कि पेंशन के लिए बजट में अलग से व्यवस्था की जाए, ताकि पेंशनरों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े। सरकार के आदेशों की पालना न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। एचआरटीसी के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की दिवाली इस बार फीकी रही है। निगम के पेंशनरों को डीए की किस्त तो दूर मासिक पेंशन का भुगतान भी नहीं किया गया है। इसके चलते पेंशनरों में भारी रोष है। बुधवार को एचआरटीसी पेंशनर कल्याण संगठन ने बैठक में रोष व्यक्त किया। संगठन के प्रधान गुलाब सिंह ने बताया कि एक ओर प्रदेश में हिमाचल पथ परिवहन निगम 50 वर्ष पूरा होने पर स्वर्ण जयंती मना रही है। दूसरी ओर एचआरटीसी को इस मुकाम तक पहुंचाने वाले कर्मियों के हितों को दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 12 अक्तूबर को एचआरटीसी की स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्यमंत्री ने पेंशनरों को दिवाली से पहले चार प्रतिशत डीए देने का वादा किया था, लेकिन डीए देना तो दूर आज दिन तक मासिक पेंशन भी पेंशनरों को नहीं दी गई है। प्रदेश सरकार व परिवहन निगम प्रबंधन सेवानिवृत्त हो चुके बुजुर्ग कर्मियों की सुध नहीं ले रहा है। संगठन लंबे समय से मांग कर रहा है कि पेंशन के लिए बजट में अलग से व्यवस्था की जाए, ताकि पेंशनरों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े। सरकार के आदेशों की पालना न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।