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बिथल में किसानों की हड़ताल पांचवें दिन भी जारी
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रामपुर बुशहर। लुहरी जल विद्युत परियोजना के प्रभावितों की बैठक मंगलवार को बिथल में आयोजित हुई। इसमें परियोजना प्रभावितों के क्रमिक आंदोलन को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। मंगलवार को परियोजना प्रभावितों का जन आंदोलन पांचवें दिन में प्रवेश कर गया है। लुहरी परियोजना प्रभावित संघर्ष समिति के संयोजक काकू कश्यप और देवकी नंद ने प्रभावितों को संबोधित करते हुए कहा कि बिथल में किसानों के आंदोलन को पांच दिन पूरे हो गए हैं लेकिन प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और परियोजना प्रबंधन किसानों की उचित मांगों के समाधान के लिए बातचीत तक करने को तैयार नहीं है।
परियोजना निर्माण से उठी धूल के कारण किसानों की फसल खराब हो गई है। आनस गांव की महिला सरिता की 60 बकरियों की मौत परियोजना निर्माण से उठी धूल से हुई है, जिसकी मेडिकल रिपोर्ट भी आ गई है। इसका मुआवजा करीब सात लाख रुपये है लेकिन अभी तक न तो प्रदूषण से हुए नुकसान का मुआवजा दिया गया और न ही प्रभावित परिवार को धूल से मरी बकरियों का मुआवजा मिला है। उन्होंने कहा कि परियोजना निर्माण से कई गांवों में मकानों में दरारें आ गई हैं, उसका मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है। परियोजना में जिन लोगों की जमीन गई है, उन परिवारों को भी रोजगार से वंचित रखा जा रहा है। जमीन का मुआवजा भी अलग-अलग दिया गया है। कुल्लू जिले जमीन का मुआवजा 33 लाख के आसपास और शिमला जिले में मुआवजा 50 लाख के हिसाब से दिया गया है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि अगर सरकार, प्रशासन और परियोजना प्रबंधन किसानों की उचित मांगों के समाधान को लेकर बातचीत नहीं करेंगे, तो संघर्ष समिति आने वाले समय में प्रभावित पंचायत के लोगों को संगठित कर परियोजना के खिलाफ मोर्चाबंदी करेगी। बैठक में निर्णय लिया गया कि अगर परियोजना प्रबंधन धूल से मरी बकरियों का मुआवजा, गैर कानूनी डंपिंग और नरोला गांव के लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं करता तो संघर्ष समिति पांच दिन के बाद एसजेवीएन के सीएमडी नंदलाल, मुख्य महाप्रबंधक रोशन लाल नेगी और बलजीत के खिलाफ पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाएगी।
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परियोजना निर्माण से उठी धूल के कारण किसानों की फसल खराब हो गई है। आनस गांव की महिला सरिता की 60 बकरियों की मौत परियोजना निर्माण से उठी धूल से हुई है, जिसकी मेडिकल रिपोर्ट भी आ गई है। इसका मुआवजा करीब सात लाख रुपये है लेकिन अभी तक न तो प्रदूषण से हुए नुकसान का मुआवजा दिया गया और न ही प्रभावित परिवार को धूल से मरी बकरियों का मुआवजा मिला है। उन्होंने कहा कि परियोजना निर्माण से कई गांवों में मकानों में दरारें आ गई हैं, उसका मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है। परियोजना में जिन लोगों की जमीन गई है, उन परिवारों को भी रोजगार से वंचित रखा जा रहा है। जमीन का मुआवजा भी अलग-अलग दिया गया है। कुल्लू जिले जमीन का मुआवजा 33 लाख के आसपास और शिमला जिले में मुआवजा 50 लाख के हिसाब से दिया गया है।
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बैठक में निर्णय लिया गया कि अगर सरकार, प्रशासन और परियोजना प्रबंधन किसानों की उचित मांगों के समाधान को लेकर बातचीत नहीं करेंगे, तो संघर्ष समिति आने वाले समय में प्रभावित पंचायत के लोगों को संगठित कर परियोजना के खिलाफ मोर्चाबंदी करेगी। बैठक में निर्णय लिया गया कि अगर परियोजना प्रबंधन धूल से मरी बकरियों का मुआवजा, गैर कानूनी डंपिंग और नरोला गांव के लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं करता तो संघर्ष समिति पांच दिन के बाद एसजेवीएन के सीएमडी नंदलाल, मुख्य महाप्रबंधक रोशन लाल नेगी और बलजीत के खिलाफ पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाएगी।
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