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फाग मेले में उमड़ा आस्थ का सैलाब
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जिला स्तरीय फाग मेले के दूसरे दिन आकर्षण का केंद्र रही देवताओं की शोभायात्रा
- फोटो : RAMPUR-HP
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रामपुर बुशहर। जिला स्तरीय फाग मेले के दूसरे दिन देवी-देवताओं की शोभायात्रा में आस्था का सैलाब उमड़ा। इस दौरान देवलुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य किया तो वहीं देवधुनों पर लोग जमकर थिरके। इस दौरान सभी देवी-देवताओं ने लोगों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। शोभायात्रा के दौरान जगह-जगह लोगों ने देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना भी की। शाम करीब चार बजे सभी देवता महल पहुंचे। इसके बाद महल परिसर में नाटी का दौर शुरू हुआ, जो देर शाम तक चलता रहा।
ऐतिहासिक फाग मेले को लेकर रामपुर शहर भक्तिरस में डूबा है। रविवार को मेले के दूसरे दिन सुबह के समय सैकड़ों देवलू पुराने बस अड्डे से बाजार की तरफ रवाना हुए। गांधी पार्क से देवताओं और देवलुओं का जत्था मुख्य बाजार के लिए रवाना हुआ और परिक्रमा कर नेशनल हाईवे से होते हुए राजमहल पहुंचा। महल परिसर में देवताओं की पालकियां अपने-अपने स्थान पर विराजमान होने के बाद देवलुओं ने पारंपरिक नाटी डाली।
यहां यह दौर देर शाम तक चलता रहा। इससे पहले भव्य शोभायात्रा के दौरान बाजार और नेशनल हाईवे से गुजरते समय देवलुओं ने देवताओं के संग जमकर नृत्य किया। शोभायात्रा को देखने के लिए महल परिसर में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे थे। कुल्लू जिले से आए धारसरगा देवता और श्राईकोटी माता चाटी, दरकाली देवता रचोली देवता, गांवबील देवता और अन्य देवी-देवताओं के देवलुओं ने भी पारंपरिक लोकनृत्य करते हुए शोभायात्रा में भाग लिया।
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ऐतिहासिक फाग मेले को लेकर रामपुर शहर भक्तिरस में डूबा है। रविवार को मेले के दूसरे दिन सुबह के समय सैकड़ों देवलू पुराने बस अड्डे से बाजार की तरफ रवाना हुए। गांधी पार्क से देवताओं और देवलुओं का जत्था मुख्य बाजार के लिए रवाना हुआ और परिक्रमा कर नेशनल हाईवे से होते हुए राजमहल पहुंचा। महल परिसर में देवताओं की पालकियां अपने-अपने स्थान पर विराजमान होने के बाद देवलुओं ने पारंपरिक नाटी डाली।
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यहां यह दौर देर शाम तक चलता रहा। इससे पहले भव्य शोभायात्रा के दौरान बाजार और नेशनल हाईवे से गुजरते समय देवलुओं ने देवताओं के संग जमकर नृत्य किया। शोभायात्रा को देखने के लिए महल परिसर में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे थे। कुल्लू जिले से आए धारसरगा देवता और श्राईकोटी माता चाटी, दरकाली देवता रचोली देवता, गांवबील देवता और अन्य देवी-देवताओं के देवलुओं ने भी पारंपरिक लोकनृत्य करते हुए शोभायात्रा में भाग लिया।
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