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रामपुर में बिजली कर्मचारियों ने किया काम का बहिष्कार
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रामपुर में रोष रैली निकालते विद्युत बोर्ड के कर्मचारी।
- फोटो : RAMPUR-HP
रामपुर बुशहर/रिकांगपिओ। केंद्र सरकार के बिजली कंपनियों के निजीकरण को लेकर रामपुर में बुधवार को बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों की राष्ट्रीय समन्वय समिति के आह्वान पर कर्मचारियों ने काम का बहिष्कार किया। कर्मचारियों ने इस दौरान सरकार के इस फैसले के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। विद्युत बोर्ड कार्यालय से लेकर एसडीएम कार्यालय तक रोष रैली निकाली गई और एसडीएम सुरेंद्र मोहन को मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
यूनियन ने बिजली संशोधन बिल 2020 को वापस लेने, केंद्र प्रशासित प्रदेशों और राज्यों में सरकारी क्षेत्र की बिजली कंपनियों को निजी हाथों में न सौंपने, राज्य बिजली बोर्डों से विघटित बिजली कंपनियों के वितरण उत्पादन एवं संचार कार्यों का केरल और हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड की तर्ज पर एकीकरण करने, बिजली क्षेत्र में नई पेंशन प्रणाली को खत्म कर सभी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन के अधीन लाने और जबरन सेवानिवृत्ति के आदेशों को वापस लेने की मांग उठाई। वहीं, यूनियन ने बिजली क्षेत्र में आउटसोर्स पर कार्यरत सभी कर्मचारियों को तेलंगाना की तर्ज पर नियमित करने और बोर्ड में रिक्त पदों पर नियमित कर्मियों की भर्तियां करने की मांग की।
यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार बिजली कंपनियों के निजीकरण पर अड़ी हुई है। देश में आंदोलनरत किसानों ने भी बिजली क्षेत्र के निजीकरण के विद्युत उपभोक्ताओं पर संभावित खतरों को समझाया और इसके खिलाफ अपने आंदोलन के माध्यम से विरोध दर्ज करवाया है। खरवाड़ा ने चेताया है कि यदि केंद्र सरकार कर्मचारी विरोधी नीतियों को वापस नहीं लेती है तो कर्मचारी वर्ग आंदोलन करने से भी गुरेज नहीं करेगा। इस दौरान क्षेत्र के सभी विद्युत कार्यालयों में कर्मचारियों ने कार्य का बहिष्कार किया।
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उधर, रिकांगपिओ में भी हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत परिषद इंप्लाइज यूनियन ने विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। विद्युत उपमंडल रिकांगपिओ से लेकर मुख्य बाजार तक रोष रैली निकाली गई। इस दौरान यूनियन अध्यक्ष सीताराम नेगी की अध्यक्षता में एसडीएम कल्पा डॉ. अवनिंद्र कुमार को ज्ञापन भी सौंपा गया।
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यूनियन ने बिजली संशोधन बिल 2020 को वापस लेने, केंद्र प्रशासित प्रदेशों और राज्यों में सरकारी क्षेत्र की बिजली कंपनियों को निजी हाथों में न सौंपने, राज्य बिजली बोर्डों से विघटित बिजली कंपनियों के वितरण उत्पादन एवं संचार कार्यों का केरल और हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड की तर्ज पर एकीकरण करने, बिजली क्षेत्र में नई पेंशन प्रणाली को खत्म कर सभी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन के अधीन लाने और जबरन सेवानिवृत्ति के आदेशों को वापस लेने की मांग उठाई। वहीं, यूनियन ने बिजली क्षेत्र में आउटसोर्स पर कार्यरत सभी कर्मचारियों को तेलंगाना की तर्ज पर नियमित करने और बोर्ड में रिक्त पदों पर नियमित कर्मियों की भर्तियां करने की मांग की।
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यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार बिजली कंपनियों के निजीकरण पर अड़ी हुई है। देश में आंदोलनरत किसानों ने भी बिजली क्षेत्र के निजीकरण के विद्युत उपभोक्ताओं पर संभावित खतरों को समझाया और इसके खिलाफ अपने आंदोलन के माध्यम से विरोध दर्ज करवाया है। खरवाड़ा ने चेताया है कि यदि केंद्र सरकार कर्मचारी विरोधी नीतियों को वापस नहीं लेती है तो कर्मचारी वर्ग आंदोलन करने से भी गुरेज नहीं करेगा। इस दौरान क्षेत्र के सभी विद्युत कार्यालयों में कर्मचारियों ने कार्य का बहिष्कार किया।
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उधर, रिकांगपिओ में भी हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत परिषद इंप्लाइज यूनियन ने विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। विद्युत उपमंडल रिकांगपिओ से लेकर मुख्य बाजार तक रोष रैली निकाली गई। इस दौरान यूनियन अध्यक्ष सीताराम नेगी की अध्यक्षता में एसडीएम कल्पा डॉ. अवनिंद्र कुमार को ज्ञापन भी सौंपा गया।