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Rampur Bushahar News: कोटखाई में ओलों की मार से सेब को बगीचों को भारी नुकसान, चिंतित बागवान
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ओलावृष्टि से क्षतिग्रस्त हेलनेट और टूटे पौधों को ठीक करने में जुटे बागवान
क्षतिग्रस्त सेब के पौधों और टूट चुकी जालियों को दुरुस्त करने में जुटे बागवान
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। पिछले सप्ताह हुई भारी ओलावृष्टि ने कोटखाई क्षेत्र के बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। ओलावृष्टि से सेब की फसल, पौधों और ओलावृष्टि रोधी जालियों (हेलनेट) को काफी नुकसान पहुंचा है। विशेष रूप से थरोला और खनेटी पंचायत में सेब के बगीचों को भारी नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि के बाद बागवान क्षतिग्रस्त सेब के पौधों और टूटे हेलनेट को दुरुस्त करने में जुट गए हैं। कई स्थानों पर हेलनेट के क्षतिग्रस्त होने से सेब के पौधों को भी नुकसान हुआ है। जिन बगीचों में ओलावृष्टि रोधी जालियां नहीं लगी थीं, वहां फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। कई स्थानों पर फसल लगभग पूरी तरह तबाह हो गई है। बागवानों का कहना है कि इस वर्ष पहले ही सेब की फसल अपेक्षाकृत कम थी। ऐसे में प्राकृतिक आपदा ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ओलों की मार से फलों के साथ-साथ पौधे भी प्रभावित हुए हैं। इससे आने वाले समय में उत्पादन पर असर पड़ सकता है। स्थानीय बागवानों ने सरकार और उद्यान विभाग से प्रभावित क्षेत्रों का शीघ्र सर्वेक्षण करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि नुकसान का आकलन कर प्रभावित बागवानों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। बागवानों ने उद्यान केंद्रों के माध्यम से आवश्यक दवाइयां और सहायता उपलब्ध करवाने का भी आग्रह किया है। यह सहायता पौधों को बीमारियों और अन्य नुकसान से बचाने में मदद करेगी। बागवानों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते राहत और सहायता नहीं मिली, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस वर्ष पहले से ही कम फसल के कारण उनकी आय प्रभावित हुई है। ओलावृष्टि ने उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है। भविष्य में सेब उत्पादन पर पड़ने वाले असर से भी वे चिंतित हैं।
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क्षतिग्रस्त सेब के पौधों और टूट चुकी जालियों को दुरुस्त करने में जुटे बागवान
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। पिछले सप्ताह हुई भारी ओलावृष्टि ने कोटखाई क्षेत्र के बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। ओलावृष्टि से सेब की फसल, पौधों और ओलावृष्टि रोधी जालियों (हेलनेट) को काफी नुकसान पहुंचा है। विशेष रूप से थरोला और खनेटी पंचायत में सेब के बगीचों को भारी नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि के बाद बागवान क्षतिग्रस्त सेब के पौधों और टूटे हेलनेट को दुरुस्त करने में जुट गए हैं। कई स्थानों पर हेलनेट के क्षतिग्रस्त होने से सेब के पौधों को भी नुकसान हुआ है। जिन बगीचों में ओलावृष्टि रोधी जालियां नहीं लगी थीं, वहां फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। कई स्थानों पर फसल लगभग पूरी तरह तबाह हो गई है। बागवानों का कहना है कि इस वर्ष पहले ही सेब की फसल अपेक्षाकृत कम थी। ऐसे में प्राकृतिक आपदा ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ओलों की मार से फलों के साथ-साथ पौधे भी प्रभावित हुए हैं। इससे आने वाले समय में उत्पादन पर असर पड़ सकता है। स्थानीय बागवानों ने सरकार और उद्यान विभाग से प्रभावित क्षेत्रों का शीघ्र सर्वेक्षण करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि नुकसान का आकलन कर प्रभावित बागवानों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। बागवानों ने उद्यान केंद्रों के माध्यम से आवश्यक दवाइयां और सहायता उपलब्ध करवाने का भी आग्रह किया है। यह सहायता पौधों को बीमारियों और अन्य नुकसान से बचाने में मदद करेगी। बागवानों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते राहत और सहायता नहीं मिली, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस वर्ष पहले से ही कम फसल के कारण उनकी आय प्रभावित हुई है। ओलावृष्टि ने उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है। भविष्य में सेब उत्पादन पर पड़ने वाले असर से भी वे चिंतित हैं।