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Rampur Bushahar News: पहली बार प्रभु लक्ष्मी नारायण का लोमेश ऋषि लगिशरी से होगा मिलन
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हजारों श्रद्धालु बनेंगे साक्षी, दौरे को लेकर ग्रामीणों में खुशी की लहर
संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)। खंड आनी के प्रसिद्ध देवता बशावली नारायण 22 और 23 अक्तूबर को बंजार घाटी के कशिणी गांव के लिए प्रस्थान करेंगे। यह आयोजन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इतिहास में पहली बार प्रभु लक्ष्मी नारायण का लोमेश ऋषि लगिशरी (डियों) से भव्य मिलन होगा।
इस अवसर पर क्षेत्र भर से सैकड़ों श्रद्धालुओं के भाग लेने की संभावना है। देव जाच के बाद प्रभु लक्ष्मी नारायण बंजार घाटी के विभिन्न स्थलों का दौरा करेंगे। कारदार वाल चंद और समाजसेवी खेम चंद ठाकुर ने बताया कि यह अवसर देव परंपरा और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने हरियान, पकरेड, खड़ोरण, वशावल-1, वशावल-2, खैऊग, चजुट, मुहान, रूहा, निचली करकी, डीडी, ठबानी, घटाधार और ठाणाधार के श्रद्धालुओं से 22 अक्तूबर को बंजार दौरे में सम्मिलित होकर देव दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने का आह्वान किया है।
क्षेत्र में इस आयोजन को लेकर धार्मिक उत्साह चरम पर है। वहीं बंजार घाटी में भी देव मिलन को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आयोजन देव संस्कृति के गौरवशाली इतिहास में एक यादगार पल के रूप में दर्ज होगा।
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आनी (कुल्लू)। खंड आनी के प्रसिद्ध देवता बशावली नारायण 22 और 23 अक्तूबर को बंजार घाटी के कशिणी गांव के लिए प्रस्थान करेंगे। यह आयोजन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इतिहास में पहली बार प्रभु लक्ष्मी नारायण का लोमेश ऋषि लगिशरी (डियों) से भव्य मिलन होगा।
इस अवसर पर क्षेत्र भर से सैकड़ों श्रद्धालुओं के भाग लेने की संभावना है। देव जाच के बाद प्रभु लक्ष्मी नारायण बंजार घाटी के विभिन्न स्थलों का दौरा करेंगे। कारदार वाल चंद और समाजसेवी खेम चंद ठाकुर ने बताया कि यह अवसर देव परंपरा और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने हरियान, पकरेड, खड़ोरण, वशावल-1, वशावल-2, खैऊग, चजुट, मुहान, रूहा, निचली करकी, डीडी, ठबानी, घटाधार और ठाणाधार के श्रद्धालुओं से 22 अक्तूबर को बंजार दौरे में सम्मिलित होकर देव दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने का आह्वान किया है।
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क्षेत्र में इस आयोजन को लेकर धार्मिक उत्साह चरम पर है। वहीं बंजार घाटी में भी देव मिलन को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आयोजन देव संस्कृति के गौरवशाली इतिहास में एक यादगार पल के रूप में दर्ज होगा।
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