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ग्रामीण क्षेत्रों में घास कटाई का सीजन जोरों पर
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रामपुर बुशहर। ऊपरी शिमला और किन्नौर जिले के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों घास कटाई का कार्य चरम पर है। कोरोना काल में घास कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं तो इस मर्तबा महिलाओं के साथ-साथ पुरुष भी घास कटाई में जुटे हुए हैं। मजूदर न मिलने से ग्रामीण खासे परेशान हैं। हालांकि इस बार मौसम अपनी मेहरबानी ग्रामीणों पर खूब बरसा रहा है। घास कटाई के इस सीजन में अभी तक एक बार भी बारिश नहीं हुई है।
गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सितंबर माह में घास कटाई का कार्य शुरू हो जाता है। सर्दियों में पशुओं के लिए चारे की कोई कमी न रहे, इसके लिए ग्रामीणों ने कमर कसनी शुरू कर दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से ही महिलाएं, युवतियां, युवक और पुरुष घास कटाई में जुटे हुए हैं। दिनभर घास कटाई का सिलसिला जारी है। कोविड के कहर के चलते शहरी क्षेत्रों से जो युवा गांव पहुंचे हैं, वे भी इन दिनों घास कटाई में खूब पसीना बहा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार घास कटाई का कार्य सबसे कठिन रहता है। पहले घास को काटना पड़ता है, फिर उसे सूखने के बाद बांधना पड़ता है और उसके बाद घास को घरों तक पहुंचाना पड़ता है। ऐसे में मजूदरों के बिना उन्हें खासी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। मौसम के बिगड़े मिजाज से हर बार घास कटाई का कार्य प्रभावित होता था और ग्रामीणों को घास सड़ने के एवज में नुकसान भी उठाना पड़ता था। पूनम कायथ, पल्लवी, कौशल्या देवी, सीता देवी, पोतल दासी, गोपाल दासी, गुड़िया, शशि देवी, तारा कायथ, सुरेंद्र, देविंद्र, लायक राम और ईश्वर दास सहित कई अन्य ग्रामीणों ने कहा कि घास कटाई का कार्य जोर शोर से चला हुआ है। इस बार मजदूर न मिलने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सितंबर माह में घास कटाई का कार्य शुरू हो जाता है। सर्दियों में पशुओं के लिए चारे की कोई कमी न रहे, इसके लिए ग्रामीणों ने कमर कसनी शुरू कर दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से ही महिलाएं, युवतियां, युवक और पुरुष घास कटाई में जुटे हुए हैं। दिनभर घास कटाई का सिलसिला जारी है। कोविड के कहर के चलते शहरी क्षेत्रों से जो युवा गांव पहुंचे हैं, वे भी इन दिनों घास कटाई में खूब पसीना बहा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार घास कटाई का कार्य सबसे कठिन रहता है। पहले घास को काटना पड़ता है, फिर उसे सूखने के बाद बांधना पड़ता है और उसके बाद घास को घरों तक पहुंचाना पड़ता है। ऐसे में मजूदरों के बिना उन्हें खासी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। मौसम के बिगड़े मिजाज से हर बार घास कटाई का कार्य प्रभावित होता था और ग्रामीणों को घास सड़ने के एवज में नुकसान भी उठाना पड़ता था। पूनम कायथ, पल्लवी, कौशल्या देवी, सीता देवी, पोतल दासी, गोपाल दासी, गुड़िया, शशि देवी, तारा कायथ, सुरेंद्र, देविंद्र, लायक राम और ईश्वर दास सहित कई अन्य ग्रामीणों ने कहा कि घास कटाई का कार्य जोर शोर से चला हुआ है। इस बार मजदूर न मिलने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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