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कुपवी के शवलावग गांव में छह कमरों का घर चढ़ा आग की भेंट
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नेरवा। तहसील कुपवी की ग्राम पंचायत चड़ोली के शवलावग गांव में मंगलवार शाम आग लगने से छह कमरों का एक दो मंजिला मकान जल कर राख हो गया। घटना के समय परिवार के लोग मंगलवार शाम के समय घर पर नहीं थे। प्रशासन की टीम ने घटना स्थल पर पहुंच कर नुकसान का जायजा लिया है।
जानकारी के मुताबिक मंगलवार शाम के समय करीब साढे़ पांच बजे शवलावग निवासी सुरेंद्र सिंह पुत्र कुंदन सिंह के पुश्तैनी घर में आग लग गई। जिस समय मकान में आग भड़की, उस समय मकान मालिक सुरेंद्र अपने निजी कार्य से सिरमौर गया था। उनकी पत्नी पशुओं के लिए चारा लेने गई थीं। तीन वर्षीय बेटी खेतों में खेल रही थी। गांव के लोगों ने सुरेंद्र के घर की छत से लपटें निकलती देख कर करीब पांच सौ मीटर दूर से पीठ पर पानी ढोकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया। घर में रखे कुछ सामान को बाहर फेंक कर बचा लिया गया लेकिन रसोईघर और कमरों में रखा अधिकांश सामान समेत मकान की छत पूरी तरह जल कर राख हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि घटनास्थल के समीप पर्याप्त पानी होता तो इस मकान को आग की भेंट चढ़ने से बचाया जा सकता था। गांव में नियमित रूप से कभी भी पेयजल आपूर्ति नहीं की जाती है। सुरेंद्र ने बताया कि मकान में आग लगने का कारण शार्ट सर्किट है। गांव में बिछाए गए बिजली के तारों में अक्सर स्पार्किंग होती रहती है। अधिकांश घर कच्चे और पुरानी शैली में लकड़ी के बने हुए हैं। इसके बारे में कई बार बिजली बोर्ड को सूचित किया जा चुका है। हलका पटवारी विपिन शर्मा ने घटना स्थल का दौरा कर आग से हुए नुकसान की रिपोर्ट विभाग को सौंप दी है। उन्होंने कहा कि आग से छह कमरों का दो मंजिला घर और सामान जल कर राख हो गया। पुलिस टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
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जानकारी के मुताबिक मंगलवार शाम के समय करीब साढे़ पांच बजे शवलावग निवासी सुरेंद्र सिंह पुत्र कुंदन सिंह के पुश्तैनी घर में आग लग गई। जिस समय मकान में आग भड़की, उस समय मकान मालिक सुरेंद्र अपने निजी कार्य से सिरमौर गया था। उनकी पत्नी पशुओं के लिए चारा लेने गई थीं। तीन वर्षीय बेटी खेतों में खेल रही थी। गांव के लोगों ने सुरेंद्र के घर की छत से लपटें निकलती देख कर करीब पांच सौ मीटर दूर से पीठ पर पानी ढोकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया। घर में रखे कुछ सामान को बाहर फेंक कर बचा लिया गया लेकिन रसोईघर और कमरों में रखा अधिकांश सामान समेत मकान की छत पूरी तरह जल कर राख हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि घटनास्थल के समीप पर्याप्त पानी होता तो इस मकान को आग की भेंट चढ़ने से बचाया जा सकता था। गांव में नियमित रूप से कभी भी पेयजल आपूर्ति नहीं की जाती है। सुरेंद्र ने बताया कि मकान में आग लगने का कारण शार्ट सर्किट है। गांव में बिछाए गए बिजली के तारों में अक्सर स्पार्किंग होती रहती है। अधिकांश घर कच्चे और पुरानी शैली में लकड़ी के बने हुए हैं। इसके बारे में कई बार बिजली बोर्ड को सूचित किया जा चुका है। हलका पटवारी विपिन शर्मा ने घटना स्थल का दौरा कर आग से हुए नुकसान की रिपोर्ट विभाग को सौंप दी है। उन्होंने कहा कि आग से छह कमरों का दो मंजिला घर और सामान जल कर राख हो गया। पुलिस टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
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