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Rampur Bushahar News: दारन गांव को भूस्खलन से बचाने के लिए फ्रेंच एजेंसी करेगी सहयोग

Fri, 14 Aug 2026 11:01 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2026 11:01 PM IST
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French agency to assist in protecting Daran village from landslides
दारन गांव में निरीक्षण के लिए पहुंची  डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड प्रिपेयर्डनेस प्रोग्राम की टीम
डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड प्रिपेयर्डनेस प्रोग्राम की टीम ने किया निरीक्षण
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गांव में वर्ष 2023 से लगातार भूस्खलन और कटाव की समस्या
मोहन मेहता
ज्यूरी (रामपुर बुशहर)। रामपुर विकास खंड की दोफदा पंचायत के दारन गांव को भूस्खलन से बचाने के लिए फ्रेंच डेवलपमेंट एजेंसी (एएफडी) के वित्तीय सहयोग से एक परियोजना शुरू की जाएगी। दारन गांव में वर्ष 2023 से लगातार भूस्खलन और कटाव की समस्या बनी हुई है। इससे कई घरों और सेब के बगीचों को नुकसान हो रहा है। हिमाचल प्रदेश डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड प्रिपेयर्डनेस प्रोग्राम (एचपीडीआरआरपी) की टीम ने लोक निर्माण विभाग के साथ दोफदा क्षेत्र का निरीक्षण किया। सहायक अभियंता राहुल जंजीहा और कनिष्ठ अभियंता पैगाराम जोशी इस दौरान मौजूद रहे। दोफदा पंचायत के प्रधान संतोष की अध्यक्षता में ग्रामीणों और हितधारकों के साथ एक बैठक हुई। स्थानीय लोगों ने भूस्खलन के कारण सड़क बाधित होने और आवागमन में कठिनाई की जानकारी दी। राहुल जंजीहा ने बताया कि फ्रेंच एजेंसी से स्वीकृति के बाद डीपीआर बनेगी। चार दीवारी (रिटेनिंग स्ट्रक्चर) से भूस्खलन और कटाव का खतरा कम होगा। एचपीडीआरआरपी टीम के सामाजिक और लैंगिक विशेषज्ञ रवि कुमार, पर्यावरण विशेषज्ञ रूपा और दस्तावेज विशेषज्ञ पारस चौहान ने परियोजना का उद्देश्य सड़कों, पुलों और बस्तियों को आपदारोधी बनाना बताया। बैठक में महिलाओं की सहभागिता पर विशेष जोर दिया गया। उन्हें लैंगिक कार्य योजना के विभिन्न पहलुओं से अवगत करवाया गया। महिलाओं को आपदा प्रबंधन, सामुदायिक सुरक्षा और जागरूकता गतिविधियों में उनकी भूमिका की जानकारी दी गई। उनके सुझाव भी आमंत्रित किए गए। उपस्थित महिलाओं ने परियोजना का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के लिए लाभकारी बताया। दारन गांव में यदि समय पर आपदा से सुरक्षा के उपाय नहीं हुए, तो सैकड़ों लोगों को गांव छोड़ना पड़ सकता है। इससे ग्रामीण बेघर होंगे और बाग-बगीचों को भारी नुकसान होगा। प्रस्तावित चारदीवारी से दारन गांव में भूस्खलन और कटाव का जोखिम कम होगा। यह स्थानीय आबादी और कृषि भूमि को सुरक्षा प्रदान करेगी। संवाद
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